करोल बाग गफ्फार मार्केट में आग: क्रिस्टल शॉपिंग सेंटर की कई दुकानें जलकर खाक

करोल बाग में आग की घटना: पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम राहत कार्य में जुटी करोल बाग गफ्फार मार्केट के B-2 मार्केट में भीषण

करोल बाग

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करोल बाग में आग की घटना: पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम राहत कार्य में जुटी

करोल बाग गफ्फार मार्केट के B-2 मार्केट में भीषण आग: 8 दमकल गाड़ियाँ मौके पर, शॉर्ट सर्किट से लगी आग का संदेह

दिल्ली के व्यस्ततम इलाकों में से एक करोल बाग गफ्फार मार्केट के पास स्थित B-2 मार्केट में आज सुबह अचानक आग लग गई। आग लगने की यह घटना नीलकंठ की बेसमेंट क्रिस्टल शॉपिंग सेंटर की कई दुकानों में करीब सुबह 11:15 बजे सामने आई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और धुआँ पूरे शॉपिंग सेंटर में फैल गया।

सूचना मिलते ही दमकल विभाग को कॉल किया गया और तुरंत ही 8 फायर टेंडर (दमकल की गाड़ियाँ) मौके पर पहुँचीं। फायर ब्रिगेड के जवानों ने आग पर काबू पाने के लिए पूरी ताक़त झोंक दी। साथ ही दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुँच गए और राहत व बचाव कार्य में जुट गए।

फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है, लेकिन राहत की बात यह है कि अब तक किसी भी तरह की हताहत या कैजुअल्टी की सूचना नहीं मिली है। आग लगने का प्रारंभिक कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है।

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आग लगने का सिलसिला: मिनटों में फैला धुआँ

गवाहों के अनुसार, सुबह करीब 11:15 बजे अचानक बेसमेंट से धुआँ उठने लगा। शुरुआती पलों में व्यापारियों ने सोचा कि कोई छोटी समस्या होगी, लेकिन कुछ ही मिनटों में धुआँ गाढ़ा होता गया और दुकानों से लपटें निकलने लगीं।

लोगों ने तुरंत दमकल विभाग को सूचना दी और आसपास की दुकानों को खाली कराया गया। इस दौरान बाजार में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर बाहर निकलना ही बेहतर समझा।

मौके की स्थिति: दमकल विभाग की जद्दोजहद

दमकल विभाग की 8 गाड़ियाँ आग बुझाने में जुटी हुई हैं। बाजार के तंग रास्ते और बेसमेंट में आग लगने के कारण आग बुझाने में कठिनाई हो रही है।

दमकल कर्मियों ने पाइपों के जरिए पानी और फोम का छिड़काव किया, ताकि आग को फैलने से रोका जा सके। पुलिस ने तुरंत आसपास के इलाके को घेर लिया और किसी को भी घटनास्थल के पास जाने की अनुमति नहीं दी।

फायर ब्रिगेड अधिकारियों का कहना है कि आग बेसमेंट से शुरू हुई और फिर ऊपर की दुकानों तक फैलने लगी। बेसमेंट में इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल एक्सेसरीज़ की कई दुकानें होने के कारण आग तेजी से फैल गई।

पुलिस और प्रशासन का रुख

दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुँचे। पुलिस ने बताया कि फिलहाल किसी भी व्यक्ति की जान को कोई खतरा नहीं है और बाजार को खाली करा लिया गया है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा,
“आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश की जा रही है। राहत की बात यह है कि कोई जनहानि नहीं हुई है। शुरुआती जाँच में शॉर्ट सर्किट को कारण माना जा रहा है।”

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व्यापारियों की प्रतिक्रिया

मार्केट में मौजूद व्यापारियों ने इस हादसे पर चिंता व्यक्त की।

  • राकेश कुमार, मार्केट प्रेसिडेंट (खाली जैकेट में बाइट):
    उन्होंने कहा,
    “हम कई बार अधिकारियों को कह चुके हैं कि मार्केट में फायर सेफ्टी सिस्टम दुरुस्त किया जाए। बेसमेंट में आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। लेकिन हमारी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया। आज की घटना इसी लापरवाही का नतीजा है।”
  • रजपाल सिंह, व्यापारी (काली पगड़ी में बाइट):
    उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा,
    “हम मेहनत करके कारोबार करते हैं। अगर आग से दुकानें जल गईं तो करोड़ों का नुकसान होगा। सरकार और निगम को चाहिए कि ऐसी जगहों पर नियमित निरीक्षण हो और सुरक्षा इंतज़ाम पुख्ता किए जाएँ।”

