
मध्य ज़िले की साइबर पुलिस ने अखिल भारतीय धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़
69 लाख की ठगी का पर्दाफाश, अहमदाबाद से आरोपी गिरफ्तार, 43.20 लाख नकद, एंडेवर कार और लग्ज़री मोबाइल फ़ोन बरामद
दिल्ली की मध्य ज़िले की साइबर पुलिस ने एक ऐसी संगठित आपराधिक साजिश का पर्दाफाश किया है, जिसने देशभर में कई व्यवसायियों और कंपनियों को अपनी चपेट में ले रखा था। यह मामला दरअसल एक कारोबारी कंपनी से 69 लाख रुपये की धोखाधड़ी का है, जिसमें आरोपी ने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) फंड में निवेश का लालच देकर ऊँचे मुनाफे का झांसा दिया था। लगभग 15 दिनों की सतत और गहन छानबीन के बाद पुलिस ने अहमदाबाद से एक आरोपी को गिरफ्तार किया और उसके कब्ज़े से 43.20 लाख रुपये नकद, एक लग्ज़री एंडेवर कार और दो महंगे मोबाइल फोन बरामद किए। बरामद मोबाइल फोन में सैमसंग गैलेक्सी फोल्ड 4 और एप्पल का आईफोन 14 शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपी ने पूछताछ में कबूल किया कि वह एक संगठित अखिल भारतीय धोखाधड़ी गिरोह का हिस्सा है, जिसके कई अन्य सदस्य अभी फरार हैं। पुलिस अब इस रैकेट के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी है और ठगी गई शेष राशि की वसूली के साथ-साथ पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए आगे की जांच कर रही है।
मामला कैसे सामने आया
8 जुलाई 2025 को दरियागंज स्थित एक कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) ने साइबर पुलिस के पास धोखाधड़ी और जालसाजी की विस्तृत शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि जनवरी 2025 से ही महाराष्ट्र निवासी कुछ व्यक्तियों ने उनकी कंपनी से लगातार संपर्क साधा और खुद को निवेश सलाहकार एवं फंड उपलब्ध कराने वाले बताकर विश्वास में लिया।

Delhi Cyber Crime: ₹69 लाख की नकद ठगी, कारोबारी बने गिरोह का शिकार
इन व्यक्तियों की पहचान आशीष, अपूर्व, विनायक, विजय और तुषार के रूप में हुई। उन्होंने कंपनी से विभिन्न आधिकारिक दस्तावेज़ मांगे, जैसे कि परियोजना रिपोर्ट, वित्तीय विवरण, और क्रॉस्ड चेक। इतना ही नहीं, कई बार ज़ूम कॉल के माध्यम से कंपनी के उच्च अधिकारियों, जिसमें खुद सीईओ और सीओओ शामिल थे, से बातचीत कर उन्हें पूरी तरह विश्वास दिलाया कि कंपनी को भारी-भरकम निवेश राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
रेखा गुप्ता और ऊर्जा मंत्री आशीष ने दिल्ली के सरकारी भवनों में सोलर प्लांट
नए चेहरों का जुड़ना और बढ़ता भरोसा
24 फरवरी 2025 को आरोपी विजय ने कंपनी को तीन और व्यक्तियों से मिलवाया—शोएब उर्फ सुशांत (निवासी: हुबली), सईद (निवासी: कोल्हापुर) और प्रकाश। इन नए चेहरों ने कंपनी को यह समझाया कि निवेश की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक “सेवा शुल्क” तत्काल नकद में चुकाना होगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जैसे ही यह नकद भुगतान किया जाएगा, उसी समय आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से निवेश राशि कंपनी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
शिकायतकर्ता कंपनी के अधिकारियों को यह आश्वासन इतना वास्तविक और विश्वसनीय लगा कि उन्होंने इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया।
69 लाख रुपये की ठगी
25 फरवरी 2025 को सुबह लगभग 11 बजे, आरोपियों ने कंपनी के प्रतिनिधियों को एक और ज़ूम कॉल पर बुलाया। कॉल में उन्होंने पहले दिए गए निर्देशों को दोहराया और कहा कि रकम को नकद में दिल्ली के करोल बाग स्थित गोल्ड प्लाज़ा पहुंचाया जाए।
कंपनी के दो प्रतिनिधि निर्धारित समय पर गोल्ड प्लाज़ा पहुँचे और आरोपियों को 69 लाख रुपये नकद सौंप दिए। इसके एवज में आरोपियों ने तुरंत कंपनी के खाते में RTGS के जरिए निवेश राशि भेजने का वादा किया। लेकिन, जैसा कि अक्सर ऐसी ठगी में होता है, वादा कभी पूरा नहीं हुआ। न तो कंपनी के खाते में पैसा पहुँचा और न ही आरोपियों से दोबारा संपर्क हो पाया।

