
साइबर अपराधियों की ठगी का शिकार बनी दिल्ली पुलिस कर्मी
दिल्ली पुलिस की महिला कांस्टेबल से 3.30 लाख की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की महिला कांस्टेबल बनी साइबर ठगी का शिकार, पुलिस ने 1.34 करोड़ रुपए कैश बरामद कर दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
द्वारका साइबर थाना पुलिस की बड़ी कार्रवाई
दिल्ली जैसे महानगर में साइबर अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं। आए दिन नए-नए तरीके अपनाकर अपराधी भोले-भाले लोगों को ठगते हैं। लेकिन इस बार साइबर अपराधियों ने दिल्ली पुलिस की ही एक महिला कांस्टेबल को अपना शिकार बना लिया।
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मामला द्वारका जिला पुलिस के थाना साइबर का है। यहां पर तैनात महिला हेड कांस्टेबल ने शिकायत दर्ज करवाई कि प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में दाखिला दिलाने के नाम पर उनसे लाखों रुपए की ठगी की गई। शिकायत मिलते ही पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अंकित सिंह के निर्देश पर एसएचओ राजीव कुमार की टीम ने जाल बिछाकर इस ठगी के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया।
ठगी का तरीका – एडमिशन का लालच
गिरफ्तार आरोपियों ने खुद को प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ा दिखाया। वे छात्रों और अभिभावकों को यह विश्वास दिलाते थे कि वे मैनेजमेंट कोटा और विशेष चैनल के जरिए नामी यूनिवर्सिटी में एडमिशन दिलवा सकते हैं।
इसी जाल में दिल्ली पुलिस की महिला कांस्टेबल भी फंस गईं। उन्होंने आरोपियों से संपर्क किया और आरोपी ने उनसे 3.30 लाख रुपए की डिमांड कर एडमिशन का वादा किया।
शुरुआत में कांस्टेबल को लगा कि सब सही है, लेकिन जब समय पर कोई एडमिशन कन्फर्मेशन नहीं मिला और लगातार बहानेबाजी शुरू हो गई, तब उन्हें शक हुआ।

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पुलिस में शिकायत दर्ज
महिला हेड कांस्टेबल ने तुरंत मामले की शिकायत थाना साइबर द्वारका में दर्ज करवाई। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एक स्पेशल टीम का गठन किया।
डीसीपी अंकित सिंह के मुताबिक, टीम ने तकनीकी जांच, कॉल डिटेल्स और बैंक ट्रांजैक्शन की गहन पड़ताल की। जल्द ही पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई।
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आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर गाजियाबाद के मोदीपुरम इलाके में छापा मारा। यहां से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनकी पहचान कुंशकरा श्रीवास्तव और चिमैया सिन्हा के रूप में हुई।
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पुलिस ने आरोपियों के पास से बरामद किया:
1 करोड़ 34 लाख रुपए कैश - 6 मोबाइल फोन
- 1 लैपटॉप
यह बरामदगी साफ दिखाती है कि आरोपी बड़े पैमाने पर साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे।
ठगी का जाल – देशभर में फैला नेटवर्क
प्राथमिक जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से इस गिरोह को चला रहे थे। वे केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी छात्रों और अभिभावकों को निशाना बना चुके थे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी ठगी के पैसों को अलग-अलग खातों में घुमाकर रखते थे और बड़ी रकम को कैश में निकाल लेते थे ताकि ट्रेस न किया जा सके।
महिला कांस्टेबल का साहस बना मिसाल
दिल्ली पुलिस की महिला कांस्टेबल ने ठगी का एहसास होते ही तुरंत शिकायत दर्ज करवाई। उनकी सतर्कता और साहस से न केवल उनका केस सुलझा बल्कि पुलिस को करोड़ों की ठगी का पर्दाफाश करने का मौका मिला।

द्वारका पुलिस ने साइबर अपराधियों का नेटवर्क तोड़ा
साइबर ठगों से बरामद हुए 6 मोबाइल और एक लैपटॉप
डीसीपी अंकित सिंह का बयान
द्वारका जिला डीसीपी अंकित सिंह ने कहा –
“यह एक बेहद गंभीर मामला था क्योंकि आरोपी सीधे शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र को निशाना बना रहे थे। ठगी के जरिए भोले-भाले लोगों की मेहनत की कमाई हड़पी जा रही थी। हमने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया है और आगे और भी खुलासे होने की संभावना है।”
पुलिस की चेतावनी
पुलिस ने आम नागरिकों को चेतावनी दी है कि किसी भी तरह की एडमिशन, नौकरी या लोन स्कीम में बिना सत्यापन के पैसे ट्रांसफर न करें।
साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में लोगों को सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
समाज पर असर
इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि अपराधी अपने शिकार को पहचानने में सक्षम हैं, चाहे वह आम नागरिक हो या पुलिस कर्मी। साइबर अपराध का यह रूप शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र को कलंकित करता है और छात्रों व अभिभावकों को मानसिक रूप से आहत करता है।

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नतीजा
द्वारका साइबर थाना पुलिस की इस कार्रवाई ने करोड़ों की ठगी का भंडाफोड़ किया है। दो आरोपियों की गिरफ्तारी और भारी कैश बरामदगी से साफ है कि यह नेटवर्क बेहद संगठित था।
महिला कांस्टेबल की सतर्कता और पुलिस की तत्परता ने कई और लोगों को ठगी का शिकार होने से बचा लिया।