Narela Firing Case: दिल्ली पुलिस ने 8 बदमाश दबोचे, Lawrence Bishnoi गैंग से कनेक्शन

Narela Firing Case दिल्ली पुलिस ने 8 बदमाश दबोचे, Lawrence Bishnoi गैंग से कनेक्शन दिल्ली में फिरौती और फायरिंग केस का बड़ा खुलासा: आठ आरोपी

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Narela Firing Case दिल्ली पुलिस ने 8 बदमाश दबोचे, Lawrence Bishnoi गैंग से कनेक्शन

दिल्ली में फिरौती और फायरिंग केस का बड़ा खुलासा: आठ आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने संगठित नेटवर्क का किया पर्दाफाश

राजधानी दिल्ली Narela में संगठित अपराध और फिरौती की वारदातों ने एक बार फिर सनसनी फैला दी है। बाहरी उत्तर जिला पुलिस ने हाल ही में एक बड़े फिरौती और फायरिंग मामले का पर्दाफाश किया है, जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया था। इस मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य हमलावर, हथियार सप्लाई करने वाले और आर्थिक मददगार सभी शामिल हैं। पुलिस की तेज कार्रवाई और रणनीतिक जांच की हर जगह सराहना की जा रही है।

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यह मामला न केवल पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच की सफलता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अपराधियों का संगठित नेटवर्क किस तरह योजनाबद्ध तरीके से काम करता है और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके वारदातों को अंजाम देता है।

घटना का सिलसिला: दिनदहाड़े चली गोलियाँ और मांग ली करोड़ों की फिरौती

यह पूरी वारदात 14 सितंबर 2025 को घटित हुई। नरेला थाना इलाके से पुलिस को सूचना मिली कि दो युवक सफेद रंग की अपाची मोटरसाइकिल पर आए और एक प्रॉपर्टी डीलर के दफ्तर पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर फरार हो गए। सूचना देने वाले ने यह भी बताया कि बदमाश हरियाणा की तरफ भाग निकले हैं और बाइक का आंशिक नंबर भी साझा किया।

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जब पुलिस मौके पर पहुँची तो पता चला कि जय भवानी बिल्डकॉन नामक दफ्तर पर फायरिंग की गई थी। वहां से चार खाली कारतूस बरामद किए गए। इस फायरिंग में प्रॉपर्टी डीलर राजेश कौशिक गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

लेकिन वारदात यहीं तक सीमित नहीं रही। फायरिंग के कुछ ही समय बाद घायल डीलर को एक धमकी भरा फोन आया। कॉलर ने साफ शब्दों में कहा कि अगर पाँच करोड़ रुपये की फिरौती नहीं दी गई तो न केवल राजेश कौशिक बल्कि उनके पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा। कॉलर ने धमकी दी कि रकम दो दिनों के भीतर देनी होगी और अगर तुमने नहीं दिया तो तुम्हारे परिजन मजबूर होकर देंगे। इस धमकी ने मामले को और गंभीर बना दिया और यह साफ हो गया कि हमला महज़ डराने के लिए नहीं बल्कि संगठित फिरौती वसूली का हिस्सा था।

पुलिस ने दर्ज किया मामला और बनाई विशेष टीमें

पीड़ित के बयान पर नरेला थाने में एफआईआर नंबर 628/25 दर्ज की गई। इसमें भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराएँ और आर्म्स एक्ट की धाराएँ शामिल की गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कई विशेष टीमें बनाई।

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नरेला थाने के एसएचओ राजेंद्र सिंह और विशेष स्टाफ प्रभारी इंस्पेक्टर आनंद कुमार झा को जांच का जिम्मा सौंपा गया। इन टीमों को एसीपी नरेला राजेश कुमार और एसीपी ऑप्स दिनेश कुमार ने गाइड किया, जबकि पूरे ऑपरेशन की निगरानी डीसीपी हरेश्वर स्वामी और जॉइंट सीपी उत्तरी रेंज विजय सिंह (IPS) कर रहे थे।

पहली सफलता: 18 सितंबर को तीन आरोपी गिरफ्तार

लगातार जांच और गुप्त सूचनाओं के आधार पर 18 सितंबर को पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें शामिल थे:

  • दिनेश (22 वर्ष, दिल्ली निवासी)
  • सौरव उर्फ गौरव (22 वर्ष, मेरठ, यूपी निवासी)
  • हेमंत उर्फ अक्षय (20 वर्ष, दिल्ली निवासी)

जांच में सामने आया कि यही तीनों आरोपी फायरिंग की वारदात में सीधे तौर पर शामिल थे और इन्होंने ही सफियाबाद रोड पर प्रॉपर्टी डीलर के ऑफिस पर गोलियाँ चलाई थीं।

