Delhi Police Bust Stock Market Fraud Gang; Two Arrested After 800 km Chase

Cyber Fraudsters Running Fake Investment Scheme Arrested by Delhi Police Delhi Cyber Police Busts Massive Stock Market Investment Fraud Delhi Police की साइबर टीम ने

Delhi Police

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Cyber Fraudsters Running Fake Investment Scheme Arrested by Delhi Police

Delhi Cyber Police Busts Massive Stock Market Investment Fraud

Delhi Police की साइबर टीम ने एक बड़े साइबर फ्रॉड गैंग का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो स्टॉक मार्केट में हाई रिटर्न का झांसा देकर भोले-भाले लोगों से लाखों रुपये की ठगी कर रहे थे। यह कार्रवाई तीन दिनों तक चली और लगभग 800 किलोमीटर का सफर तय करते हुए पुलिस टीम ने हरियाणा के रोहतक और हिसार जिलों में आरोपियों को धर-दबोचने के लिए लगातार प्रयास किया।

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इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने ₹29,110 की ठगी की हुई राशि खातों में होल्ड करवाई और मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड, सिम कार्ड और चेकबुक समेत कई महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए हैं। साथ ही यह भी सामने आया है कि इस गैंग द्वारा इसी तरह के 16 और साइबर फ्रॉड की शिकायतें NCRP पोर्टल पर दर्ज थीं, जो इस बात का संकेत है कि यह गिरोह काफी लंबे समय से सक्रिय था और बड़े पैमाने पर लोगों को निशाना बना रहा था।

शिकायत की शुरुआत — एक व्हाट्सऐप ग्रुप से शुरू हुआ ठगी का खेल

शिकायतकर्ता केवल कुमार, जो दिल्ली के बुराड़ी इलाके में रहते हैं और एक प्राइवेट कॉलेज में अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत हैं, ने बताया कि वह व्हाट्सऐप पर एक ग्रुप “United India Alliance 7801” में जोड़े गए थे। उन्हें यह ग्रुप एक महिला मिताली चोपड़ा के द्वारा जोड़ा गया, जिसने खुद को Union Mutual Fund की असिस्टेंट बताया।

ग्रुप में कई लोग अपने ट्रेडिंग प्रॉफिट के स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे थे, जो सभी फर्जी निकले। इन नकली प्रॉफिट्स को देखकर केवल कुमार को इस ग्रुप की गतिविधियों पर भरोसा हो गया।

इसके बाद मिताली चोपड़ा ने उन्हें United Home Pro नामक एक ऐप इंस्टॉल करने को कहा, जिसके जरिए वह स्टॉक मार्केट में निवेश कर सकते थे।

धीरे-धीरे उन पर विश्वास जम जाने के बाद शिकायतकर्ता ने चार अलग-अलग ट्रांजैक्शनों में ₹3,31,000 की राशि इस फर्जी ऐप में जमा कर दी —

  • ₹10,000
  • ₹70,000
  • ₹52,000
  • ₹1,99,000

जब उन्होंने अपने “आभासी लाभ” को निकालने का प्रयास किया तो अचानक ऐप काम करना बंद हो गया और उन्हें महसूस हुआ कि वह एक बड़े साइबर फ्रॉड के शिकार हो चुके हैं।

यही मामला आगे चलकर FIR No. 136/25 (30.09.2025) के तहत दर्ज किया गया और साइबर नॉर्थ पुलिस स्टेशन ने जांच की जिम्मेदारी संभाली।

स्पेशल टीम गठित — तकनीकी विश्लेषण से लेकर फील्ड ऑपरेशन तक कठिन जांच

इस हाई-टेक साइबर क्राइम को सुलझाने के लिए पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया।
इस टीम का नेतृत्व SI अरविंद यादव कर रहे थे, और टीम में HC हिमांशु, Ct सुमित और HC भरत भी शामिल थे।

यह टीम इंस्पेक्टर रोहित गहलोत, SHO साइबर पुलिस स्टेशन के निर्देशन में और ACP विदुषी कौशिक के मार्गदर्शन में काम कर रही थी।

