
BMW कार एक्सीडेंट दिल्ली: धौला कुआं पर हुआ बड़ा हादसा, डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत सिंह की जान गई
दिल्ली का दर्दनाक हादसा: बीएमडब्ल्यू की टक्कर में वित्त मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत सिंह की मौत, पत्नी गंभीर
नई दिल्ली, 14 सितंबर 2025।
राजधानी दिल्ली एक बार फिर रफ्तार के कहर की गवाह बनी। धौला कुआं से राजा गार्डन की ओर जाते समय एक बीएमडब्ल्यू कार की टक्कर से भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत सिंह की मौत हो गई। हादसे में उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं और फिलहाल उनका इलाज जारी है।
यह हादसा रविवार को उस समय हुआ जब नवजोत सिंह और उनकी पत्नी बंगला साहिब गुरुद्वारा में माथा टेकने के बाद घर लौट रहे थे। दोनों के लिए यह एक सामान्य दिन था। उन्होंने परिवारिक रिवाज़ के अनुसार माथा टेका, लंच किया और अपनी कार से घर की ओर निकल पड़े। लेकिन घर पहुंचने से पहले ही किस्मत ने उनका साथ छोड़ दिया।
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हादसा कैसे हुआ?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक हादसा धौला कुआं फ्लाईओवर के पास, पिलर नंबर 57 से राजा गार्डन की ओर हुआ। वहां एक बीएमडब्ल्यू कार, जिसे एक महिला चला रही थी, तेज रफ्तार में आकर नवजोत सिंह की कार से टकरा गई। इस टक्कर के बाद कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
पुलिस को कॉल दिल्ली कैंट मेट्रो स्टेशन से धौला कुआं की तरफ से मिली थी। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो पाया कि एक बीएमडब्ल्यू और एक मोटरसाइकिल वहां मौजूद थे। चश्मदीदों ने बताया कि महिला चालक ने पहले मोटरसाइकिल को टक्कर मारी और फिर नवजोत सिंह की गाड़ी से भी भिड़ंत हो गई।
अस्पताल ले जाने में हुई लापरवाही?
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि गंभीर रूप से घायल नवजोत सिंह और उनकी पत्नी को पास के किसी बड़े ट्रॉमा सेंटर या सफदरजंग जैसे अस्पताल में ले जाने की बजाय, 17 किलोमीटर दूर जीटीबी नगर स्थित न्यू लाइफ अस्पताल क्यों ले जाया गया?
उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि इस दूरी ने कीमती समय छीन लिया। शायद समय पर नज़दीकी अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो नवजोत सिंह की जान बच सकती थी।
न्यू लाइफ अस्पताल की डायरेक्टर और सीनियर डॉक्टर शकुंतला कुमार ने इस पर बयान देते हुए कहा –
“कल मृत अवस्था में लाए गए थे नवजोत सिंह। उनके साथ कुछ अन्य लोग भी घायल अवस्था में अस्पताल लाए गए। हमने पूरी कोशिश की, लेकिन नवजोत सिंह को मृत घोषित करना पड़ा।”

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यह बयान एक ओर हादसे की गंभीरता को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर मेडिकल इमरजेंसी में सही अस्पताल चयन पर भी सवाल उठाता है।
नवजोत सिंह कौन थे?
नवजोत सिंह वित्त मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे। अपने विभाग में वे मेहनती और ईमानदार अधिकारी माने जाते थे। परिवार और सहयोगियों के मुताबिक वे एक धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और अक्सर गुरुद्वारों में मत्था टेकने जाते थे।
उनकी अचानक हुई मौत से वित्त मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों में गहरा सदमा है। मंत्रालय के कई अधिकारियों ने इसे “सेवा भावना से जुड़े अधिकारी की असमय मौत” बताया।
चश्मदीदों का बयान
हादसे के वक्त मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि बीएमडब्ल्यू को एक महिला चला रही थी, जिसके साथ उसका पति भी मौजूद था।
एक चश्मदीद ने बताया –
“टक्कर के बाद महिला घबराई हुई लग रही थी। उन्होंने घायल को खुद अस्पताल पहुंचाने की कोशिश नहीं की, बल्कि एक टैक्सी बुलाकर भेज दिया। इसके बाद बीएमडब्ल्यू कार को वहीं छोड़कर दोनों मौके से चले गए।”
यह बयान पुलिस के उस दावे की पुष्टि करता है जिसमें कहा गया कि चालक महिला अपने पति के साथ घायल को टैक्सी में डालकर रवाना हो गई और खुद फरार हो गई।

