
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी दिल्ली में भूमि पूजन संपन्न
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुआ शुभारंभ
दिल्ली की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में रामलीला का आयोजन एक विशेष महत्व रखता है। हर साल नवरात्र और दशहरा के अवसर पर राजधानी के विभिन्न हिस्सों में भव्य रामलीलाओं का मंचन किया जाता है। इस परंपरा की शुरुआत सदियों पहले हुई थी और आज यह न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि भारतीय संस्कृति, समाज और एकता का प्रतीक बन चुकी है।
इसी कड़ी में इस बार श्री धार्मिक रामलीला कमेटी दिल्ली ने 102वीं रामलीला आयोजन की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। रविवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लाल किले के पास भूमि पूजन कर इस रामलीला महोत्सव की विधिवत शुरुआत की।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का आश्वासन
भूमि पूजन के दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रामलीला कमेटियों और आयोजकों को संबोधित करते हुए आश्वासन दिया कि किसी भी प्रकार की समस्या या परमिशन से जुड़ी बाधा नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने इस बार विशेष रूप से एक सिंगल विंडो सिस्टम बनाया है, ताकि रामलीला समितियों को अलग–अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें।
मुख्यमंत्री ने कहा –
“रामलीला हमारी परंपरा और संस्कृति की धरोहर है। यह आयोजन समाज को जोड़ता है, हमें भगवान श्रीराम के आदर्शों को याद दिलाता है। दिल्ली सरकार इस आयोजन को सफल बनाने के लिए हर संभव मदद देगी।”

लाल किले से शुरू होगी 102 साल पुरानी श्री धार्मिक रामलीला, भूमि पूजन में शामिल हुए बड़े नेता
वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति
इस भूमि पूजन के अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और देश के जाने-माने राजनीतिज्ञ डॉ. मुरली मनोहर जोशी भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी अपने संबोधन में कहा कि रामलीला न केवल एक धार्मिक उत्सव है बल्कि भारतीय समाज के सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसके अलावा, संसद सदस्य बांसुरी स्वराज भी इस मौके पर मौजूद रहीं। उन्होंने भूमि पूजन में भाग लिया और रामलीला कमेटी को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि माता सीता और भगवान श्रीराम की मर्यादा हमें हमेशा प्रेरणा देती है।
दिल्ली रामलीला मैदान में भूमि पूजन | 1918 से पंजीकृत ऐतिहासिक रामलीला की शुरुआत
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी का इतिहास
दिल्ली की श्री धार्मिक रामलीला कमेटी देश की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित रामलीला समितियों में से एक मानी जाती है। इस रामलीला की शुरुआत 1922 में हुई थी और अब यह अपनी 102वीं वर्षगांठ मना रही है।
समिति के व्यवस्थापक ब्रह्म स्वामी दिल ने बताया कि हर साल इस रामलीला में कुछ नए प्रयोग और बदलाव किए जाते हैं, ताकि दर्शक न केवल धार्मिक आनंद लें बल्कि सामाजिक संदेश भी समझ सकें। उन्होंने कहा –
“यह रामलीला हमारे लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि समाज को दिशा देने वाला उत्सव है। मैं सभी लोगों से अपील करता हूँ कि वे भारी संख्या में आएँ और भगवान श्रीराम की लीलाओं का आनंद लें।”
UP: अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला, बोले- पूजा पाल को मोहरा बनाकर सपा के खिलाफ दुष्प्रचार करवा रही यूपी सरकार
रामलीला का सांस्कृतिक महत्व
दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे भारत में रामलीला का आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करता है। इसमें सभी वर्ग और धर्म के लोग शामिल होकर भगवान श्रीराम की मर्यादा और आदर्शों को याद करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि रामलीला केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हमारे लोकनाट्य और लोकसाहित्य की अनमोल धरोहर है। इसमें अभिनय, संगीत, नृत्य, संवाद और मंच सज्जा का अनोखा संगम देखने को मिलता है।

दिल्ली की सबसे पुरानी 102वीं श्री धार्मिक रामलीला का भूमि पूजन संपन्न, जानिए पूरी जानकारी
22 सितंबर से होगा भव्य मंचन
इस वर्ष रामलीला का भव्य मंचन 22 सितंबर से आरंभ होगा। लाल किला मैदान और दिल्ली के अन्य प्रमुख स्थलों पर हजारों की संख्या में लोग पहुंचेंगे। रामलीला का मंचन लगातार कई दिनों तक चलेगा और इसका समापन दशहरे पर रावण दहन के साथ होगा।
भूमि पूजन के साथ ही अब दिल्ली की तमाम बड़ी रामलीलाओं की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। राजधानी में सैकड़ों स्थानों पर रामलीलाओं का आयोजन होता है, लेकिन लाल किले के पास होने वाली रामलीला का अपना ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व है।
जनता में उत्साह
भूमि पूजन के बाद आसपास के क्षेत्रों में उत्सव का माहौल देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने फूलों और नारियल के साथ आयोजन का स्वागत किया। बच्चे, महिलाएँ और बुजुर्ग सभी लोग इस धार्मिक आयोजन को लेकर बेहद उत्साहित दिखाई दिए।
लोगों का कहना है कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि पूरे परिवार के लिए आनंद और सीख का अवसर है। इसमें बच्चे भगवान श्रीराम की लीलाओं को देखकर अच्छे संस्कार सीखते हैं और बड़ों को भी आदर्शों पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

दिल्ली में सभी बड़ी रामलीलाओं का भूमि पूजन, श्री धार्मिक रामलीला बनी आकर्षण का केंद्र
निष्कर्ष
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी का 102वाँ आयोजन इस वर्ष दिल्ली में एक बार फिर से सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, डॉ. मुरली मनोहर जोशी और बांसुरी स्वराज जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया है।
22 सितंबर से शुरू होने वाली यह रामलीला दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। रामलीला हमें न केवल भगवान श्रीराम के आदर्शों की याद दिलाती है, बल्कि समाज में भाईचारे, सत्य, धर्म और न्याय की भावना को मजबूत करती है।