
धर्मशीला नारायणा अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट्स ने बच्चों और वयस्कों के लिए हृदय रोग चेतावनी दी
धर्मशीला नारायणा अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञों ने “अचानक” दिल के दौरे सम्बन्धी मिथकों को किया दूर
नई दिल्ली, 27 सितंबर 2025 – दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित धर्मशीला नारायणा अस्पताल ने हाल ही में एक व्यापक हृदय स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें हृदय रोग से संबंधित कई प्रचलित मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने पर विशेष जोर दिया गया। इस कार्यक्रम में अस्पताल के छह प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ शामिल हुए, जिन्होंने उपस्थित लोगों और पत्रकारों को हृदय स्वास्थ्य के महत्व, सही जीवनशैली और रोगों से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं था, बल्कि लोगों में हृदय स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाना और लंबे समय तक स्वस्थ हृदय बनाए रखने के लिए व्यवहारिक सुझाव देना भी था। विशेषज्ञों ने बताया कि आजकल हृदय रोग न केवल वयस्कों में बल्कि छोटे बच्चों में भी बढ़ते जा रहे हैं, और इसके लिए जीवनशैली में सुधार की तत्काल आवश्यकता है।
हृदय स्वास्थ्य और जीवनशैली का महत्व
इस मौके पर कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ निदेशक, डॉक्टर प्रोफेसर हेमंत मदान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हृदय स्वास्थ्य केवल रोग के इलाज तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि आप अपने दिल को बुढ़ापे तक जवान रखना चाहते हैं, तो इसके लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा। इसमें नियमित दिनचर्या, संतुलित खानपान, तम्बाकू, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूरी, साथ ही पर्याप्त नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना शामिल है।”
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डॉ. मदान ने यह भी स्पष्ट किया कि हृदय रोग केवल उम्रदराज लोगों को ही नहीं होता, बल्कि आजकल युवाओं में भी इसकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जीवनशैली से जुड़े कारक जैसे तनाव, अनियमित आहार और शारीरिक गतिविधियों की कमी हृदय रोग के लिए प्रमुख कारण बन रहे हैं।
“अचानक हार्ट अटैक” मिथक को दूर किया गया
कार्यक्रम में हृदय रोग विभाग के निदेशक डॉ. समीर कुब्बा ने लोगों में प्रचलित यह भ्रांति दूर की कि दिल का दौरा अचानक ही आता है। उन्होंने बताया कि जो लोग इसे अचानक हार्ट अटैक मानते हैं, वह दरअसल कई वर्षों तक हृदय की अनदेखी का परिणाम होता है। डॉ. कुब्बा ने कहा, “हार्ट अटैक अचानक नहीं आता, यह वर्षों तक अनदेखी की गई जीवनशैली और हृदय स्वास्थ्य की उपेक्षा का परिणाम है। इसलिए समय रहते जागरूक होना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना अत्यंत आवश्यक है।”

