Govind Dev Ji Maharaj Urges Social Harmony at Delhi Religious Summit

Acharya Lokesh Muni Appeals for Peace and Harmony at Delhi Gathering सनातन संत सम्मेलन 2025 : भारत मंडपम में देशभर के धर्मगुरुओं का आह्वान राष्ट्रीय

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Acharya Lokesh Muni Appeals for Peace and Harmony at Delhi Gathering

सनातन संत सम्मेलन 2025 : भारत मंडपम में देशभर के धर्मगुरुओं का आह्वान

राष्ट्रीय राजधानी Delhi के भारत मंडपम में सनातन संत सम्मेलन 2025 का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रमुख संतों, कथावाचकों, आध्यात्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस सम्मेलन में भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज में एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा करना था।

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यह आयोजन कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि हाल ही में हुए लाल किला क्षेत्र के धमाके जैसी घटनाओं ने सुरक्षा प्रबंधन और सामाजिक सौहार्द दोनों को प्रभावित किया है। सम्मेलन में उपस्थित धर्मगुरुओं ने समाज में बढ़ रही असहिष्णुता, विभाजनकारी प्रवृत्तियों और सांप्रदायिक तनावों पर चिंता व्यक्त की और व्यापक एकता की अपील की।

सम्मेलन का मुख्य केंद्रबिंदु – समाज में एकता और जागरूकता

मीडिया से बातचीत के दौरान परम पूज्य स्वामी श्री गोविंद देव जी महाराज, मुख्य संरक्षक ॐ सनातन न्यास और अध्यक्ष, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास, अयोध्या ने कहा कि वर्तमान समय में समाज में कई स्तरों पर विभाजन देखने को मिल रहा है—चाहे वह जाति आधारित हो, विचारधारा आधारित हो या सामाजिक असमानताओं के कारण। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में बंधने की आवश्यकता है ताकि राष्ट्र की संरचना मजबूत हो सके।

स्वामी गोविंद देव जी महाराज ने कहा कि हिंदू समाज की आंतरिक कमजोरियों को दूर करना सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने संत समाज और धार्मिक संस्थाओं को एकजुट होकर सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया। उनका कहना था कि जब देश विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा हो, तब समाज का एकजुट रहना आवश्यक हो जाता है।

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राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी

स्वामी गोविंद देव जी महाराज ने हाल ही में लाल किला क्षेत्र के पास हुए धमाके की घटना का उल्लेख करते हुए इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि ऐसी घटनाएं समाज को सतर्क रहने की सीख देती हैं। उन्होंने कहा कि आज देश को सुरक्षा के मोर्चे पर अधिक जागरूक रहने की आवश्यकता है, और हर नागरिक को भी इसमें भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि समाज को ऐसी परिस्थितियों में एक-दूसरे को सहयोग करने और सूचनाएं साझा करने की आदत विकसित करनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को देने पर उन्होंने ज़ोर दिया।

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धर्म और शिक्षा पर संतों की राय

सम्मेलन में कई संतों और कथावाचकों ने शिक्षा व्यवस्था, आधुनिक विचारधाराओं और सामाजिक प्रभावों पर भी चर्चा की। विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समाज को जोड़ना, समझ बढ़ाना और शांति को मजबूत करना होना चाहिए।

कुछ संतों ने उन संस्थानों की आलोचना की, जहाँ उनके अनुसार युवाओं में कटुता, वैमनस्य या असामाजिक विचारधाराओं का प्रभाव देखा जाता है। हालांकि, वक्ताओं ने यह भी माना कि शिक्षा संस्थानों को पूरी तरह दोष देना उचित नहीं है, बल्कि समाज और परिवारों को भी सकारात्मक संस्कार देने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

धार्मिक नेताओं ने सुझाव दिया कि शिक्षा संस्थाओं में भारतीय संस्कृति, सहिष्णुता, आपसी सम्मान और राष्ट्रीय मूल्यों के बारे में अधिक जागरूकता बढ़ानी चाहिए, ताकि समाज में किसी भी प्रकार की कटुता या चरमपंथी विचारधाराओं को पनपने से रोका जा सके।

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कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर का संबोधन

इस सम्मेलन में प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हाल में हुई हिंसक घटनाओं को देखकर यह स्पष्ट होता है कि समाज को एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करना होगा। उनका कहना था कि जब समाज संगठित होता है, तो किसी भी प्रकार की नकारात्मक घटनाओं का प्रभाव कम हो जाता है।

उन्होंने भी इस बात पर जोर दिया कि देश की सुरक्षा और समाज की शांति सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों का सतर्क रहना बेहद जरूरी है। किसी भी प्रकार की चरमपंथी सोच या हिंसक विचारधारा से समाज को बचाए रखने के लिए सभी समुदायों को मिलकर काम करना चाहिए

सामाजिक सौहार्द को बढ़ाने की आवश्यकता

सम्मेलन में पूज्य आचार्य डॉ. लोकेश मुनि सहित कई बड़े धर्मगुरुओं ने समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता और उसका सामूहिक चरित्र है, और यह तभी सुरक्षित रह सकता है जब सभी धार्मिक समुदाय एक-दूसरे का सम्मान करें।

आचार्य डॉ. लोकेश मुनि ने कहा कि समाज को न केवल आतंरिक रूप से मजबूत होने की आवश्यकता है, बल्कि यह भी ज़रूरी है कि अलग-अलग विचारधाराओं और संस्कृतियों को जोड़ने के प्रयास किए जाएँ। उन्होंने कहा कि संत समाज की ज़िम्मेदारी है कि वह लोगों को संवाद और संयम का मार्ग दिखाए, जिससे तनाव कम हों और समाज में सकारात्मक ऊर्जा बढ़े।

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संत समाज की अपील – एकजुट और जागरूक समाज बने समाधान

सभी प्रमुख वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि आज का समय समाज को जोड़ने का है, न कि बांटने का। जब देश चुनौतियों का सामना करता है, तब उसका सबसे बड़ा हथियार उसकी एकजुटता और जागरूकता होती है।

सम्मेलन में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि:

  • समाज के युवाओं को सकारात्मक दिशा में प्रेरित किया जाए
  • सांप्रदायिक तनावों को कम करने के लिए संवाद बढ़ाया जाए
  • शिक्षा संस्थानों में भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया जाए
  • धर्मगुरु और समाजसेवी एक साथ मिलकर शांति और एकता पर अभियान चलाएँ
  • हिंसक घटनाओं पर राजनीति करने के बजाय समाधान पर ध्यान दिया जाए

निष्कर्ष

सनातन संत सम्मेलन 2025 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा। इसमें व्यक्त विचारों में भिन्नता जरूर थी, लेकिन सभी का लक्ष्य एक ही रहा—समाज को सुरक्षित, जागरूक और एकजुट बनाना

सम्मेलन के अंत में सभी संतों ने यह संकल्प लिया कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने, उन्हें शिक्षित करने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का काम जारी रखा जाएगा।

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