दिल्ली पुलिस की सटीक तकनीकी जांच से गिरे साइबर ठगों के नकाब

9 दिन में 1800 KM की छापेमारी, साइबर फ्रॉड गैंग पर दिल्ली पुलिस की करारी चोट 🌐 दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध

दिल्ली पुलिस

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9 दिन में 1800 KM की छापेमारी, साइबर फ्रॉड गैंग पर दिल्ली पुलिस की करारी चोट

🌐 दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़


दिल्ली पुलिस के उत्तरी जिले की साइबर पुलिस स्टेशन की टीम ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। यह मामला तब सामने आया जब एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को 22 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया। पुलिस ने तकनीकी जांच और लगातार 09 दिनों तक चले अभियान के बाद इस गिरोह के 7 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में 1800 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हुए छापेमारी की गई।

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💻 ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर बड़ा खेल

शिकायतकर्ता मुकेश कुमार, निवासी बुराड़ी, दिल्ली ने साइबर क्राइम की राष्ट्रीय शिकायत पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज करवाई थी कि उनके साथ अप्रैल 2025 में 22,06,600 रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई है। मुकेश ने बताया कि उन्हें फेसबुक पर “Upstox” नाम और लोगो के साथ एक विज्ञापन दिखा, जिसमें “Start Trading” का बटन था। उस पर क्लिक करते ही उन्हें एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ दिया गया, जो खुद को “Upstox Securities Private Limited” बताता था।

ग्रुप के एडमिन ने खुद को कंपनी का डायरेक्टर ‘कपिल जैकल्याणी’ बताया और कहा कि कंपनी SEBI में रजिस्टर्ड है। प्रारंभिक जांच के बाद मुकेश ने रजिस्ट्रेशन कराया और एक कन्फर्मेशन ईमेल भी मिला। उन्हें “UP Success Express” नाम के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया, जहाँ रोजाना फर्जी प्रॉफिट के स्क्रीनशॉट और डिपॉज़िट के सबूत डाले जाते थे ताकि निवेशकों को भरोसा हो।

24 अप्रैल 2025 को ग्रुप एडमिन ‘दिव्यांगना थोरा’ ने एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने का लिंक भेजा। ऐप में नेटवर्क एरर आने पर उन्हें दूसरी वेबसाइट पर रीडायरेक्ट किया गया। शुरुआती निवेश पर कुछ लाभ दिखाया गया, जिससे वह और अधिक निवेश करने को प्रेरित हुए। धीरे-धीरे उन्होंने कुल ₹22,06,600/- निवेश कर दिए। लेकिन जब उन्होंने पैसे निकालने की कोशिश की तो “In Progress” का स्टेटस दिखता रहा। कुछ समय बाद उनका संपर्क काट दिया गया और उन्हें ग्रुप से ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद मुकेश ने FIR नंबर 51/25 दिनांक 09.06.2025, साइबर पुलिस स्टेशन नॉर्थ में दर्ज कराई।

👮‍♂️ पुलिस टीम और ऑपरेशन

ACP (ऑपरेशन्स सेल) नॉर्थ ज़िला, सुश्री विदुषी कौशिक के मार्गदर्शन में SHO इंस्पेक्टर रोहित गहलोत और SI अरविंद यादव के नेतृत्व में HC हिमांशु, Ct. रवि और HC भारत (CDR सेक्शन) की एक विशेष टीम बनाई गई।

टीम ने तकनीकी जांच में व्हाट्सऐप, गूगल, IP लॉग्स, ईमेल आईडी और सैकड़ों मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। मनी ट्रेल को फॉलो करते हुए विभिन्न बैंक खातों की जांच की गई। पता चला कि व्हाट्सऐप अकाउंट मलेशिया से ऑपरेट किए जा रहे थे। Flipkart, Swiggy, Zomato, Bluedart, Delhivery जैसे प्लेटफॉर्म से जानकारी ली गई और लगातार निगरानी कर आरोपियों की लोकेशन ट्रैक की गई।

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🧠 पहली गिरफ्तारी की कड़ी – दिल्ली, गुरुग्राम और गाज़ियाबाद

6 अक्टूबर 2025 को गुरुग्राम, गाज़ियाबाद और दिल्ली में एक साथ छापेमारी कर पहले आरोपी अतुल कुमार (31 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर प्रशांत सिंह (31 वर्ष) और भावेश कुमार खान (50 वर्ष) को भी गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने “Mostly Social Technology Pvt. Ltd.” नाम की एक फर्जी कंपनी बनाकर करंट अकाउंट खोले और इन्हें 3% कमीशन पर आगे सप्लाई किया।

🕵️‍♂️ दूसरी गिरफ्तारी की कड़ी – झुंझुनूं, राजस्थान

9 अक्टूबर 2025 को झुंझुनूं जिले के सुल्ताना क्षेत्र में छापेमारी कर सुमित झाझरिया (27 वर्ष) को पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर योगेश कुमार (24 वर्ष) को भी गिरफ्तार किया गया। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने बैंक अकाउंट अपने दुबई में रहने वाले रिश्तेदार राहुल को 10% कमीशन पर बेचे थे। सारे लेन-देन स्कैनर और ऑनलाइन माध्यम से होते थे।

