
दिल्ली साइबर पुलिस ने ठगी के रैकेट के आरोपियों को तकनीकी जांच के आधार पर दबोचा
दिल्ली साइबर पुलिस ने फर्जी डोनेशन और NGO रजिस्ट्रेशन रैकेट का पर्दाफाश किया
राजधानी दिल्ली की साइबर पुलिस ने उत्तर जिले के अंतर्गत एक बड़े फर्जी डोनेशन और NGO रजिस्ट्रेशन रैकेट का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में तीन आरोपियों को उत्तर प्रदेश के आगरा से गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि यह रैकेट गरीब और बुजुर्ग लोगों को लुभाने के बहाने धन हड़पने में सक्रिय था और कई लोगों को इसके झांसे में फंसाया गया।
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मामले का संक्षिप्त विवरण
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता मोहम्मद यूनुस खान, उम्र 76 वर्ष, निवासी आज़ाद मार्केट, बड़ा हिन्दू राव, दिल्ली, जो स्वयं एक समाजसेवी हैं, ने NCRP पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उन्हें एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने गरीब और बुजुर्ग लोगों की मदद के लिए डोनेशन करने का आग्रह किया।
कॉल करने वाले ने शिकायतकर्ता को यह झांसा दिया कि अगर वह उनके बताए गए तरीके से अपनी NGO का पंजीकरण करवा देते हैं, तो उन्हें हर महीने 50,000 रुपये की राशि और अन्य लाभ मिलेंगे। इस धोखाधड़ी में विश्वास करते हुए शिकायतकर्ता ने कुल 16,600 रुपये पंजीकरण और प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद धोखाधड़ी करने वाले व्यक्ति शिकायतकर्ता की कॉल्स और संदेशों का जवाब देना बंद कर दिया।
एफआईआर और पुलिस कार्रवाई
इसके बाद, Cyber Police Station, North District में FIR No. 54/25, दिनांक 08.09.2025, धारा 318(4) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस ने त्वरित और गहन जांच शुरू की।
एसआई संदीप, एचसी विनीत और एचसी धर्मेंद्र की टीम बनाई गई, जिसका संचालन इंस्पेक्टर रोहित गहलोत, SHO/Cyber Police Station North ने किया। इस टीम को ACP ऑपरेशन्स सेल, उत्तर जिले, दिल्ली, सुश्री विदुषी कौशिक द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
पुलिस ने मामले की जांच में वित्तीय लेनदेन और तकनीकी निगरानी का उपयोग करते हुए लाभार्थी बैंक अकाउंट का पता लगाया। इसके बाद आगरा, उत्तर प्रदेश में लक्षित छापेमारी की गई और 11 अक्टूबर 2025 को पहला आरोपी, मनिष बिस्वास, उम्र 19 वर्ष, गिरफ्तार किया गया। मनिष बिस्वास वही बैंक खाता धारक था जिसमें ठगी की गई राशि ट्रांसफर की गई थी।
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पूछताछ और खुलासे
गहन पूछताछ के दौरान, मनिष बिस्वास ने बताया कि उसे दो अन्य व्यक्तियों, अर्थात् मंथन कुमार और प्रिंस @ कालू @ कमलेश, द्वारा संपर्क किया गया था। उन्होंने उसे यह विश्वास दिलाया कि कंपनी फंड्स को पुनर्जीवित करने के लिए उसका बैंक खाता खोलना जरूरी है।
इसके बाद, पुलिस टीम ने मंथन कुमार को भी उसी दिन गिरफ्तार किया। मंथन कुमार आगरा में एक स्थानीय होटल में प्रशिक्षु शेफ के रूप में कार्यरत था। उसने स्वीकार किया कि उसने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी और मनिष के बैंक खाते का विवरण प्रिंस @ कालू @ कमलेश को दिया था, ताकि ठगी की गई राशि ट्रांसफर की जा सके।
पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए प्रिंस @ कालू @ कमलेश को भी उसी दिन गिरफ्तार कर लिया। प्रिंस ने स्वीकार किया कि उसने म्यूल बैंक अकाउंट्स की व्यवस्था की थी और मनिष के बैंक खाते का विवरण गोपू नामक तीसरे व्यक्ति को दिया था, जिसने उसे वित्तीय प्रोत्साहन का वादा किया था।
