
MCD Schools to Get Boost with TLM and Boys Fund Worth ₹9.5 Crore
दो वर्षों से लंबित रखरखाव राशि जारी – स्कूलों में आएगी नई ऊर्जा
बैठक के प्रारंभ में अध्यक्ष श्री योगेश वर्मा ने बताया कि पिछले दो वर्षों से नगर निगम MCD विद्यालयों को वार्षिक रखरखाव (Annual Maintenance) के लिए दी जाने वाली राशि जारी नहीं की गई थी। इस कारण से कई विद्यालयों की स्थिति खराब हो गई थी — कहीं दीवारों में दरारें थीं, कहीं फर्श टूटी हुई थी, तो कहीं बिजली, पानी और शौचालय की स्थिति दयनीय बनी हुई थी।
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श्री वर्मा ने कहा कि अब दो वर्षों के बाद विद्यालयों से उनकी वास्तविक आवश्यकताओं (Actual Demand) का विवरण एकत्र किया गया है। उस आधार पर ₹18 करोड़ 20 लाख की राशि नगर निगम के लगभग 1200 विद्यालयों को जारी की जा रही है।
यह राशि विशेष रूप से माइनर रिपेयर यानी छोटे-छोटे मरम्मत कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी, जैसे — दीवारों की पुताई, छत की मरम्मत, जलनिकासी व्यवस्था, पंखे और बल्ब की मरम्मत, तथा स्कूल फर्नीचर की देखरेख।
श्री वर्मा ने कहा,
“विद्यालयों की बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी होना ही शिक्षा की गुणवत्ता की पहली शर्त है। जब स्कूल साफ, सुंदर और सुरक्षित होंगे, तभी बच्चे पढ़ाई के प्रति उत्साहित होंगे।”
TLM और बॉयज फंड से शिक्षण-सामग्री को मिलेगी मजबूती
बैठक में बताया गया कि विद्यालयों के लिए टीचर लर्निंग मटेरियल (TLM) हेतु ₹3.5 करोड़ तथा बॉयज फंड के रूप में ₹6 करोड़ की राशि जारी की गई है।
यह राशि शिक्षकों को शिक्षण प्रक्रिया को और अधिक सृजनात्मक व प्रभावशाली बनाने में मदद करेगी। TLM के माध्यम से अध्यापक अपने पाठों को दृश्य एवं प्रायोगिक रूप में छात्रों के सामने रख पाएंगे — जैसे चार्ट, मॉडल, फ्लैश कार्ड, लैब सामग्री आदि।
बॉयज फंड का उपयोग मुख्य रूप से स्कूल की सामान्य आवश्यकताओं, खेल-कूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जरूरतों में किया जाएगा।
इसके साथ ही, विद्यालय प्राचार्यों की खर्च सीमा ₹3,000 से बढ़ाकर ₹5,000 कर दी गई है। इससे छोटे-मोटे खर्चों के लिए उन्हें लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा और तत्काल कार्यवाही हो सकेगी।
श्री वर्मा ने कहा कि यह कदम स्कूल स्तर पर विकेंद्रीकरण और प्रशासनिक लचीलापन बढ़ाने की दिशा में अहम है।
विद्यार्थियों को मिली लंबित राशि — पारदर्शिता का संदेश
बैठक में एक महत्वपूर्ण घोषणा यह भी की गई कि जिन विद्यार्थियों के बैंक खातों में ड्रेस, स्टेशनरी और स्कूल बैग के लिए तय की गई ₹1670 प्रति छात्र की राशि तकनीकी कारणों से अटकी हुई थी, वह अब सभी पात्र बच्चों के खातों में भेज दी गई है।
इससे हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों को राहत मिली है।
श्री वर्मा ने कहा,
“हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बच्चे को उसके अधिकार से वंचित न रहना पड़े। चाहे वह यूनिफॉर्म हो, स्टेशनरी हो या बैग – हर बच्चे को बराबर सुविधा मिलनी चाहिए।”

