
विज्ञान, डेटा और स्वास्थ्य का संगम” — सर गंगा राम अस्पताल ने दिखाया चिकित्सा का भविष्य
🧠✨ एआई का जीव विज्ञान से मिलन: सर गंगा राम अस्पताल ने मल्टी-ओमिक्स डेटा एकीकरण पर राष्ट्रीय वैज्ञानिक कार्यक्रम के माध्यम से जैव चिकित्सा नवाचार को दी नई दिशा
नई दिल्ली: विज्ञान और चिकित्सा की दुनिया में एक ऐतिहासिक क्षण तब दर्ज हुआ जब सर गंगा राम अस्पताल (एसजीआरएच), नई दिल्ली के जैव प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान विभाग ने 15 से 17 अक्टूबर 2025 तक “मल्टी-ओमिक्स डेटा एकीकरण और विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग” विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय वैज्ञानिक कार्यक्रम का आयोजन किया।
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इस कार्यक्रम ने देश-विदेश के वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर एक ऐसे क्षेत्र पर केंद्रित किया जो आने वाले दशक में चिकित्सा विज्ञान की दिशा बदलने वाला है — कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मल्टी-ओमिक्स बायोलॉजी का संगम।
🎓 भव्य उद्घाटन — विज्ञान और चिकित्सा के संगम का प्रतीक
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान और पारंपरिक दीप प्रज्वलन व सरस्वती वंदना के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि और एएनआरएफ (Anusandhan National Research Foundation) के सीईओ डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
न्यासी बोर्ड के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. डी. एस. राणा और प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अजय स्वरूप ने अतिथियों का स्वागत किया। अपने स्वागत भाषण में संयोजक डॉ. रश्मि राणा ने इस सम्मेलन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि —
“जीनोमिक्स, प्रोटिओमिक्स और मेटाबोलोमिक्स के साथ एआई का एकीकरण न केवल शोध में तेजी लाएगा, बल्कि रोग की समझ और व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine) में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा।”

भारत को जैव-नवाचार में अग्रणी बनाने की दिशा में बड़ा कदम — दिल्ली में हुआ ऐतिहासिक वैज्ञानिक सम्मेलन
🏅 वैज्ञानिक नेतृत्व और नीतिगत दृष्टि
सम्मान समारोह के दौरान विभाग के संरक्षक और अध्यक्ष पद्म भूषण प्रो. (डॉ.) एन. के. गांगुली ने नैदानिक अनुसंधान और कम्प्यूटेशनल विज्ञान के बीच सहयोग को “आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान की आत्मा” बताया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब क्लिनिकल डेटा, जीनोमिक प्रोफाइलिंग, और AI आधारित विश्लेषण मिलकर बीमारियों के मूल में झांकेंगे, न कि सिर्फ़ लक्षणों तक सीमित रहेंगे।
डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन ने एएनआरएफ के दृष्टिकोण को साझा करते हुए बताया कि भारत में AI-संचालित अनुसंधान और नवाचार को मज़बूत करने के लिए एक संगठित रोडमैप तैयार किया गया है, जिससे देश को जैव-नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाया जा सके।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस पहल को सराहते हुए कहा —
“यह कार्यक्रम केवल एक वैज्ञानिक सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत को जैव-नवाचार में विश्व नेता बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।”
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🧬 मल्टी-ओमिक्स और एआई — अगली पीढ़ी की चिकित्सा की कुंजी
कार्यक्रम के दौरान 20 से अधिक शीर्ष वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। इनमें एम्स, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मद्रास, जेएनयू, टीएचएसटीआई, आईजीआईबी और कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट (स्वीडन) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ-साथ Thermo Fisher Scientific और Olink जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल थे।
तीन दिनों में चर्चा के मुख्य विषयों में शामिल रहे:
- 🧠 एआई-संचालित जीनोमिक्स — जीन डेटा के जटिल पैटर्न को पहचानकर रोगों की सटीक भविष्यवाणी
- 🧪 मेटाबोलोमिक्स और प्रोटिओमिक्स — सेलुलर स्तर पर मेटाबोलिक पाथवे की मैपिंग और रोग तंत्र की समझ
- 🌐 नेटवर्क बायोलॉजी — जैविक प्रणालियों को नेटवर्क के रूप में मॉडल कर एआई से उनका विश्लेषण
- 💊 कम्प्यूटेशनल ड्रग डिस्कवरी — नई दवाओं की खोज में समय और लागत में भारी कमी
📅 दूसरा और तीसरा दिन — गहराई और व्यावहारिक दृष्टिकोण
कार्यक्रम के दूसरे दिन में मुख्य फोकस मेटाबॉलिक मॉडलिंग और नेटवर्क बायोलॉजी पर रहा। विभिन्न सत्रों में यह बताया गया कि कैसे एआई मॉडल्स मानव शरीर में जटिल मेटाबोलिक नेटवर्क को समझने में मदद कर रहे हैं और कैसे इनसे कैंसर, डायबिटीज़ और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स जैसी बीमारियों के लिए नई चिकित्सकीय रणनीतियाँ बन सकती हैं।