पुलिस अब मुख्य आरोपी गोपू का पता लगाने और ठगी की गई राशि की रिकवरी के प्रयास कर रही है।
आरोपी व्यक्तियों का प्रोफाइल
- मनिष बिस्वास, उम्र 19 वर्ष, छात्र, निवासी M/C-Block, मित्रा पुरम, कहराई मोढ, शमशाबाद रोड, आगरा, यूपी — लाभार्थी बैंक खाता धारक।
- मंथन कुमार, उम्र 23 वर्ष, प्रशिक्षु शेफ, निवासी राशमी विहार कॉलोनी, शमशाबाद, आगरा, यूपी।
- प्रिंस @ कालू @ कमलेश, उम्र 20 वर्ष, मजदूर, निवासी गांव भरौली अहिर, आगरा, यूपी।
रैकेट का modus operandi
पुलिस के अनुसार, आरोपी व्यक्तियों ने बुजुर्ग और समाजसेवी लोगों को झांसे में लेने के लिए उनके भरोसे का फायदा उठाया। उन्होंने पहले उन्हें सामाजिक कार्यों और गरीब लोगों की मदद के बहाने आकर्षित किया। फिर उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उनकी NGO का पंजीकरण करने पर उन्हें नियमित आय और अन्य लाभ मिलेंगे। इसके बाद उन्होंने धोखाधड़ी के लिए म्यूल अकाउंट्स और तीसरे सहयोगी का सहारा लिया।
पुलिस की रणनीति और तकनीकी निगरानी
इस मामले में पुलिस ने डिजिटल लेनदेन का विश्लेषण किया और तकनीकी निगरानी के जरिए ठगी करने वालों के पीछे की साजिश का पता लगाया। बैंक ट्रांजैक्शन का डेटा, व्हाट्सएप चैट्स और कॉल रिकॉर्ड की जांच की गई। इसी के आधार पर लक्षित छापेमारी और गिरफ्तारी की गई।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की और लगातार जांच जारी रखी। तकनीकी और फॉरेंसिक टीम द्वारा डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि ठगी की पूरी राशि की रिकवरी हो सके और अन्य संभावित अपराधियों का पता लगाया जा सके।
नागरिकों के लिए चेतावनी
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अनचाहे कॉल्स, ईमेल या संदेशों का जवाब न दें, जो आसान पैसा, डोनेशन या NGO पंजीकरण के लाभ का दावा करते हों। किसी भी संदिग्ध लेनदेन या प्रस्ताव से पहले सत्यापन करना आवश्यक है।
सामाजिक और कानूनी पहलू
यह मामला दर्शाता है कि तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों का सही उपयोग कर पुलिस ऐसे साइबर अपराधों का त्वरित पर्दाफाश कर सकती है। बुजुर्ग और समाजसेवी लोग अक्सर भरोसेमंद दिखाई देने वाले अपराधियों के झांसे में आ जाते हैं। इस तरह के मामलों में सतर्कता, जागरूकता और पुलिस के सहयोग से अपराध को रोका जा सकता है।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी गोपू की तलाश जारी है। आरोपी से संबंधित डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य का अध्ययन किया जा रहा है। ठगी की गई राशि की रिकवरी के प्रयास लगातार चल रहे हैं। इसके साथ ही, साइबर पुलिस लगातार ऐसे अपराधों पर नजर बनाए हुए है और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए सतत कार्रवाई कर रही है।

दिल्ली उत्तर जिले में साइबर पुलिस ने बुजुर्गों को लुभाने वाले अपराधियों को किया गिरफ्तार
निष्कर्ष
दिल्ली साइबर पुलिस की यह कार्रवाई न केवल साइबर अपराधियों के खिलाफ एक सशक्त संदेश है, बल्कि समाज के बुजुर्ग और समाजसेवी लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी भी देती है। फर्जी NGO और डोनेशन रैकेट जैसी धोखाधड़ी के मामले में पुलिस की तत्परता और तकनीकी दक्षता प्रशंसनीय है।
साइबर पुलिस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य के सही उपयोग से अपराधियों का पता लगाना और उन्हें न्याय के कटघरे में लाना संभव है। आम जनता से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर विश्वास न करें और किसी भी धोखाधड़ी की सूचना तुरंत साइबर पुलिस को दें।