अशोक विहार सीवर हादसा: जहरीली गैस से मजदूर अरविंद की मौत, दो घायल

Delhi Sewer Cleaning Tragedy: 35 साल के मजदूर की मौत, दो घायल – परिवार का भविष्य अधर में नई दिल्ली नगर पालिका परिषद अशोक विहार

अशोक विहार

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Delhi Sewer Cleaning Tragedy: 35 साल के मजदूर की मौत, दो घायल – परिवार का भविष्य अधर में

नई दिल्ली नगर पालिका परिषद

अशोक विहार सीवर हादसा: जहरीली गैस से मजदूर की मौत, दो घायल – मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल

राजधानी दिल्ली में एक दर्दनाक हादसे ने एक परिवार को जिंदगी भर का ग़म दे दिया। बीती रात उत्तर-पश्चिम दिल्ली के अशोक विहार इलाके में सीवर की सफाई के दौरान जहरीली गैस का शिकार होकर एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि दो मजदूर गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। मृतक का नाम अरविंद है जिसकी उम्र मात्र 35 साल थी। इस घटना ने न केवल परिवार को झकझोर दिया बल्कि समाज और सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर क्यों 21वीं सदी में भी मजदूरों को बिना सुरक्षा उपकरणों के मौत के कुएँ यानी सीवर में उतारा जाता है।

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हादसा कैसे हुआ?

बीती रात अशोक विहार इलाके में एक सीवर लाइन की सफाई का काम चल रहा था। ठेकेदार ने तीन मजदूरों को सीवर में भेजा। आरोप है कि मजदूरों को कोई सुरक्षा उपकरण, ऑक्सीजन सिलेंडर, मास्क या गैस डिटेक्टर उपलब्ध नहीं कराए गए थे।

तीनों मजदूर जैसे ही गहरे सीवर में उतरे, वहां मौजूद जहरीली गैस ने उन्हें चपेट में ले लिया। कुछ ही मिनटों में वे बेहोश हो गए। बाहर खड़े अन्य मजदूरों और लोगों ने हंगामा मचाया और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला गया।

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अरविंद ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो अन्य मजदूरों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया।

मृतक अरविंद कौन था?

अरविंद उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले का रहने वाला था। वह अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहकर मजदूरी करता था। उसका जीवन बेहद संघर्षपूर्ण था।

  • अरविंद की उम्र 35 साल थी।
  • परिवार में पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं।
  • वह रोज़ाना दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का पेट पालता था।
  • उसकी पत्नी ने बताया कि “अरविंद बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च उठाने के लिए दिन-रात मेहनत करता था।”

हादसे वाले दिन भी अरविंद घर पर था, लेकिन ठेकेदार ने उसे काम पर बुला लिया। परिवार का कहना है कि ठेकेदार ने उसे अधिक पैसे का लालच दिया और मजबूरी में उसने काम स्वीकार कर लिया।

पत्नी का दर्द

अरविंद की पत्नी निशा का रो-रोकर बुरा हाल है। उसका कहना है:

“मेरे बच्चों का सहारा छिन गया। अब हम किसके भरोसे जिएँगे? अगर ठेकेदार ने सुरक्षा उपकरण दिए होते तो मेरे पति जिंदा होते। हमें सिर्फ कुछ रुपए चाहिए थे, लेकिन अब तो पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई।”

बाइट – निशा, मृतक की पत्नी

दोस्त की प्रतिक्रिया

अरविंद के करीबी दोस्त उमरेश यादव ने भी गुस्से और दुख के साथ कहा कि अरविंद हमेशा अपने परिवार के लिए मेहनत करता था।

“उसने कभी किसी से गलत काम नहीं लिया। वह गरीब था लेकिन ईमानदार था। यह हादसा उसकी मजबूरी और सिस्टम की लापरवाही की वजह से हुआ है। अगर सरकार और ठेकेदार जिम्मेदारी निभाते तो आज अरविंद हमारे बीच होता।”

Delhi Sewer Cleaning Death: ठेकेदार की लापरवाही से गई मजदूर की जान, दो गंभीर घायल

उमरेश यादव, दोस्त

मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि मजदूरों को बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर में उतारा गया।

