
दिल्ली पुलिस ने अवैध प्रवासियों को पकड़ कर FRRO के साथ प्रत्यर्पित किया
महेंद्र पार्क में अवैध बांग्लादेशी अप्रवासियों का पर्दाफाश: दो गिरफ्तार और प्रत्यर्पित
दिल्ली पुलिस: राजधानी दिल्ली के महेंद्र पार्क थाना क्षेत्र में एक संगठित अभियान के दौरान दो अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस की यह कार्रवाई अवैध प्रवासन रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तपोष बिस्वास और एमडी मेहेदी हसन सजल के रूप में हुई है। दोनों आरोपियों को फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) के समन्वय में प्रत्यर्पित किया जा रहा है।
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यह कार्रवाई फॉरेनर सेल द्वारा की गई थी, जो राष्ट्रीय राजधानी में अवैध प्रवासन और पहचान छिपाने जैसी जटिल चुनौतियों का सामना करने में लगातार सक्रिय है। इस अभियान में साइबर इंटेलिजेंस और क्षेत्रीय निगरानी को प्रभावी ढंग से मिलाकर एक संगठित रणनीति लागू की गई।
घटना का संक्षिप्त विवरण
अवैध प्रवासन रोकने के प्रयास में, उत्तर-पश्चिमी जिला पुलिस के फॉरेनर सेल ने PS महेंद्र पार्क क्षेत्र में दो संदिग्ध ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। शुरुआती जांच में पाया गया कि आरोपी भारत में अवैध रूप से रह रहे थे।
अभियान के दौरान यह भी पता चला कि दिन में ये आरोपी भिक्षाटन करते और रात में आपत्तिजनक गतिविधियों में संलग्न रहते थे। इसके अलावा इनके पास दो स्मार्टफोन थे जिनमें प्रतिबंधित IMO ऐप इंस्टॉल था और दोनों के पास बांग्लादेशी राष्ट्रीय पहचान पत्र पाए गए।
अभियान का विवरण
15 अक्टूबर 2025 को न्यू सब्जी मंडी के पास संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस को मिली। इसके बाद फॉरेनर सेल ने अभियान शुरू किया। अभियान में विशेष टीम शामिल थी:
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एसआई तपोश, एएसआई राजेंद्र, एएसआई विजय
एचसी विक्रम, एचसी कपिल कुमार, महिला एचसी दीपक
कांस्टेबल हावा सिंह और कांस्टेबल दीपक बंगार
इस अभियान का संचालन इंस्पेक्टर विपिन कुमार, IC/Foreigner Cell की करीबी देखरेख में और ACP/Foreigner Cell श्री राजीव कुमार के समग्र पर्यवेक्षण में किया गया।
संदिग्ध व्यक्तियों के बारे में खुफिया जानकारी प्राप्त होने के बाद टीम ने संयुक्त छापेमारी की और न्यू सब्जी मंडी के पास आरोपियों को रोका। सतत पूछताछ में आरोपियों ने अपनी बांग्लादेशी नागरिकता स्वीकार की और राष्ट्रीय पहचान पत्र प्रस्तुत किए।
अद्वितीय पहचान छिपाने का तरीका
जांच में यह पता चला कि दोनों आरोपियों ने जेंडर-एफ़र्मिंग सर्जरी (GAS) कर अपनी शारीरिक रूपरेखा बदल ली थी। इसका उद्देश्य था कि वे महिलाओं जैसी दिखाई दें।
इसके लिए उन्होंने निम्नलिखित तरीकों का उपयोग किया:
- नियमित रूप से भारी मेकअप और साड़ी/सलवार सूट पहनना।
- कृत्रिम बाल (विग) और अन्य महिला सहायक उपकरणों का प्रयोग।
- आवाज़ और शारीरिक भाषा को महिलाओं जैसी शैली में ढालना।
इस तरह की छिपी हुई पहचान ने प्रारंभिक जांच और निगरानी को चुनौतीपूर्ण बना दिया था।