हृदय स्वास्थ्य और जीवनशैली: धर्मशीला नारायणा अस्पताल के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
हृदय रोग से बचाव के व्यावहारिक सुझाव
कार्यक्रम में कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ कंसलटेंट डॉ. अमित बाठला ने उपस्थित लोगों को संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा, “कल होने वाले हृदय रोगों के प्रति हमें आज ही सर्तक रहना होगा। इसके लिए तनाव से दूर रहना, नियमित व्यायाम करना और नशे से दूरी बनाए रखना जरूरी है।”
डॉ. बाठला ने यह भी बताया कि छोटे बदलाव जैसे कि जंक फूड की बजाय संतुलित आहार, रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम और नियमित स्वास्थ्य जांच हृदय रोग से बचाव में मदद कर सकते हैं।
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बच्चों में हृदय रोग का बढ़ता खतरा
मौजूदा समय में छोटे बच्चों में हृदय रोग के मामले तेजी से बढ़ते हुए दिख रहे हैं। इस विषय पर बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास गुप्ता ने कहा कि बच्चों में फ़ास्ट और प्रोसेस्ड फ़ूड की बढ़ती आदत, शारीरिक गतिविधियों की कमी और मोबाइल व स्क्रीन पर अधिक समय बिताना हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। डॉ. गुप्ता ने सलाह दी कि बच्चों के लिए संतुलित आहार, समय पर नींद, पर्याप्त खेल और व्यायाम की आदत डालना जरूरी है।
व्यायाम और जीवनशैली पर जोर
कार्डिक वसकुलर सर्जरी के निदेशक एवं प्रमुख डॉ. गौरव महाजन ने भी व्यायाम और जीवनशैली पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एक बड़ा वर्ग व्यायाम को नजरअंदाज कर रहा है, जिससे मोटापा, उच्च रक्तचाप और अन्य हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। अगर हम नियमित व्यायाम और सही खानपान अपनाएं, तो हृदय रोगों को काफी हद तक रोका जा सकता है।”
डॉ. महाजन ने विशेष रूप से युवाओं को चेतावनी दी कि केवल इलाज पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि रोकथाम और जीवनशैली सुधार पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से उम्र बढ़ने के बावजूद हृदय को स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।
कोरोना महामारी और हृदय रोग
कार्यक्रम में कोरोना महामारी के बाद हृदय रोग और हार्ट अटैक के मामलों में हुई बढ़ोतरी पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि कोविड-19 संक्रमण के बाद कई मरीजों में दिल की समस्या उभर कर सामने आई है, इसलिए महामारी के दौरान हृदय स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
डॉ. हेमंत मदान ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में हृदय रोग कम पाए जाते हैं, लेकिन शहरों में तनावपूर्ण जीवनशैली, असंतुलित आहार और प्रदूषण के कारण हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं और हृदय से जुड़ी किसी भी समस्या को गंभीरता से लें।
मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर भी जोर दिया। डॉ. अमित बाठला ने कहा कि तनाव हृदय रोग का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने सुझाव दिया कि योग, ध्यान, पर्याप्त नींद और सकारात्मक सोच हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं।
डॉ. समीर कुब्बा ने कहा कि जीवनशैली में छोटे बदलाव, जैसे तंबाकू और शराब से दूरी, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम, लंबी अवधि में हृदय रोग से बचाव कर सकते हैं।

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हृदय रोग जागरूकता का सामाजिक महत्व
विशेषज्ञों ने कहा कि हृदय रोग जागरूकता केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह सामाजिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। स्वस्थ जीवनशैली और हृदय देखभाल पर ध्यान देने से समाज में बीमारी के बोझ को कम किया जा सकता है और स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक दबाव को भी घटाया जा सकता है।
डॉ. विकास गुप्ता ने बताया कि बच्चों में हृदय रोग की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए स्कूलों और परिवारों में जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि खेल और व्यायाम को प्रोत्साहित करना, स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराना और स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना बच्चों के हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अंतिम संदेश
कार्यक्रम के अंत में सभी विशेषज्ञों ने साझा संदेश दिया कि हृदय रोग से बचाव केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए जीवनशैली में सुधार, नियमित स्वास्थ्य जांच, तनाव प्रबंधन और व्यायाम अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे हृदय स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।
डॉ. गौरव महाजन ने कहा कि हृदय रोग केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी होता है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने हृदय के प्रति जागरूक रहना चाहिए और स्वास्थ्य संबंधी सलाह समय-समय पर अपनानी चाहिए।
धर्मशीला नारायणा अस्पताल द्वारा आयोजित यह हृदय स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम न केवल मिथकों को दूर करने में सफल रहा, बल्कि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और जीवनशैली सुधार की प्रेरणा भी दी। विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया कि “अचानक” हार्ट अटैक जैसी भ्रांतियां असत्य हैं और समय रहते जीवनशैली सुधार और नियमित देखभाल हृदय रोग से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

वसुंधरा एन्क्लेव में हृदय स्वास्थ्य कार्यक्रम: फिटनेस, खानपान और तनाव प्रबंधन पर जोर
इस कार्यक्रम ने यह भी संदेश दिया कि स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और परिवार के लिए भी महत्वपूर्ण है। छोटे बदलाव, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन से हृदय स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सकता है।
धर्मशीला नारायणा अस्पताल की यह पहल दिल्लीवासियों और आसपास के क्षेत्रों के लिए हृदय स्वास्थ्य जागरूकता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करती है।