CM Nayab Singh Saini Praises 150 Years of Arya Samaj; Announces ₹51 Lakh Contribution

Arya Samaj 150-Year Journey Inspires Vision 2075 — Towards a Spiritually Enlightened अंतरराष्ट्रीय आर्य महा सम्मेलन 2025: वैदिक पुनर्जागरण की नई दृष्टि के साथ संपन्न

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Arya Samaj 150-Year Journey Inspires Vision 2075 — Towards a Spiritually Enlightened

अंतरराष्ट्रीय आर्य महा सम्मेलन 2025: वैदिक पुनर्जागरण की नई दृष्टि के साथ संपन्न

नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय Arya Samaj महा सम्मेलन 2025 का समापन अत्यंत ऐतिहासिक और प्रेरणादायक माहौल में हुआ। चार दिवसीय यह वैश्विक सम्मेलन न केवल आर्य समाज की 150 वर्षों की सेवा और सुधार की गाथा को उजागर करता है, बल्कि महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती के अवसर पर भारतीय चेतना, आध्यात्मिकता और सामाजिक नवजागरण के नए युग का उद्घोष भी करता है।

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🔆 ज्ञान ज्योति पर्व के अंतर्गत ऐतिहासिक आयोजन

ज्ञान ज्योति पर्व” के अंतर्गत आयोजित इस सम्मेलन में 30 से अधिक देशों से प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनकी कुल संख्या 2.5 लाख से अधिक रही। आर्य समाज के इतिहास में यह आयोजन अपनी भव्यता, वैश्विक भागीदारी और वैचारिक गंभीरता के लिए एक मील का पत्थर बन गया।

सम्मेलन का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं था, बल्कि आर्य समाज की मूल शिक्षाओं — सत्य, शिक्षा, समानता और सेवा — को आने वाले 50 वर्षों की दिशा में रूपांतरित करना था।

💬 हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का संबोधन

हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपने प्रेरणादायक भाषण में आर्य समाज के योगदान की गहरी सराहना की। उन्होंने कहा —

“आर्य समाज ने न केवल भारत की चेतना को दिशा दी है, बल्कि उसके भविष्य की भी राह दिखाई है। जब समाज अंधविश्वास और असमानता में जकड़ा हुआ था, तब महर्षि दयानंद सरस्वती ने वेदों के ज्ञान को पुनः जागृत कर समाज में सुधार की अलख जगाई।”

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज की पीढ़ी को “विजन 2075” के माध्यम से आने वाले पचास वर्षों के भारत की कल्पना करनी चाहिए — एक ऐसा भारत जो वेदों की मूल भावना पर आधारित हो और वैश्विक समरसता का प्रतीक बने।

उन्होंने आर्य समाज की 150वीं वर्षगांठ पर अपनी श्रद्धांजलि और सहयोग के रूप में 51 लाख रुपये का योगदान दिया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गूंज के साथ स्वागत किया।

🕉️ उत्तर प्रदेश के मंत्री जयवीर सिंह का वक्तव्य

उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने कहा —

“आर्य समाज शिक्षा, सुधार और समानता का अग्रदूत रहा है। महर्षि दयानंद द्वारा पुनर्जीवित गुरुकुल प्रणाली ने देश को मूल्यनिष्ठ नागरिक दिए हैं। भारत का भविष्य अपने वैदिक जड़ों की ओर लौटने में है।”

उन्होंने आर्य समाज द्वारा महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए योगदान को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि आर्य समाज ने भारत के सामाजिक ढांचे को न केवल मजबूत किया है बल्कि इसे वैश्विक विचारधारा से जोड़ा है

🌺 ज्ञान ज्योति पर्व समिति का संदेश

कार्यक्रम के समापन सत्र में “ज्ञान ज्योति पर्व” के अध्यक्ष श्री एस.के. आर्य ने कहा —

“यह सम्मेलन किसी उत्सव का अंत नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है। आर्य समाज का ‘विजन 2050–2075’ वैदिक पुनर्जागरण का आह्वान करता है — जहां सत्य, करुणा और ज्ञान ही वैश्विक समरसता का मार्गदर्शन करेंगे।”

उन्होंने आगे कहा कि पिछले चार दिनों में जो ऊर्जा, संवाद और एकता देखने को मिली, वह सिद्ध करती है कि आर्य समाज का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना 150 वर्ष पूर्व था।📚 कार्यक्रम की प्रमुख झलकियाँ

चार दिनों तक चले इस आयोजन में अनेक सत्र, यज्ञ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और विद्वत् गोष्ठियाँ आयोजित की गईं।
प्रमुख आकर्षण रहे —

