
“Terrorists Will Be Tracked Down Even from the Depths”: Amit Shah on Delhi Blast
Delhi :उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की 32वीं बैठक : सुरक्षा, सहकारिता, समन्वय और विकास पर व्यापक
Delhi केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज हरियाणा के फरीदाबाद में उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की 32वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और लद्दाख के मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों, वरिष्ठ मंत्रियों तथा संबंधित राज्यों और केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक की शुरुआत दिल्ली में हुए कार बम विस्फोट और जम्मू-कश्मीर के नौगाम पुलिस स्टेशन में हुए धमाके के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देकर की गई। उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगतों के प्रति संवेदना प्रकट की और आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक लड़ाई के अपने संकल्प को दोहराया।
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श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक रणनीति अपनाई है। दिल्ली विस्फोट का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि “दोषियों को पाताल से भी ढूंढ निकालकर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा और उन्हें कठोरतम सजा दिलाई जाएगी।” उन्होंने कहा कि भारत अब आतंकवाद के प्रति शिथिल नीति का देश नहीं है, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और त्वरित कार्रवाई के लिए जाना जाता है।
क्षेत्रीय परिषदें : सहयोग और नीति-समन्वय का प्रभावी माध्यम
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विजन—“सशक्त राज्य ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण करते हैं”—को लागू करने में क्षेत्रीय परिषदें एक महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दशक में परिषदों की भूमिका एक सलाहकारी मंच से आगे बढ़कर अब एक्शन-ओरियंटेड प्लेटफॉर्म के रूप में उभर चुकी है।
उन्होंने यह भी बताया कि 2004 से 2014 के बीच कुल 25 बैठकें हुईं, जबकि 2014 से 2025 के दौरान अब तक 64 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। बैठकों की संख्या में यह दो गुना से अधिक वृद्धि प्रधानमंत्री मोदी के ‘TEAM Bharat’ सिद्धांत को प्रतिबिंबित करती है, जो केंद्र–राज्य सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
अब तक परिषदों में 1600 महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई है, जिनमें से 1303 समस्याओं का समाधान किया जा चुका है। यह 81.43% की सफलता दर दर्शाता है, जो कि केंद्र व राज्यों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का प्रमाण है।

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महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा : सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता
श्री अमित शाह ने महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध, विशेषकर POCSO और बलात्कार के मामलों में त्वरित न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे जघन्य अपराध किसी भी सभ्य समाज में अस्वीकार्य हैं और इन्हें रोकने के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स (FTSC) की संख्या बढ़ाना अनिवार्य है।
उन्होंने राज्यों को सभी संबंधित संस्थाओं—पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक और न्यायालयों में तकनीकी सुधार लागू करने की सलाह दी ताकि मामलों का त्वरित निपटारा हो सके। कुपोषण, स्टंटिंग और बच्चों की उच्च ड्रॉपआउट दर जैसे मुद्दों पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई, क्योंकि ये आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति के मार्ग में गंभीर चुनौतियाँ हैं।
सहकारिता, कृषि और मछली पालन : रोज़गार व गरीबी उन्मूलन के नए आयाम
गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र भारत में गरीबी हटाने और रोजगार बढ़ाने के सबसे प्रभावी मॉडलों में से एक है। उन्होंने बताया कि सहकारिता मंत्रालय ने अब तक 57 महत्वपूर्ण पहलों को शुरू किया है, जिनमें प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का कंप्यूटरीकरण, तीन नई राष्ट्रीय सहकारी समितियों की स्थापना और त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय का निर्माण शामिल है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के “सहकार से समृद्धि” के मंत्र ने सहकारिता क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। सहकारिता, कृषि और मछली पालन क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन हो रहा है।
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नए आपराधिक कानून : दोष सिद्धि दर में 25–40% की वृद्धि
श्री शाह ने नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन का उल्लेख करते हुए बताया कि इनके लागू होने के बाद दोष सिद्धि दर में 25 से 40 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे यह सिद्ध होता है कि नए कानून केवल कागज़ पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दे रहे हैं।
उन्होंने राज्यों को फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने, पुलिस को आधुनिक तकनीक से लैस करने तथा अदालतों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि “एक कुशल और आधुनिक न्याय प्रणाली ही विकसित भारत की आधारशिला बन सकती है।”
मिलेट्स को बढ़ावा : पोषण व कृषि दोनों में लाभ
श्री अमित शाह ने मिलेट्स (मोटे अनाज) को बढ़ावा देने के अभियान में राजस्थान के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने सभी राज्यों से मिलेट्स को सरकारी खाद्यान्न वितरण प्रणाली का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि गरीबों को प्रतिमाह दिए जाने वाले 5 किलो मुफ्त अनाज में मिलेट्स को शामिल किया जाना चाहिए, जिससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि नई पीढ़ी को स्वस्थ आहार की आदत भी पड़ेगी।

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बैठक का विस्तृत एजेंडा : जल, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण
बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें शामिल हैं—
- महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों की त्वरित जांच
- फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों का सुदृढ़ीकरण
- प्रत्येक गांव में बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता
- जल संसाधन प्रबंधन और जल-बंटवारे से जुड़े मुद्दे
- उच्च शिक्षा में सुधार के लिए संयुक्त नीति
- आपातकालीन सहायता प्रणाली ERSS-112
- PACS को मजबूत करना
- पोषण अभियान के माध्यम से कुपोषण कम करना
- स्कूली बच्चों की ड्रॉपआउट दर में कमी
- आयुष्मान भारत–PMJAY में सार्वजनिक अस्पतालों की भागीदारी बढ़ाना
इन सभी विषयों पर सदस्य राज्यों ने अपने अनुभव साझा किए और आपसी समन्वय को मजबूत करने पर सहमति जताई।
सूरजकुंड की सांस्कृतिक–ऐतिहासिक महत्ता
गृह मंत्री ने सूरजकुंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह धरती भारत की प्राचीन सभ्यता का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यही क्षेत्र गुरु तेग बहादुर जी और सिख गुरुओं की पवित्र भूमि से भी जुड़ा है, जिन्होंने देश की आध्यात्मिक चेतना और स्वतंत्रता की रक्षा में महान बलिदान दिए।
श्री शाह ने कहा कि “यदि गुरु तेग बहादुर जी न होते, तो आज भारत अपनी ही सांस्कृतिक जड़ों से दूर हो सकता था।” उन्होंने युवाओं में सांस्कृतिक चेतना और देशभक्ति जगाने के प्रयासों पर बल दिया।
वंदे मातरम के 150 वर्ष : राष्ट्रभक्ति का नया संकल्प
इस वर्ष वंदे मातरम की रचना के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस अवसर का उल्लेख करते हुए श्री शाह ने कहा कि यह गीत कभी आज़ादी का उद्घोष था, और आज इसे विकसित भारत के निर्माण का उद्घोष बनाना होगा। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे स्कूलों, युवाओं और सामाजिक समूहों में वंदे मातरम के माध्यम से देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित करें।

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राष्ट्रीय लक्ष्य : Regional Strength से National Progress तक
बैठक के अंत में गृह मंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य स्पष्ट है—
मजबूत प्रदेशों के साथ मजबूत राष्ट्र, और मजबूत राष्ट्र के साथ वैश्विक नेतृत्व।
उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्रों में राज्यों के बीच समन्वय ही भारत को महान बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।