जांच का तकनीकी पक्ष:

  • गूगल लेयर्स से डेटा
  • IP लॉग
  • मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की ट्रेसिंग
  • लगभग 100 मोबाइल नंबरों और उनके IMEI का विश्लेषण
  • कई बैंक खातों के बीच जटिल मनी-ट्रेल का निरीक्षण

पुलिस के सामने यह मामला आसान नहीं था, क्योंकि अपराधियों ने कई बैंक खातों, थर्ड-पार्टी एप्स और अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया था। लेकिन लगातार ट्रैकिंग और डिजिटल फोरेंसिक के जरिए पुलिस उन तक पहुंचने में सफल रही।

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800 किलोमीटर का ऑपरेशन — रोहतक और हिसार में दबिश

सभी तकनीकी इनपुट्स की जांच करने के बाद पुलिस ने संदिग्धों की लोकेशन हरियाणा के मेहम, रोहतक क्षेत्र में होने की पुष्टि की।

इसके बाद पुलिस टीम ने तीन दिनों तक लगातार हरियाणा में तलाशी अभियान चलाया।

अंततः पुलिस ने:

  • नेरज (28 वर्ष) को मेहम, रोहतक से
  • अमन (24 वर्ष) को रोहतक से

उसी दिन गिरफ्तार कर लिया।

दोनों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया, जिनमें ₹29,110 की असुरक्षित राशि होल्ड की गई, जो पीड़ितों की थी।

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पूछताछ में खुलासे — बैंक खाते कमीशन पर सप्लाई किए जाते थे

पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं।

  • अमन बैंक खातों को साइबर अपराधियों को सप्लाई करता था और इसके बदले उसे 4% कमीशन मिलता था।
  • नेरज ने अपना बैंक खाता अमन को 2% कमीशन पर उपलब्ध कराया था।
  • नेरज एक Common Service Centre (CSC) चलाता है, जिसके चलते उसके पास एक वर्तमान बैंक खाता था, जिसे अपराधियों ने ठगी के लिए इस्तेमाल किया।

अमन इस नेटवर्क में एक मुख्य लिंक की तरह काम करता था, जो:

  • बैंक खाताधारकों
  • एजेंटों
  • और मूल साइबर मास्टरमाइंड
    को जोड़ने का काम करता था।

मोबाइल फोन से व्हाट्सऐप चैट, बैंक विवरण और कई अन्य डिजिटल सबूत बरामद किए गए।

बरामद सामान

गिरफ्तार आरोपियों के पास से निम्नलिखित सामान बरामद किया गया:

  • 02 मोबाइल फोन
  • 02 सिम कार्ड
  • 05 डेबिट कार्ड
  • 01 चेकबुक
  • कई डिजिटल ट्रांजैक्शन के स्क्रीनशॉट और व्हाट्सऐप चैट

आरोपियों की प्रोफाइल

1. नेरज (28 वर्ष)

  • निवासी: किशनगढ़, मेहम, रोहतक
  • शिक्षा: पोस्ट ग्रेजुएट
  • कार्य: पिछले दो वर्षों से Common Service Centre (CSC) चला रहा था
  • भूमिका: अपना बैंक खाता कमीशन पर उपलब्ध कराना

2. अमन (24 वर्ष)

  • निवासी: भैनी माटो, रोहतक
  • शिक्षा: 12वीं पास
  • कार्य: कपड़ों का शो रूम चलाता था
  • भूमिका: बैंक खाते साइबर अपराधियों तक पहुंचाना, नेटवर्क में मध्यस्थ की भूमिका

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जारी है जांच — मास्टरमाइंड की तलाश में पुलिस

दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड अजय और अन्य साथियों की तलाश में जुटी है।

पुलिस का मानना है कि यह गिरोह संगठित तरीके से काम करता है और लोगों को व्हाट्सऐप ग्रुप, नकली ऐप और फर्जी लाभ दिखाकर जाल में फंसाता है।

जांच अभी जारी है और पुलिस जल्द ही इस कार्टेल के अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार करने की बात कह रही है।

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