  • 11,111 वैदिक यज्ञों का आयोजन — विश्व शांति और कल्याण की भावना के साथ।
  • आर्य प्रगति छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत ₹1.25 करोड़ की छात्रवृत्तियों का वितरण।
  • वैश्विक युवा संवाद — जिसमें भारत सहित अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन से युवाओं ने भाग लिया।
  • महिला सशक्तिकरण सत्र — जिसमें महिला विदुषियों ने ‘वेदों में नारी की भूमिका’ पर प्रेरक विचार रखे।
  • सांस्कृतिक संध्या — वैदिक मंत्रोच्चार, संगीत और नृत्य के माध्यम से “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” के आदर्श को प्रस्तुत किया गया।

🌏 वैश्विक प्रतिनिधियों की भागीदारी

सम्मेलन में कई देशों के आर्य प्रतिनिधियों ने शिरकत की। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मॉरीशस, दक्षिण अफ्रीका और नेपाल से आए प्रतिनिधियों ने अपने देशों में आर्य समाज के कार्यों और प्रभाव को साझा किया।

कार्यक्रम को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, स्वामी ब्रह्मविहारिदास, और योग गुरु स्वामी रामदेव जी के वीडियो संदेशों ने भी संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने आर्य समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा —

“महर्षि दयानंद का विचार ‘सत्य की जय हो’ आज के भारत की आत्मा में गूंजता है। आर्य समाज ने नारी शिक्षा, समानता और राष्ट्रनिर्माण में जो भूमिका निभाई है, वह अमिट है।”

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🏛️ प्रदर्शनी और अनुसंधान पवेलियन

सम्मेलन स्थल पर लगी ‘वैदिक भारत प्रदर्शनी’ ने शिक्षा, सामाजिक सुधार, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में आर्य समाज के योगदान को दर्शाया।

प्रदर्शनी में “वैदिक अनुसंधान केंद्र”, “महिला शिक्षा मिशन”, “जनजातीय उत्थान परियोजना”, और “आर्य साहित्य यात्रा” जैसे विषयों पर इंटरैक्टिव पवेलियन लगाए गए।

ये प्रदर्शनियाँ इस बात का प्रमाण थीं कि आर्य समाज केवल धार्मिक आंदोलन नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है।

🌞 विजन 2075 — भविष्य की दिशा

इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय रहा “विजन 2075: वैदिक मूल्यों से वैश्विक भविष्य की ओर”
इसमें यह प्रस्ताव रखा गया कि आने वाले 50 वर्षों में आर्य समाज शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और अंतरराष्ट्रीय एकता के लिए चार प्रमुख आयामों पर कार्य करेगा —

  1. वैदिक शिक्षा मिशन – हर जिले में वेद केंद्र और गुरुकुल की स्थापना।
  2. सामाजिक उत्थान योजना – नशा-मुक्ति, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता अभियान।
  3. वैश्विक संवाद मंच – भारत और प्रवासी आर्यों को जोड़ने वाला डिजिटल प्लेटफॉर्म।
  4. पर्यावरण एवं गौसंवर्धन मिशन – “धर्म और प्रकृति का संतुलन” के उद्देश्य से।

🕯️ “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” — वैश्विक एकता का संकल्प

सम्मेलन के अंतिम दिन जब हजारों लोगों ने एक स्वर में आर्य समाज का आदर्श वाक्य —
“कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” (आओ, हम विश्व को श्रेष्ठ बनाएं) — दोहराया,
तो पूरा परिसर वैदिक ऊर्जाओं और देशभक्ति के भाव से गूंज उठा।

इस घोषणापत्र के साथ आर्य समाज ने संकल्प लिया कि आने वाले दशक में वह एक ऐसा समाज निर्मित करेगा जो आध्यात्मिक रूप से जागृत, सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण और वैश्विक रूप से समरस होगा।

Arya Samaj’s Global Vision: Truth, Compassion and Knowledge to Guide Humanity

🌿 निष्कर्ष

अंतरराष्ट्रीय आर्य महा सम्मेलन 2025 केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह भारत की वैचारिक चेतना और मानवीय उत्थान का युगांतकारी पर्व सिद्ध हुआ।

चार दिनों तक नई दिल्ली वैदिक विचार, शिक्षा, संस्कृति और विज्ञान की ज्योति से आलोकित रही।
महर्षि दयानंद सरस्वती के आदर्श — सत्य बोलो, सत्य पर चलो — आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने 1875 में थे।

जैसे ही सम्मेलन का समापन हुआ, हजारों लोगों ने मिलकर एक स्वर में कहा —

“यह अंत नहीं, एक नई शुरुआत है — वैदिक युग के पुनर्जागरण की!”

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