
श्री राम लखन रामलीला समिति रोहिणी सेक्टर 24 : 20 वर्षों से भगवान राम की मर्यादाओं को जीवंत करती परंपरा
रिठाला विधानसभा में श्री राम लखन रामलीला कमेटी का दशहरा महोत्सव, हजारों लोग उमड़ेदेशभर में नवरात्र और दशहरे के पर्व का अपना एक अलग ही महत्व है। इस दौरान भारत के हर कोने में रामलीलाओं का आयोजन किया जाता है, जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को जीवंत बनाए रखने का भी साधन हैं। दिल्ली जैसे महानगर में भी रामलीलाओं की धूम देखने को मिलती है। इन्हीं में से एक है श्री राम लखन रामलीला समिति, जो पिछले 20 वर्षों से लगातार रामलीला का मंचन कर रही है।
यह रामलीला न केवल भगवान राम की जीवनगाथा को मंच पर प्रस्तुत करती है, बल्कि लोगों को उनके आदर्शों, मर्यादाओं और मूल्यों से जोड़ने का भी कार्य करती है।
भव्य आयोजन और भारी भीड़
रोहिणी सेक्टर-24 में आयोजित इस रामलीला में रोजाना सैकड़ों-हजारों लोग शामिल होते हैं। मंच पर अनुभवी और मंझे हुए कलाकारों द्वारा किए गए जीवंत मंचन को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
इस वर्ष भी रामलीला समिति ने नवरात्र और दशहरे के अवसर पर भव्य रामलीला और दशहरा महोत्सव का आयोजन किया है। मंचन के साथ-साथ समिति की ओर से मेले का भी आयोजन किया गया है, जिसमें खाने-पीने, खेलकूद और धार्मिक वस्तुओं की दुकानों ने पूरे माहौल को और उत्सवमय बना दिया है।
संस्थापक और प्रेरणास्रोत
इस समिति के संस्थापक और प्रेरणास्रोत भाजपा नेता व रिठाला विधानसभा से विधायक कुलवंत राणा हैं। उनका मानना है कि इस प्रकार के आयोजन सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि यह युवाओं को अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं से जोड़ने का माध्यम भी हैं।

दिल्ली की रामलीला: कुलवंत राणा ने कहा – भगवान श्रीराम के आदर्श आज की युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक
उन्होंने मंच से कहा:
“भगवान श्रीराम ने अपने जीवन में हर रिश्ते की मर्यादा निभाई। रामलीलाओं के माध्यम से हमें यही संदेश मिलता है कि परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन मर्यादा और आदर्शों के साथ करना चाहिए। आज की युवा पीढ़ी के लिए यह सीख बेहद जरूरी है।”
मंचन के दृश्य और संदेश
इस रामलीला में मंच पर हर रोज़ अलग-अलग प्रसंग जीवंत किए जाते हैं। दर्शक जब भगवान श्रीराम का वनवास, सीता हरण, लक्ष्मण-भरत संवाद या रावण वध का दृश्य देखते हैं, तो वे न केवल कहानी का आनंद उठाते हैं, बल्कि उससे मिलने वाले जीवन-मूल्य भी आत्मसात करते हैं।
तस्वीरों और दृश्यों में देखा जा सकता है कि किस तरह कैकयी और भरत के बीच संवाद का मंचन किया गया। इन दृश्यों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि रिश्तों में त्याग, प्रेम और मर्यादा का कितना महत्व है।
देशभक्ति का अनूठा संगम – ऑपरेशन सिंदूर
इस रामलीला की खासियत यह भी रही कि यहाँ धार्मिक मंचन के साथ-साथ देशभक्ति का संदेश भी दिया गया। समिति ने ऑपरेशन सिंदूर के बोर्ड लगाकर पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही उन वीर सैनिकों को सलाम किया, जिन्होंने पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को जवाब दिया था।

श्री राम लखन लीला समिति रोहिणी: 20 वर्षों से कर रही है भगवान राम की मर्यादाओं का मंचन
कुलवंत राणा ने कहा –
“पुलवामा में पाकिस्तान की कायराना हरकत का जवाब मोदी सरकार और हमारी सेनाओं ने पूरी मर्यादा और साहस के साथ दिया। बिना किसी निर्दोष पाकिस्तानी नागरिक को नुकसान पहुँचाए हुए हमारी सेना ने जो कार्रवाई की, वह दुनिया के लिए उदाहरण है।”
संस्कृति और समाज पर प्रभाव
रामलीलाएं केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का कार्य भी करती हैं। आज जब युवा पीढ़ी मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया में खो रही है, ऐसे में रामलीलाएं उन्हें अपने संस्कार, संस्कृति और इतिहास से जोड़ने का बेहतरीन माध्यम हैं।
कुलवंत राणा ने इस पर कहा:
“रामलीलाएं आज की युवा पीढ़ी को सिखाती हैं कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ आएं, हमें अपने आदर्शों और मर्यादाओं से समझौता नहीं करना चाहिए। यही भगवान श्रीराम का संदेश है।”
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20 वर्षों की परंपरा
पिछले करीब 20 सालों से लगातार यह समिति रामलीला का आयोजन कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस रामलीला ने उनके जीवन में एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार किया है। हर साल यहाँ दशहरे के मौके पर रावण दहन देखने हजारों की भीड़ जुटती है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
यहाँ आने वाले दर्शकों का कहना है कि रामलीला देखना सिर्फ धार्मिक अनुभव नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव है। एक बुजुर्ग दर्शक ने कहा –
“हमारे बच्चों को टीवी और फिल्मों से ज्यादा रामलीला देखनी चाहिए। यहाँ से उन्हें त्याग, मर्यादा और संस्कार की शिक्षा मिलती है।”
वहीं युवाओं का कहना है कि लाइव मंचन का अपना अलग ही आनंद है। “जब राम वनवास या रावण वध का दृश्य मंच पर होता है तो हम खुद को उसी कालखंड में महसूस करते हैं।”.
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रामलीलाओं का सामाजिक महत्व
रामलीला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं है बल्कि यह सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक भी है। इस आयोजन में हर वर्ग और हर उम्र के लोग शामिल होते हैं। चाहे बच्चे हों, महिलाएं हों या बुजुर्ग – सभी एक साथ बैठकर भगवान राम की कथा का आनंद उठाते हैं। इससे समाज में आपसी प्रेम और जुड़ाव बढ़ता है।

रामलीला और दशहरा उत्सव 2025: रोहिणी सेक्टर 24 में हुआ भव्य आयोजन
रोहिणी सेक्टर-24 की श्री राम लखन रामलीला समिति ने पिछले 20 वर्षों से जो परंपरा कायम की है, वह न केवल दिल्ली बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। यहाँ मंचित रामलीला हर साल लोगों को यह संदेश देती है कि सत्य की सदैव विजय होती है और मर्यादा, आदर्श और धर्म ही जीवन की सच्ची राह है।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि यह समाज को जोड़ने, युवाओं को संस्कृति से परिचित कराने और देशभक्ति का संदेश देने का एक सशक्त माध्यम भी है।