  • किसी को मास्क, हेलमेट या पीपीई किट नहीं दिया गया।
  • न ऑक्सीजन सिलेंडर था और न ही गैस का स्तर जांचने के लिए कोई डिटेक्टर।
  • मजदूरों को थोड़े पैसों के लालच में जान जोखिम में डालकर सीवर में उतार दिया गया।

यह पहला मामला नहीं है। हर साल दिल्ली और देशभर में ऐसे कई हादसे होते हैं, जिनमें मजदूरों की जान जाती है।

पोस्टमार्टम और जांच

अरविंद के शव को बाबू जगजीवन राम अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में भी यह सामने आया है कि मजदूरों को सुरक्षा उपकरण नहीं मिले थे।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए और परिवार को मुआवजा दिया जाए।

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कानून और हकीकतसाल 2013 में संसद ने मैनुअल स्कैवेंजिंग प्रतिबंध कानून बनाया था। इस कानून के तहत सीवर की मैनुअल सफाई पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

  • नियमों के अनुसार मशीनों से सीवर की सफाई होनी चाहिए।
  • मजदूरों को सीधे सीवर में नहीं उतारा जाना चाहिए।
  • यदि कभी मजदूरों को अंदर भेजना भी पड़े तो पूरी सुरक्षा किट, गैस डिटेक्टर और ऑक्सीजन सिलेंडर अनिवार्य है।

लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है। आज भी ठेकेदार मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के मौत के मुँह में धकेल देते हैं।

अशोक विहार दिल्ली हादसा – सीवर में दम घुटने से मजदूर की मौत, मजदूर सुरक्षा पर गंभीर सवाल

मजदूरों की मजबूरी

अरविंद जैसे मजदूरों की सबसे बड़ी मजबूरी है गरीबी।

  • उन्हें न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिलती।
  • बीमा और स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी नहीं होती।
  • कोई लिखित कॉन्ट्रैक्ट या काम का भरोसा नहीं दिया जाता।
  • जब हादसा होता है तो परिवार मुआवजे के लिए महीनों तक चक्कर काटता है।

अरविंद की पत्नी ने कहा कि अगर उसके पति ने मना कर दिया होता तो घर का खर्च कैसे चलता? बच्चों की पढ़ाई और रोटी-पानी का इंतजाम कैसे होता? यही मजबूरी उसे मौत के कुएँ में ले गई।

सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों की राय

श्रम कानून और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • सीवर सफाई में मजदूरों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मशीनों की होनी चाहिए।
  • मजदूरों को पीपीई किट, मास्क, हेलमेट और ऑक्सीजन सिलेंडर देना अनिवार्य है।
  • सीवर में उतरने से पहले गैस का स्तर मापा जाना चाहिए।
  • यदि इन नियमों का पालन होता तो हादसों को रोका जा सकता है।

सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस हादसे को नजरअंदाज न किया जाए और ठेकेदार को कड़ी सजा दी जाए।

परिवार की मांग

अरविंद की पत्नी और स्थानीय लोगों की मांग है कि:

  • मृतक के परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
  • घायल मजदूरों का इलाज सरकार मुफ्त में कराए।
  • अरविंद के बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण की जिम्मेदारी सरकार उठाए।
  • ठेकेदार और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

सीवर हादसों का सिलसिला

यह कोई पहली घटना नहीं है।

  • पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कई शहरों में सीवर सफाई के दौरान मजदूरों की मौत हुई है।
  • हर बार प्रशासन और सरकार बड़े-बड़े दावे करते हैं लेकिन जमीनी हकीकत वही रहती है।
  • मजदूरों को उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर मौत के काम में झोंक दिया जाता है।

अरविंद के बच्चों का भविष्य

इस हादसे ने सिर्फ अरविंद की जिंदगी नहीं छीनी, बल्कि उसके परिवार का भविष्य भी अंधकार में धकेल दिया।

  • दो छोटे बच्चे अब पिता के बिना बड़े होंगे।
  • पत्नी को अकेले ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठानी होगी।
  • बच्चे मासूम हैं, लेकिन उनका भविष्य पूरी तरह सरकार और समाज की मदद पर निर्भर है।

स्थानीय लोग कह रहे हैं कि सरकार को सिर्फ मुआवजा देकर पीछा नहीं छुड़ाना चाहिए बल्कि बच्चों की पढ़ाई और रहने की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।

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