🚨 तीसरी गिरफ्तारी की कड़ी – साङ्गानेर, अलवर से दिल्ली तक पीछा

14 अक्टूबर 2025 को साङ्गानेर, जयपुर में छापा मारकर गौरव (27 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने विवेक कुमार सत्तावन (25 वर्ष) का नाम बताया। विवेक को अलवर से दिल्ली तक पीछा कर गिरफ्तार किया गया। इन दोनों ने बताया कि उन्होंने अपने बैंक अकाउंट 2-3% कमीशन पर “सद्दाम” (मेवात निवासी) को बेचे थे। ठगी की रकम बाद में ऑनलाइन गेमिंग अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दी जाती थी।

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📑 पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे

पहली चेन

  • अतुल कुमार और प्रशांत सिंह ने फर्जी कंपनी बनाकर बैंक खाते खोले।
  • भावेश खान को नेट बैंकिंग आईडी, पासवर्ड, कॉर्पोरेट आईडी व सिम कार्ड दिए।
  • बदले में 3% कमीशन और ₹60,000 प्राप्त किए।
  • आगे उन्होंने खाते “अमन” को 5% कमीशन पर बेचे।
  • ठगी की रकम ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर होती थी।

दूसरी चेन

  • सुमित ने खाते योगेश को 8% पर बेचे।
  • योगेश ने दुबई निवासी राहुल को 10% पर खाते बेचे।
  • पैसे स्कैनर और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से ट्रांसफर किए जाते थे।

तीसरी चेन

  • गौरव ने विवेक को 2% कमीशन पर खाते बेचे।
  • विवेक ने मेवात के सद्दाम को 3% पर सप्लाई किए।
  • सभी व्हाट्सऐप और टेलीग्राम चैट समय पर डिलीट कर दिए जाते थे ताकि सबूत मिटाए जा सकें।

📱 तकनीकी और भौतिक सबूतों की बरामदगी

पुलिस ने आरोपियों से कुल:

  • 10 मोबाइल फोन
  • 14 सिम कार्ड
  • 17 डेबिट कार्ड
  • 1 लैपटॉप
  • 3 पैन कार्ड
  • 5 चेक बुक
  • 6 स्टाम्प पासबुक
  • कंपनी से संबंधित दस्तावेज़ और विजिटिंग कार्ड जब्त किए।

सभी उपकरणों का डेटा फॉरेंसिक तरीके से जांचा जा रहा है ताकि और मामलों को जोड़ा जा सके।

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👤 गिरफ्तार आरोपियों की प्रोफाइल

  1. अतुल कुमार (31 वर्ष) – विष्णु गार्डन, दिल्ली
  2. प्रशांत सिंह (31 वर्ष) – फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश
  3. भावेश कुमार खान (50 वर्ष) – पटना, बिहार
  4. सुमित झाझरिया (27 वर्ष) – झुंझुनूं, राजस्थान
  5. योगेश कुमार (24 वर्ष) – झुंझुनूं, राजस्थान
  6. गौरव (27 वर्ष) – जयपुर, राजस्थान
  7. विवेक कुमार सत्तावन (25 वर्ष) – अलवर, राजस्थान

सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और मामले की आगे की जांच जारी है।

🧊 बैंक खातों को फ्रीज़ कर रिकवरी की प्रक्रिया

जांच में सामने आया कि इस गिरोह से जुड़े बैंक खातों से जुड़ी 46 अन्य शिकायतें भी NCRP पोर्टल पर दर्ज हैं। पुलिस ने कई बैंक अकाउंट्स को फ्रीज़ कर दिया है और फिलहाल शिकायतकर्ता की ₹8,58,454/- राशि विभिन्न खातों में होल्ड (लियन) कर दी गई है।

📝 पुलिस का बयान

उत्तरी जिला, दिल्ली के उपायुक्त पुलिस (DCP) राजा बंथिया (IPS) ने कहा,

“दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने पेशेवर तरीके से काम करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस तरह के अपराधों में लोगों को झूठे प्रॉफिट दिखाकर फंसाया जाता है। हम जनता से अपील करते हैं कि किसी भी निवेश से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की वैधता की अच्छी तरह जांच करें और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।”

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📢 चेतावनी और अपील

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से आग्रह किया है कि यदि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन निवेश योजना, व्हाट्सऐप ग्रुप या ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से सामना हो, तो तुरंत NCRP (https://www.cybercrime.gov.in) या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।

इस केस में पुलिस की त्वरित तकनीकी जांच, विभिन्न राज्यों में समन्वित कार्रवाई और 09 दिनों तक चले लगातार ऑपरेशन से यह साफ है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस कितनी गंभीर और सक्षम है।

📌 निष्कर्ष

यह मामला एक उदाहरण है कि कैसे साइबर अपराधी बड़ी कंपनियों के नाम का दुरुपयोग करके लोगों को फंसाते हैं। निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए, किसी भी लिंक या व्हाट्सऐप ग्रुप पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई से न केवल एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, बल्कि भविष्य में इस तरह के अपराधों को रोकने में भी मदद मिलेगी।

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