
Accused Wanted a Son, Kidnapped Infant From Footpath; Delhi Police Busts Plan
Delhi Police की तेज़ कार्रवाई: मात्र 18 घंटे में लापता चार महीने के मासूम को लोनी
Delhi Police ने एक बार फिर अपनी त्वरित कार्रवाई, तकनीकी दक्षता और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए एक चार महीने के मासूम शिशु को अपहरणकर्ताओं से सुरक्षित छुड़ा लिया। यह पूरा मामला न केवल पुलिस की दक्षता का प्रमाण है, बल्कि यह उन गरीब और वंचित परिवारों की पीड़ा को भी उजागर करता है जो दिल्ली के फुटपाथों पर अपना जीवन-यापन करते हैं और हर दिन असुरक्षा की स्थिति में जीते हैं।
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घटना की शुरुआत: एक मां की दहशत, बच्चे का अचानक गायब होना
यह घटना 17 नवंबर 2025 की है जब पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास फुटपाथ पर रहने वाली 27 वर्षीय पीड़िता S. ने अपने चार महीने के बेटे के लापता होने की सूचना पुलिस को दी। पीड़िता अपने पति और चार बच्चों के साथ फुटपाथ पर रहती है। उसका पति जैकेट बेचकर परिवार का पालन-पोषण करता है।
कुछ दिनों से एक महिला, जिसकी पहचान बाद में आरोपी आरती के रूप में हुई, फुटपाथ पर रहती इस गरीब परिवार के पास आती-जाती थी। वह उनके बच्चों के साथ खेलती, बात करती और उन्हें खाने-पीने की चीजें देकर अपनी नज़दीकियां बढ़ाती रहती थी। यह सब परिवार को देखकर सहज महसूस होता रहा और उन्होंने कभी यह अंदेशा नहीं लगाया कि यह महिला किसी खतरनाक इरादे से उनके करीब आ रही है।
लेकिन घटना वाले दिन महिला बच्चों से खेलने बहाने आई और मौका मिलते ही चार महीने के बच्चे को लेकर फरार हो गई। जब काफी देर तक बच्चे का पता नहीं चला, तब पीड़िता ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
दिल्ली पुलिस ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए FIR No. 1059/25, u/s 137(2) BNS थाना कोतवाली में दर्ज की और जांच शुरू की।
पुलिस का त्वरित एक्शन: मिनटों में गठित की स्पेशल टीम
घटनाक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए थाना कोतवाली के SHO इंस्पेक्टर जतन सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम में W/SI एकता, कॉन्स्टेबल पूरन और कॉन्स्टेबल प्रमोद को शामिल किया गया। पूरी कार्रवाई ACP (कोतवाली) श्री शंकर बनर्जी के मार्गदर्शन में संचालित की गई।
इस मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण था। शिशु जितनी देर तक अपहरणकर्ता के पास रहता, खतरा उतना ही बढ़ सकता था — इसलिए हर मिनट कीमती था।
तकनीकी जांच ने पकड़ी अहम कड़ी
शुरुआती जांच में पुलिस को आरोपी महिला आरती का मोबाइल नंबर मिला, लेकिन फोन स्विच्ड ऑफ था। इसके बावजूद पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण (Technical Surveillance) के माध्यम से उसके मोबाइल की लास्ट लोकेशन निकालने में सफलता पाई।
आखिरी लोकेशन लोनी देहात, गाज़ियाबाद (U.P.) में मिली।
यह एक बड़ा संकेत था। टीम ने तुरंत मौके पर जाने की तैयारी की और बिना समय गंवाए दिल्ली से यूपी के लिए रवाना हो गई।
लोनी में दबिश: गुप्त रूप से जुटाई गई स्थानीय जानकारी
लोनी पहुंचकर पुलिस टीम ने सबसे पहले स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई। टीम ने तकनीकी इनपुट को क्रॉस-चेक करने के लिए आसपास के लोगों से पूछताछ की, इलाके की गली-मोहल्लों में चुपचाप सर्च की और संदिग्ध महिला के संभावित ठिकानों का पता लगाने की कोशिश की।
कुछ ही देर में पुलिस को यह पुष्टि मिली कि महिला सच में लोनी में ही मौजूद है।
इसके बाद तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचना की मदद से पुलिस उस घर तक पहुंची जहां आरोपी आरती बच्चे के साथ छिपी हुई थी।