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पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने बीएमडब्ल्यू कार को अपने कब्जे में ले लिया है। कार की रजिस्ट्रेशन डिटेल्स निकाली जा रही हैं और पता लगाया जा रहा है कि महिला चालक कौन थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, चालक महिला और उसके पति का पता लगाया जा रहा है। उन पर लापरवाही से गाड़ी चलाने, दुर्घटना कराने और मौके से भागने का केस दर्ज किया गया है।
दिल्ली पुलिस ने टेक्स्ट मैसेज के जरिए बताया –
“आज रविवार को दिल्ली पुलिस को दिल्ली कैंट मेट्रो स्टेशन से धौला कुआं की तरफ यह कॉल प्राप्त हुई। मौके पर पहुंचने पर पाया गया कि बीएमडब्ल्यू कार और मोटरसाइकिल पिलर नंबर 67 के पास थे। आईविटनेस ने बयान दिया कि बीएमडब्ल्यू को महिला चला रही थी, जिसने मोटरसाइकिल को टक्कर मारी और फिर घायल को टैक्सी से अस्पताल भेज दिया। बीएमडब्ल्यू कार को जब्त कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है।”
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परिवार का दर्द
नवजोत सिंह के परिवार के लिए यह एक असहनीय सदमा है। उनकी पत्नी अभी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं। घरवालों का कहना है कि नवजोत हमेशा सावधानी से गाड़ी चलाते थे और नियमों का पालन करते थे, लेकिन दूसरी तरफ से आई लापरवाह ड्राइविंग ने उनकी जान ले ली।
परिवार का यह भी आरोप है कि अस्पताल ले जाने में की गई देरी ने नवजोत की जान छीन ली।
सड़क सुरक्षा पर सवाल
दिल्ली में आए दिन ऐसे हादसे होते रहते हैं। तेज रफ्तार, लापरवाह ड्राइविंग और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी ने राजधानी की सड़कों को मौत का जाल बना दिया है।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं –
- क्या लग्ज़री कार चलाने वाले खुद को ट्रैफिक नियमों से ऊपर समझते हैं?
- हादसे के बाद चालक को मौके से जाने की अनुमति क्यों मिली?
- पुलिस और प्रशासन कब तक सिर्फ जांच की बात करते रहेंगे?
- क्या गंभीर मरीजों को पास के अस्पताल ले जाने के लिए कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है?
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
हादसे की खबर सामने आने के बाद दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार दोनों की तरफ से संवेदनाएं जताई गई हैं। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि वे मंत्रालय के स्तर पर परिवार की हर संभव मदद करेंगे।
दिल्ली पुलिस पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या घटनास्थल से अस्पताल तक पहुंचाने में पर्याप्त समन्वय किया गया था या नहीं।

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बीएमडब्ल्यू हादसों का पुराना इतिहास
यह पहला मौका नहीं है जब दिल्ली में बीएमडब्ल्यू कार किसी बड़ी दुर्घटना में शामिल हुई हो। इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां बीएमडब्ल्यू जैसी लग्ज़री गाड़ियां तेज रफ्तार में हादसे का कारण बनी हैं।
- 1999 में कनॉट प्लेस का कुख्यात बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन केस आज भी लोगों की याद में ताजा है।
- हाल ही में भी गुरुग्राम और नोएडा में कई हादसे ऐसे दर्ज हुए हैं जिनमें बीएमडब्ल्यू कार शामिल रही।
नवजोत सिंह की असमय मौत सिर्फ एक परिवार का निजी दुख नहीं है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और लापरवाह ड्राइविंग पर एक गहरी चोट है।
उनकी पत्नी अभी भी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही हैं। परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। पुलिस ने बीएमडब्ल्यू जब्त कर ली है और महिला चालक की तलाश जारी है। लेकिन यह सवाल अब भी बाकी है – अगर दिल्ली की सड़कों पर कानून और सुरक्षा की अनदेखी इसी तरह होती रही तो क्या कोई भी व्यक्ति सड़क पर सुरक्षित रह पाएगा?