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एक्शन टेकन रिपोर्ट और निरीक्षण प्रणाली पर चर्चा
बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) समिति के समक्ष प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में पिछले महीनों में विद्यालयों में किए गए कार्यों, निरीक्षणों और शिकायत निवारण की स्थिति का विवरण दिया गया।
रिपोर्ट में कई विद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की प्रगति का उल्लेख था, पर साथ ही कुछ क्षेत्रों में सफाई और भोजन की गुणवत्ता को लेकर चिंताएँ भी सामने आईं।
उपाध्यक्ष अमित खड़कड़े ने उठाए महत्वपूर्ण प्रश्न
बैठक के दौरान समिति के उपाध्यक्ष श्री अमित खड़कड़े ने विद्यालयों की वास्तविक समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रह सकती — हमें शिक्षकों की समस्याओं, विद्यार्थियों की उपस्थिति, और शिक्षा की गुणवत्ता (Quality of Education) पर भी समान ध्यान देना होगा।
उन्होंने बताया कि हाल ही में हुए निरीक्षणों के दौरान कई विद्यालयों के मिड-डे मील किचनों में गंभीर अनियमितताएँ पाई गई हैं। कुछ स्थानों पर स्वच्छता की स्थिति बेहद खराब थी, और भोजन की गुणवत्ता भी मानक के अनुरूप नहीं थी।

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मिड-डे मील में सुधार हेतु सख्त निर्देश
इस मुद्दे पर अध्यक्ष श्री योगेश वर्मा ने तत्काल संज्ञान लिया और स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी मिड-डे मील किचन मालिक अपनी रसोई की स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता और कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों की स्थिति में सुधार करें।
उन्होंने कहा कि यदि सुधार नहीं हुआ तो निगम उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा, जिसमें अनुबंध रद्द करना भी शामिल है।
इसके साथ ही समिति ने निर्णय लिया कि आने वाले दिनों में सभी किचनों का एक व्यापक निरीक्षण अभियान (Inspection Drive) चलाया जाएगा।
सभी शिकायतों की प्रतियां समिति के समक्ष प्रस्तुत की जाएंगी ताकि जवाबदेही तय हो सके।
समिति का फोकस – शिक्षा में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता
बैठक का समापन शिक्षा समिति के अध्यक्ष श्री योगेश वर्मा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि निगम का उद्देश्य केवल स्कूल चलाना नहीं, बल्कि शिक्षा को एक जन-आंदोलन के रूप में विकसित करना है।
उन्होंने कहा,
“हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, हर शिक्षक को सम्मान और सहयोग मिले, और हर विद्यालय पारदर्शिता के साथ काम करे। हमारा लक्ष्य है — ‘हर बच्चा पढ़े, बढ़े और आगे बढ़े।’”

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श्री वर्मा ने अधिकारियों से कहा कि सभी निर्णयों की क्रियान्वयन रिपोर्ट नियमित रूप से समिति के समक्ष प्रस्तुत की जाए, ताकि हर स्तर पर जवाबदेही बनी रहे।
बैठक की प्रमुख उपलब्धियाँ और भविष्य की दिशा
- ₹18.20 करोड़ की राशि जारी — विद्यालयों के माइनर रिपेयर के लिए।
- ₹3.5 करोड़ (TLM) और ₹6 करोड़ (बॉयज फंड) स्कूलों को प्रदान।
- प्राचार्य खर्च सीमा ₹3,000 से बढ़ाकर ₹5,000।
- ड्रेस, स्टेशनरी, बैग हेतु ₹1670 की राशि सभी विद्यार्थियों के खातों में भेजी गई।
- मिड-डे मील निरीक्षण अभियान शीघ्र प्रारंभ होगा।
- एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा।
- शिक्षा की गुणवत्ता और जवाबदेही पर विशेष बल।
अंतिम संदेश
बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली नगर निगम शिक्षा के क्षेत्र में केवल ढांचागत सुधार ही नहीं, बल्कि प्रणालीगत सुधार की दिशा में भी गंभीरता से कार्य कर रहा है।
विद्यालयों की मरम्मत से लेकर भोजन की गुणवत्ता तक, और शिक्षकों की भूमिका से लेकर बच्चों की सुविधाओं तक — हर पहलू पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
शिक्षा समिति की यह बैठक एक बार फिर इस तथ्य की पुष्टि करती है कि दिल्ली में नगर निगम शिक्षा को ‘बच्चे के अधिकार’ और ‘शहर के भविष्य’ दोनों के रूप में देख रहा है।
यदि इन निर्णयों का सही ढंग से पालन हुआ, तो निश्चय ही आने वाले वर्षों में MCD स्कूलों की छवि और परिणाम दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।