
दिल्ली के द्वारका सेक्टर 10 चौकी की पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय वाहन ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने फर्जी आधार कार्ड, फर्जी पहचान और बैंक लोन वाले वाहनों को बेचकर कई लोगों को ठगा। इस गिरोह की वजह से एक पूर्व सैनिक और उसके पिता को न सिर्फ आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, बल्कि उन्हें करीब 70 दिन जेल भी काटनी पड़ी।
द्वारका साउथ थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर संख्या 86 वर्ष 2025 की जांच के दौरान पुलिस ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगलों तक 1200 किलोमीटर से अधिक पीछा कर मुख्य आरोपी हरदीप सिंह रंधावा को गिरफ्तार किया। आरोपी पिछले तीन साल से उत्तर प्रदेश पुलिस को भी वांछित था और हत्या के प्रयास तथा आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामलों में शामिल रहा है।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले वाहन के असली मालिक आसलम खान के नाम पर फर्जी आधार कार्ड तैयार कर वाहन खरीदा और बाद में उसी वाहन को असली मालिक बनकर एक पूर्व सैनिक को बेच दिया। बाद में जब वाहन पर बैंक लोन बकाया निकला तो खरीदार ने शिकायत की और पूर्व सैनिक तथा उसके पिता को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सेक्टर 10 चौकी प्रभारी एसआई रजत मलिक ने दोबारा तकनीकी और मैन्युअल जांच शुरू की। कई राज्यों में लगातार दबिश के बाद 4 जनवरी 2026 को तड़के पीलीभीत में छापेमारी कर आरोपी को दबोचा गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसका साथी सतेंद्र पाल सिंह फर्जी नाम हरप्रीत सिंह बनकर पूरे खेल को अंजाम देता था और आरटीओ व फाइनेंस एजेंटों से मिलीभगत कर लोन वाले वाहनों को बेचता था।
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल एक पूर्व सैनिक को न्याय दिलाया, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय वाहन धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क का भी खुलासा कर दिया।