दिल्ली का सिग्नेचर ब्रिज… राजधानी की पहचान, खूबसूरती और आधुनिक इंजीनियरिंग का प्रतीक। लेकिन इसी खूबसूरती के बीच एक ऐसी सच्चाई छिपी है, जिसने इसे अब सेल्फी प्वॉइंट से सुसाइड प्वॉइंट बना दिया है। ब्रिज पर आए दिन होने वाली घटनाओं ने सुरक्षा इंतज़ामों की पोल खोल दी है। सवाल ये है कि आखिर करोड़ों की लागत से बने इस ब्रिज पर सुरक्षा की मजबूत दीवार क्यों नहीं खड़ी की गई?
दिल्ली के वजीराबाद इलाके में यमुना नदी के ऊपर बना सिग्नेचर ब्रिज, अपनी अनोखी बनावट और 154 मीटर ऊंचे पिलर्स के कारण लोगों को खासा आकर्षित करता है। शाम ढलते ही यहां लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है।किसी के लिए ये सेल्फी प्वॉइंट है… तो किसी के लिए दिल्ली की रातों का खूबसूरत नज़ारा देखने की जगह।लेकिन इसी खूबसूरती के बीच एक कड़वी सच्चाई भी है—बीते महीनों में दर्जनो लोग यहां से छलांग लगाकर अपनी जान गंवा चुके हैं। हर घटना के बाद वही सवाल उठता है… क्या सिग्नेचर ब्रिज पर सुरक्षा इंतज़ामों में कोई बड़ी कमी है? स्थानीय लोग साफ कहते हैं हाँ, कमी है… और बहुत बड़ी है।
न्यूज़ इंडिया के माध्यम से हम आपको बता रहे हैं सिग्नेचर पर आखिर कहां लापरवाही बरती जा रही है ।आपको बता दे सिगनेचर ब्रिज के दोनों तरफ लगी साधारण लोहे की रेलिंग बेहद कम ऊंचाई की है, जिसे कोई भी व्यक्ति आसानी से पार कर सकता है। लोगों का कहना है कि अगर यहां ऊंची, मजबूत और जालीदार आयरन ग्रिल लगाई जाती… तो शायद इतने हादसे नहीं होते। न केवल खुदकुशी की घटनाएं रोकी जा सकती थीं, बल्कि यमुना में गिरने वाले कचरे को भी रोका जा सकता था, जो आज नदी को और ज्यादा प्रदूषित कर रहा है।
स्थानीय लोगों ने कई बार लिखित शिकायत देकर यह मांग उठाई है कि ब्रिज के दोनों तरफ ऐसी जालीदार ग्रिल लगाई जाए, जो लोगों के चढ़ने या फिसलकर नीचे गिरने की संभावना को खत्म कर दे।उनका कहना है—अगर लोहे की ऊंची जालियां होतीं, तो सैकड़ों घरों के चिराग बुझने से बच जाते।फिहलाल सवाल ये है कि आखिर दिल्ली की पहचान बन चुके इस ब्रिज पर सुरक्षा के पक्के इंतज़ाम कब होंगे?क्या प्रशासन तब जागेगा, जब आंकड़े और बढ़ जाएंगे? क्या इन घटनाओं से सबक लेकर सरकार जल्द कोई पुख्ता कदम उठाएगी?
सिग्नेचर ब्रिज पर सुरक्षा की ये खामियां सिर्फ एक व्यवस्थागत गलती नहीं… बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ भी है।अब ज़िम्मेदारी है कि सरकार और एजेंसियां मिलकर ऐसा सिस्टम तैयार करें, जिसमें न कोई हादसा हो… और न ही कोई हताश होकर अपनी जिंदगी खत्म करने यहां आए।