दूसरी सफलता: 26 सितंबर को छह और गिरफ्तारियाँ

26 सितंबर को पुलिस ने एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए छह और आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें शामिल हैं:

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आशीष त्यागी उर्फ काला (27 वर्ष, पानीपत निवासी) – हथियार सप्लाई करने वाला

राहुल उर्फ पिस्टल (27 वर्ष, मेरठ निवासी) – होटल, पैसे और लॉजिस्टिक मदद देने वाला

वंश मलिक उर्फ कट्टा/बाबा (18 वर्ष, बागपत, यूपी निवासी) – तकनीकी और लॉजिस्टिक सपोर्ट

सचिन (26 वर्ष, पानीपत निवासी) – गैंग का सहयोगी

संदीप उर्फ सन्नी उर्फ चन्नी (34 वर्ष, पानीपत निवासी) – आर्थिक मददगार

अनुरोध त्यागी उर्फ मोनू – वित्तीय और लॉजिस्टिक सहयोग देने वाला (मुख्य भूमिका की पुष्टि हुई)

इन गिरफ्तारियों के बाद पूरे गैंग की रूपरेखा पुलिस के सामने आ गई।

चौंकाने वाला आपराधिक रिकॉर्डगिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड बेहद खतरनाक है।

  • राहुल उर्फ पिस्टल पर पहले से हत्या, हत्या के प्रयास और चोरी जैसे तीन बड़े केस दर्ज हैं।
  • आशीष त्यागी उर्फ काला पर पहले से आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है।
  • संदीप उर्फ सन्नी के खिलाफ भी हत्या के प्रयास का मामला पहले से चल रहा है।
  • बाकी आरोपी भी कई मामलों में शामिल पाए गए हैं।

साजिश के पीछे का मास्टरमाइंड

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि इस पूरे षड्यंत्र के पीछे जोरा नाम का अपराधी है। वह खुद को कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भाई बताता है। पूरी योजना सिग्नल ऐप के जरिए बनाई गई थी और सभी आरोपी इसी ऐप पर संपर्क में रहते थे।

हथियारों की सप्लाई आशीष त्यागी और कुनाल त्यागी ने सोनीपत के जिंदल यूनिवर्सिटी के पास से की थी। राहुल उर्फ पिस्टल ने इन अपराधियों को पैसे, कपड़े और होटल उपलब्ध कराए, जबकि वंश मलिक और अनुरोध त्यागी ने लॉजिस्टिक व आर्थिक सहयोग दिया।

पुलिस की बरामदगियाँ

पुलिस ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण बरामदगियाँ कीं:

जांच में तकनीक और मुखबिरों की बड़ी भूमिका

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस केस को सुलझाने में सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी निगरानी और मुखबिरों की सूचना ने अहम भूमिका निभाई। अपराधियों ने वारदात में आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल किया था, लेकिन पुलिस ने भी तकनीक का सहारा लेकर उन्हें मात दे दी।

मकसद: सिर्फ डराना नहीं, करोड़ों की उगाही

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में यह साफ हुआ कि उनका मकसद केवल डराना या हमला करना नहीं था, बल्कि बड़े पैमाने पर पैसे की उगाही करना था। प्रॉपर्टी डीलर पर गोली चलाने के बाद जानबूझकर उसे फोन करके पाँच करोड़ रुपये की भारी-भरकम फिरौती मांगी गई।

पुलिस का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई न होती तो आरोपी किसी और बड़ी वारदात को भी अंजाम दे सकते थे।

आगे की जांच और पुलिस की सतर्कता

फिलहाल पुलिस ने आठों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। साथ ही, अभी भी कुछ सहयोगियों की तलाश की जा रही है जो फरार हैं। पुलिस को उम्मीद है कि आगे की जांच में और भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं और यह भी पता चलेगा कि यह गैंग किस हद तक संगठित नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

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दिल्ली पुलिस की तत्परता और रणनीति ने एक बड़े संगठित अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है। इस केस से साफ होता है कि अपराधी अब केवल स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि राज्यों की सीमाओं को पार करके गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े हुए हैं और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।

पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करके न केवल एक बड़े अपराध को रोका बल्कि यह भी दिखाया कि कानून और तकनीक के सही इस्तेमाल से संगठित अपराधियों को मात दी जा सकती है। यह केस आने वाले समय में पुलिस की जांच प्रणाली और अपराध नियंत्रण की रणनीति के लिए एक मिसाल बनकर सामने आएगा।

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