ट्रांसलेशनल मेडिसिन को नई गति — दिल्ली में मल्टी-ओमिक्स और एआई पर राष्ट्रीय कार्यक्रम सम्पन्न
तीसरे दिन का केंद्रबिंदु रहा — रोग पहचान और डिजिटल पैथोलॉजी में एआई का उपयोग।
प्रमुख वक्ताओं में शामिल रहे:
- 🩺 डॉ. गीता मंजूनाथ (निरामई) — ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान में एआई की भूमिका
- 🧠 डॉ. संजीव श्रीवास्तव (आईआईटी बॉम्बे) — न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के लिए डीप लर्निंग आधारित एनालिटिक्स
- 🔬 डॉ. राजेश पांडे (सीएसआईआर-आईजीआईबी) — भारतीय संदर्भ में बायोबैंक्स और AI इंटीग्रेशन की रणनीति
🧰 प्रशिक्षण, संवाद और सहयोग — कार्यक्रम की विशेषताएँ
यह सम्मेलन केवल व्याख्यानों तक सीमित नहीं रहा। इसमें शामिल थे:
- 🧪 हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग वर्कशॉप्स — जहां युवा शोधकर्ताओं को AI टूल्स और मल्टी-ओमिक्स एनालिटिक्स सॉफ्टवेयर पर प्रशिक्षण दिया गया
- 🗣 इंटरैक्टिव डिस्कशन सत्र — जिसमें प्रतिभागियों और विशेषज्ञों के बीच गहन वैज्ञानिक संवाद हुआ
- 🤝 नेटवर्किंग डिनर — इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस सत्र ने विभिन्न संस्थानों के बीच संभावित सहयोग के द्वार खोले
🌍 भारत को वैश्विक जैव-नवाचार केंद्र बनाने की दिशा में
कार्यक्रम का समापन एक विशेष सत्र के साथ हुआ, जिसमें सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया गया और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई। इस मौके पर यह भी घोषणा की गई कि सर गंगा राम अस्पताल आने वाले वर्षों में AI-Biomedical Innovation Hub स्थापित करेगा, जो देश में मल्टी-ओमिक्स और AI के एकीकृत अनुसंधान के लिए केंद्र बिंदु बनेगा।

जीनोमिक्स से डिजिटल पैथोलॉजी तक — सर गंगा राम अस्पताल में एआई और मल्टी-ओमिक्स पर मंथन
📝 समापन — चिकित्सा में एक नए युग की शुरुआत
यह तीन दिवसीय राष्ट्रीय वैज्ञानिक कार्यक्रम केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि एक नए युग की दस्तक थी — जहां विज्ञान, डेटा और तकनीक मिलकर मानव स्वास्थ्य के लिए अभूतपूर्व संभावनाएँ खोल रहे हैं।
सर गंगा राम अस्पताल ने इस पहल के माध्यम से यह साबित किया कि भारत न केवल चिकित्सा नवाचार में तेजी से आगे बढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में एक नेता की भूमिका निभाने को भी तैयार है।
🧠🌿 “जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जीव विज्ञान एक मंच पर आते हैं, तो चिकित्सा का भविष्य केवल बेहतर नहीं — क्रांतिकारी हो जाता है।”