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महिला आरोपी आरती की गिरफ्तारी और बच्चे की सुरक्षित बरामदगी17 नवंबर की शाम, पुलिस टीम ने लोनी देहात क्षेत्र में एक मकान में रेड की और 39 वर्षीय आरती, पत्नी राम प्रसाद, को पकड़ लिया। उसके कब्जे से चार महीने के मासूम L को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
पुलिस टीम का यह प्रयास बेहद साहसिक और मानवीय था, क्योंकि किसी भी तरह की जल्दबाज़ी बच्चे की सुरक्षा पर खतरा बन सकती थी। पूरी कार्रवाई बेहद सावधानी और संवेदनशीलता के साथ की गई।
पूछताछ में हैरान करने वाला खुलासा: बेटे की चाहत ने बना दिया अपराधी
पूछताछ के दौरान आरोपी ने चौंकाने वाला खुलासा किया।
आरती तीन बेटियों की मां है और लंबे समय से एक बेटे की इच्छा रखती थी।
उसका पति पहले पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास एक चाय स्टॉल पर काम करता था, इसलिए वह इलाके से परिचित थी।
कुछ दिनों पहले उसने फुटपाथ पर रहने वाले इस परिवार को देखा और बच्चे की उम्र देखकर उसका मन डोल गया। वह बहाने से रोज़ बच्चों से मिलने लगी और धीरे-धीरे मां को भरोसे में लिया।
आरोपी ने स्वीकार किया कि अवसर देखकर वह बच्चे को चुपचाप उठाकर अपने घर ले गई।
उसने बच्चे को अपना बेटा बनाकर रखने की योजना बनाई थी।
18 घंटे बाद मां को मिला अपना लाल: भावुक दृश्य
बच्चे के मिलते ही पुलिस टीम ने उसे तुरंत दिल्ली वापस लाया और उसकी मां को सौंप दिया।
चार महीने के अपने मासूम को वापस पाकर मां फूट-फूटकर रो पड़ी।
पीड़िता ने दिल्ली पुलिस का हृदय से आभार व्यक्त किया और कहा कि यदि पुलिस इतनी तेजी से कार्रवाई न करती, तो शायद उसका बच्चा कभी वापस नहीं मिलता।
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आरोपी का पूरा प्रोफाइल
- नाम: आरती
- उम्र: 39 वर्ष
- पति: राम प्रसाद
- निवास: मीरा सिटी, लोनी, गाज़ियाबाद, यूपी
- पारिवारिक स्थिति: तीन बेटियां, बेटे की चाहत में तनाव
- नौकरी: IVF सेंटर, दिलशाद गार्डन, दिल्ली में काम
- पति का काम: लोनी में एक फैक्ट्री में मजदूर
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कहीं आरोपी का किसी संगठित गिरोह से संबंध तो नहीं या यह अपराध केवल उसकी व्यक्तिगत इच्छा का परिणाम था।
दिल्ली पुलिस का मानवीय चेहरा: तेज़ रफ्तार, सटीक जांच, तकनीक का सही उपयोग
इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस ने फिर साबित किया है कि संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई, तकनीक और टीमवर्क कैसे बड़े अपराधों को रोक सकते हैं।
महज 18 घंटों में:
- आरोपी की पहचान
- तकनीकी डेटा का विश्लेषण
- लोनी में स्थानीय स्तर पर खुफिया जानकारी
- आरोपी की गिरफ्तारी
- और बच्चे की सुरक्षित बरामदगी
इसे एक उत्कृष्ट पुलिस ऑपरेशन कहा जा सकता है।

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जिला पुलिस उपायुक्त का वक्तव्य
उत्तर जिला के DCP श्री राजा बंथिया (IPS) ने पुलिस टीम के प्रयासों की सराहना की और कहा कि:
- ऐसे मामलों में पुलिस की प्राथमिकता बच्चे की सुरक्षा और शीघ्र बरामदगी होती है।
- पुलिस हर संभव संसाधनों का इस्तेमाल कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
निष्कर्ष: एक माँ की गोद वापस भरी, एक परिवार को मिला सुकून
यह घटना न केवल दिल्ली पुलिस की सतर्कता और तकनीकी क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह समाज को भी आगाह करती है कि अक्सर अपराधी भरोसे का फायदा उठाकर बच्चों को निशाना बनाते हैं।
मासूम का मिलना उस मां के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं जिसने अपनी गोद का उजाला खोने से पहले ही उसे वापस पा लिया।
पुलिस की तेज़ कार्रवाई, सही तकनीकी उपयोग और जमीनी खुफिया जानकारी ने एक बड़ी tragedy को रोक दिया और एक परिवार को फिर से जोड़ दिया।