महेंद्र पार्क क्षेत्र में एनडीपीएल कार्यालय के सामने पेड़ कटने पर विरोध, अनुमति को लेकर उठे सवाल

विरोध के दौरान इलाके में रहने वाले अफ़ग़ानी मूल के लोगों सहित महिलाएं और युवा भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने यह सवाल उठाया कि क्या

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विरोध के दौरान इलाके में रहने वाले अफ़ग़ानी मूल के लोगों सहित महिलाएं और युवा भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने यह सवाल उठाया कि क्या पेड़ काटने के लिए संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति ली गई थी। लोगों का कहना है कि इलाके में पहले से ही हरियाली कम है और ऐसे में पेड़ कटने से पर्यावरण पर असर पड़ता है।

थाना महेंद्र पार्क क्षेत्र में स्थित एनडीपीएल (नॉर्थ दिल्ली पावर लिमिटेड) कार्यालय के सामने एक पुराने और बड़े पेड़ को काटे जाने को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध दर्ज कराया। पेड़ कटने की सूचना मिलते ही आसपास के इलाकों के लोग मौके पर एकत्र हो गए और कार्रवाई पर सवाल उठाए।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पेड़ काटने का काम सुबह के समय शुरू किया गया और इस दौरान किसी प्रकार की पूर्व सूचना या अनुमति से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाए गए। लोगों के अनुसार, पेड़ इलाके के पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण था और इससे आसपास के क्षेत्र को छाया और हरियाली मिलती थी।

विरोध के दौरान इलाके में रहने वाले अफ़ग़ानी मूल के लोगों सहित महिलाएं और युवा भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने यह सवाल उठाया कि क्या पेड़ काटने के लिए संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति ली गई थी। लोगों का कहना है कि इलाके में पहले से ही हरियाली कम है और ऐसे में पेड़ कटने से पर्यावरण पर असर पड़ता है।

स्थानीय लोगों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पेड़ काटने की कार्रवाई BJP निगम पार्षद सुमन शर्मा के दबाव में कराई गई। हालांकि, इस संबंध में निगम पार्षद की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

इस मामले में यह भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या वन विभाग या नगर निगम से आवश्यक अनुमति ली गई थी और क्या पर्यावरण नियमों का पालन किया गया। स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि दिल्ली में बड़े पेड़ों को काटने से पहले नियमानुसार अनुमति आवश्यक होती है।

स्थिति को देखते हुए थाना महेंद्र पार्क पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को शांत कराया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई है और तथ्यों की जांच की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, वे अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाते रहेंगे।

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