शॉर्ट सर्किट: सबसे बड़ा खतरा

दिल्ली जैसे घनी आबादी और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आग लगने की घटनाओं का सबसे बड़ा कारण शॉर्ट सर्किट ही पाया जाता है।

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पुराने इलेक्ट्रिक वायरिंग सिस्टम

ओवरलोडेड बिजली कनेक्शन बेसमेंट और दुकानों में अव्यवस्थित बिजली का प्रयोगये सभी कारण आग को जन्म देते हैं। गफ्फार मार्केट और करोल बाग के क्षेत्र में ज्यादातर इमारतें पुरानी हैं, जिनमें बिजली की वायरिंग वर्षों से बदली नहीं गई। यही वजह है कि छोटे से स्पार्क से भी बड़ी आग लग सकती है।

दिल्ली में आग लगने की घटनाएँ: एक काला इतिहास

दिल्ली में आग लगने की घटनाएँ नई नहीं हैं। करोल बाग क्षेत्र में पहले भी कई बार आगजनी हो चुकी है।

  • फरवरी 2019 में करोल बाग के अर्पित होटल में भीषण आग लगी थी, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी।
  • 2022 में मुंडका इलाके की फैक्ट्री में लगी आग में 27 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
  • चांदनी चौक, सदर बाजार और गफ्फार मार्केट जैसे पुराने बाजार अक्सर ऐसी घटनाओं के केंद्र रहे हैं।

हर बार हादसे के बाद जांच और वादे होते हैं, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति जस की तस हो जाती है।

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फायर सेफ्टी सिस्टम की कमी

नीलकंठ क्रिस्टल शॉपिंग सेंटर जैसी बड़ी इमारत में भी फायर सेफ्टी सिस्टम नाकाफी बताया जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि इमारत में फायर अलार्म या स्प्रिंकलर सिस्टम काम नहीं कर रहा था।

यदि समय पर अलार्म बज जाता तो आग पर जल्दी काबू पाया जा सकता था। लेकिन सुरक्षा उपायों की कमी के कारण आग फैलने का मौका मिल गया।

नुकसान का अनुमान

हालांकि अभी तक आग पूरी तरह बुझाई नहीं गई है, लेकिन शुरुआती अनुमान के मुताबिक लाखों से करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है। बेसमेंट और दुकानों में मोबाइल एक्सेसरीज़, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और गिफ्ट आइटम्स का बड़ा स्टॉक रखा हुआ था।

प्रशासन के लिए सबक

यह घटना प्रशासन के लिए एक बार फिर चेतावनी है कि भीड़भाड़ वाले बाजारों में फायर सेफ्टी सिस्टम मजबूत किए बिना इस तरह की घटनाओं को रोका नहीं जा सकता।

हर मार्केट का नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट होना चाहिए।

पुराने बाजारों में बिजली की वायरिंग बदलवाना जरूरी है।

बेसमेंट में ज्वलनशील वस्तुएं रखने पर रोक लगनी चाहिए।

फायर ब्रिगेड को मार्केट्स के नक्शे और संरचना की जानकारी पहले से होनी चाहिए ताकि आपातकाल में तेजी से काम किया जा सके।

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नागरिकों की सुरक्षा: ज़िम्मेदारी किसकी?

आग की घटनाओं से साफ है कि प्रशासनिक लापरवाही और नागरिकों की असावधानी दोनों मिलकर खतरनाक हालात पैदा करते हैं।

  • नागरिकों को भी चाहिए कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें।
  • बिजली कनेक्शन में ओवरलोडिंग से बचें।
  • दुकानों और इमारतों में अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguishers) अनिवार्य रूप से रखें।

करोल बाग गफ्फार मार्केट के पास B-2 मार्केट में लगी आग ने एक बार फिर दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन व्यापारियों का भारी नुकसान होना तय है।

राकेश कुमार और रजपाल सिंह जैसे व्यापारियों की नाराज़गी यह दिखाती है कि प्रशासन अगर पहले से सतर्क रहता तो इस हादसे को रोका जा सकता था।

यह घटना हमें यह भी सिखाती है कि शॉर्ट सर्किट केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि लापरवाही की देन है। अगर समय रहते बिजली व्यवस्था और फायर सेफ्टी सिस्टम को सुधारा जाए, तो भविष्य में ऐसे हादसों को टाला जा सकता है।

दिल्ली जैसे महानगर में जहाँ हर दिन लाखों लोग बाजारों में आते हैं, वहां सुरक्षा को नज़रअंदाज़ करना सीधा खतरे को न्योता देना है।

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