Delhi Police Crackdown: Nationwide Fraud Racket का भंडाफोड़, अहमदाबाद से गिरफ्तारी
पुलिस में शिकायत और जांच की शुरुआत
जब कंपनी को यह स्पष्ट हो गया कि उनके साथ धोखा हुआ है, तो उन्होंने तुरंत साइबर पुलिस से संपर्क किया। मध्य ज़िले की साइबर पुलिस ने शिकायत दर्ज कर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों द्वारा उपयोग किए गए मोबाइल नंबरों, ईमेल खातों, ज़ूम आईडी और अन्य डिजिटल ट्रेल को खंगालना शुरू किया।
साइबर जांच ने खुलासा किया कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी का मामला नहीं, बल्कि पूरे भारत में फैला हुआ एक संगठित गिरोह है, जो कंपनियों और व्यवसायियों को ऊँचे रिटर्न के झांसे में फँसाकर करोड़ों रुपये ठग चुका है।
अहमदाबाद से आरोपी की गिरफ्तारी
करीब 15 दिनों तक लगातार तकनीकी निगरानी और भौतिक छापेमारी के बाद पुलिस को अहमदाबाद में एक आरोपी का सुराग मिला। छापा मारकर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने पूरे रैकेट का हिस्सा होने की बात कबूल की।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से 43.20 लाख रुपये नकद, एक फोर्ड एंडेवर कार और दो लक्ज़री स्मार्टफोन बरामद किए। बरामद नकद रकम धोखाधड़ी की गई राशि का ही हिस्सा है।
बरामदगी और सबूत
बरामद सामान सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि ठगी की पूरी साजिश के सबूत भी हैं। मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच से आरोपियों के बीच हुई बातचीत, ज़ूम कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन के इलेक्ट्रॉनिक निशान मिलने की संभावना है। पुलिस को उम्मीद है कि इन सबूतों के आधार पर गिरोह के बाकी सदस्यों तक पहुँचना आसान होगा।
GST सुधारों से मिलेगी राहत: अरविंद खन्ना का बयान #breakingnews
आरोपी का कबूलनामा
गिरफ्तार आरोपी ने कबूल किया कि वह एक संगठित आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा है, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय है। इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद योजनाबद्ध थी—
- पहले किसी कंपनी या व्यवसायी से संपर्क करना।
- खुद को निवेशक या फंड प्रदाता के रूप में पेश करना।
- कई बार ऑनलाइन मीटिंग कर भरोसा जीतना।
- दस्तावेज़ों और वित्तीय जानकारी हासिल करना।
- निवेश के नाम पर “सेवा शुल्क” या अग्रिम राशि नकद में लेना।
- भुगतान के बाद गायब हो जाना।
पुलिस की आगे की रणनीति
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को खत्म करने की तैयारी में है। जांच अधिकारी लगातार अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय कर रहे हैं ताकि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की जा सके। साइबर टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि धोखाधड़ी की रकम किन-किन बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर की गई।
इसके अलावा, बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस से यह जानकारी भी हासिल की जा रही है कि इस गिरोह ने और किन-किन राज्यों या कंपनियों को निशाना बनाया है।
कंपनियों और व्यवसायियों के लिए सबक
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर और वित्तीय अपराधी किस तरह पेशेवर अंदाज में लोगों को फँसाने का जाल बुनते हैं। कारोबारी और कंपनियाँ अक्सर बड़े निवेश और तेज़ मुनाफे के लालच में बिना पूरी जांच-पड़ताल किए ऐसे झांसे में आ जाती हैं।
पुलिस ने इस घटना के बाद सभी व्यवसायियों और कंपनियों को चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार के निवेश प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी कानूनी और वित्तीय जांच ज़रूर करें। नकद लेन-देन से हर हाल में बचें और केवल आधिकारिक चैनल के माध्यम से ही भुगतान करें।

Fraud Racket Exposed: सैमसंग फोल्ड 4 और iPhone 14 समेत लग्ज़री सामान जब्त
मध्य ज़िले की साइबर पुलिस की यह कार्रवाई न सिर्फ़ एक बड़ी धोखाधड़ी का पर्दाफाश है, बल्कि आने वाले समय में ऐसे गिरोहों को कड़ा संदेश भी देती है। अहमदाबाद से हुई गिरफ्तारी और भारी मात्रा में नकद एवं संपत्ति की बरामदगी से यह स्पष्ट है कि पुलिस ने सही दिशा में कदम बढ़ाया है।
हालाँकि, यह जांच अभी अधूरी है। फरार आरोपियों की तलाश और शेष राशि की बरामदगी इस केस के सबसे अहम चरण होंगे। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे गिरोह को बेनकाब कर लिया जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि “तेज़ मुनाफे” और “तुरंत निवेश” के वादे अक्सर जालसाजों की चाल होती है। सावधानी और जागरूकता ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।