दो अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को महेंद्र पार्क से गिरफ्तार कर प्रत्यर्पित किया गया
गिरफ्तार व्यक्तियों का विवरण
- तपोष बिस्वास @ नंदनी
- ट्रांसजेंडर, 37 वर्ष
- गांव: मरियम पारा, डाक: खुलना, PS: खुलना टाउन, जिला: खुलना, राज्य: खुलना, बांग्लादेश
- C/O ल.ट. रॉबिन बिस्वास
- एमडी मेहेदी हसन सजल @ लीमा
- ट्रांसजेंडर, 21 वर्ष
- गांव: कथपट्टी रोड, वार्ड नं. 7, डाक: बारगुना, PS: बारगुना, जिला: बारगुना, राज्य: बारगुना, बांग्लादेश
- C/O एमडी कामरुल हसन अक्कास
जब्ती और डिजिटल सबूत
अभियान के दौरान पुलिस ने निम्नलिखित जब्त किए:
- 02 स्मार्टफोन, जिनमें प्रतिबंधित IMO ऐप इंस्टॉल था।
- 02 बांग्लादेशी राष्ट्रीय पहचान पत्र, फोन गैलरी में पाए गए।
इन सबूतों से स्पष्ट होता है कि आरोपी केवल भिक्षाटन और आपत्तिजनक गतिविधियों में ही नहीं, बल्कि डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का भी दुरुपयोग कर रहे थे।
फॉरेनर सेल की रणनीति
फॉरेनर सेल की टीम ने यह अभियान टेक्नोलॉजी आधारित पुलिसिंग के सिद्धांतों के अनुसार संचालित किया।
- साइबर इंटेलिजेंस: आरोपी की डिजिटल गतिविधियों का पता लगाया गया।
- निगरानी: संदिग्ध क्षेत्रों में टीम ने लगातार नजर रखी।
- क्षेत्रीय अभियान: न्यू सब्जी मंडी और आसपास के इलाकों में छापेमारी की गई।
इस प्रकार की रणनीति ने अवैध प्रवासन और पहचान छिपाने जैसी गंभीर चुनौतियों का प्रभावी समाधान पेश किया।
साइबर और डिजिटल टूल्स का उपयोग
फॉरेनर सेल ने अभियानों में साइबर तकनीक का सक्रिय उपयोग किया। इसमें शामिल हैं:
- संदिग्ध व्यक्तियों के सोशल मीडिया और IM ऐप्स की जांच।
- मोबाइल और डिजिटल उपकरणों का फॉरेंसिक विश्लेषण।
- संदिग्ध पहचान पत्र और डिजिटल दस्तावेज़ों की सत्यता की जाँच।
इस तकनीकी मदद से पुलिस ने सुनिश्चित किया कि गिरफ्तारी सटीक और प्रमाणिक सबूतों के साथ हो।
राष्ट्रीय और स्थानीय सुरक्षा पर प्रभावयह अभियान यह दिखाता है कि राष्ट्रीय राजधानी में अवैध प्रवासन और पहचान छिपाने वाले अपराधियों पर पुलिस सतर्क है।
अवैध प्रवासियों की गतिविधियों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार करना केवल कानून का पालन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।

महेंद्र पार्क में अवैध प्रवास रोकने के अभियान में दो बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए
प्रत्यर्पण और आगे की कार्रवाई
अभियान के बाद गिरफ्तार आरोपियों को FRRO के समन्वय में प्रत्यर्पित किया जा रहा है।
- यह सुनिश्चित करता है कि आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत से बाहर भेजा जाए।
- पुलिस की कोशिश है कि ऐसे अपराधियों का भविष्य में पुनः प्रवेश रोका जाए।
- साथ ही पुलिस अन्य अवैध प्रवासियों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
स्थानीय और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह अभियान कानून और व्यवस्था बनाए रखने और राष्ट्रीय राजधानी में अवैध रूप से रहने वाले व्यक्तियों पर नजर रखने के लिए किया गया।
ACP/Foreigner Cell श्री राजीव कुमार ने कहा:
“फॉरेनर सेल की यह कार्रवाई टेक्नोलॉजी और क्षेत्रीय निगरानी का बेहतरीन उदाहरण है। हम अवैध प्रवास और पहचान छिपाने जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए सतत प्रयासरत हैं।”
स्थानीय निवासी भी इस कार्रवाई से संतुष्ट हैं और यह देखते हैं कि पुलिस सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय है।
सार्वजनिक संदेश
इस कार्रवाई के माध्यम से पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि किसी संदिग्ध विदेशी नागरिक या अवैध गतिविधियों का पता चले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
इसके अतिरिक्त पुलिस ने कहा कि किसी भी तरह की पहचान छिपाने या अवैध प्रवास में शामिल व्यक्तियों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

दो ट्रांसजेंडर बांग्लादेशी अवैध रूप से दिल्ली में पकड़े गए और प्रत्यर्पित किए गए
निष्कर्ष
महेंद्र पार्क थाना क्षेत्र में यह अभियान यह साबित करता है कि दिल्ली पुलिस टेक्नोलॉजी और पारंपरिक पुलिसिंग को मिलाकर अवैध प्रवासन और आपत्तिजनक गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही है।
- गिरफ्तार आरोपी केवल अवैध प्रवासी नहीं थे, बल्कि उन्होंने पहचान छिपाने के लिए जेंडर-सर्जरी और डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल किया।
- फॉरेनर सेल की सतर्कता और तकनीकी क्षमता ने सुनिश्चित किया कि आरोपी सबूतों के साथ पकड़े गए।
- यह कार्रवाई नागरिकों के लिए सुरक्षा का संदेश है और अन्य अवैध प्रवासियों को चेतावनी भी।
अभियान और गिरफ्तारी इस बात का उदाहरण है कि पुलिस साइबर इंटेलिजेंस, क्षेत्रीय निगरानी और डिजिटल जांच का मिश्रण करके गंभीर अपराधों को उजागर कर सकती है।