दिल्ली से एक ऐसी चौंकाने वाली घटना सामने आई है जिसने सभी को हैरान कर दिया है।संजय गांधी अस्पतालमें एक परिवार ने अपने परिजन का शव समझकर गलती से किसी और व्यक्ति के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। यह गंभीर लापरवाही दिल्ली के मंगोलपुरी स्थित संजय गांधी अस्पताल और संबंधित थानों की कार्यशैली पर भी बड़े सवाल खड़े करती है। दो अलग-अलग थानों — नांगलोई और प्रेम नगर — के मामलों में लापरवाही के चलते एक मृतक का शव परिजनों को सौंपने के बजाय दूसरे परिवार को दे दिया गया। अब मृतक पंकज सिंह का परिवार तीन दिन से न्याय और जवाबदेही की तलाश में अस्पताल, थाने और डीसीपी ऑफिस के चक्कर लगा रहा है।
⚰️ घटना की शुरुआत: दो अलग-अलग मौतें, एक ही अस्पताल में रखे गए शव
जानकारी के मुताबिक बीते बुधवार को दिल्ली के नांगलोई और प्रेम नगर थाना क्षेत्रों में दो अलग-अलग घटनाएं हुईं।
नांगलोई क्षेत्र: यहां पुलिस को सूचना मिली कि एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। मृतक की पहचान भारत भूषण (उम्र 45 वर्ष) के रूप में हुई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए संजय गांधी अस्पताल की मोर्चरी में शिफ्ट करवा दिया।
प्रेम नगर क्षेत्र: इसी दिन प्रेम नगर इलाके में पंकज सिंह (उम्र लगभग 40 वर्ष) छत से गिरकर घायल हो गया। मकान मालिक ने उसे घायल अवस्था में देखा और पुलिस को सूचना दी। पीसीआर वैन ने पंकज को मंगोलपुरी के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अस्पताल कर्मियों ने पंकज का शव भी पोस्टमार्टम के लिए उसी मोर्चरी में रखवाया।
दोनों शव एक ही अस्पताल की मोर्चरी में रखे गए और थानों की शुरुआती कागजी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। यहीं से लापरवाही की श्रृंखला शुरू हुई।
दिल्ली में शव की पहचान में बड़ी गलती, अस्पताल और पुलिस पर गंभीर सवालc
📝 पहचान में चूक और अस्पताल की गलती
अगले दिन प्रेम नगर थाना क्षेत्र के मृतक पंकज के परिजन शव लेने अस्पताल पहुंचे। उन्हें बताया गया कि शव मोर्चरी में सुरक्षित है और पोस्टमार्टम अगले दिन सुबह होगा। दशहरे के दिन यानी गुरुवार को जब वे शव लेने पहुंचे, तो अस्पताल प्रशासन ने उन्हें चौंकाने वाली बात बताई — पंकज का शव मोर्चरी में है ही नहीं।
जांच में खुलासा हुआ कि अस्पताल ने गलती से पंकज का शव नांगलोई क्षेत्र के मृतक भारत भूषण के परिवार को दे दिया था। मृतक की पत्नी और साले ने शव को दूर से देखा और पहचान करने की औपचारिकता पूरी कर ली। लेकिन दोनों शवों की उम्र, कद-काठी और दिखावट लगभग एक जैसी थी, जिससे पहचान में भ्रम की स्थिति बनी। अस्पताल ने शव की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए जरूरी सावधानी नहीं बरती और शव गलत परिवार को सौंप दिया गया।
🔥 गलत शव का दाह संस्कार
नांगलोई वाले परिवार ने पंकज के शव को भारत भूषण समझकर अपने घर ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया। यह सब दशहरे के दिन हुआ, जब परिवारजन अस्थियों को गंगा में विसर्जन करने के लिए भी पहुंच चुके थे।
दूसरी ओर, पंकज का परिवार अस्पताल और थानों के बीच भटकता रहा। उन्हें केवल इतना बताया गया कि अब उनके भाई के शव की जगह केवल अस्थियां और राख ही बची हैं।
प्रेम नगर के मृतक पंकज के भाई प्रदीप कुमार ने मीडिया को बताया,
“हम पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल पहुंचे थे। वहां बताया गया कि पंकज का शव तो मोर्चरी में है ही नहीं। किसी और परिवार को देकर उसका दाह संस्कार कर दिया गया है। अब हमें कहा जा रहा है कि राख और अस्थियां ले जाकर तर्पण कर दीजिए।”
दिल्ली में दो शवों की अदला-बदली, अस्पताल की लापरवाही से परिवार ने गलत व्यक्ति का किया दाह संस्कार
🏥 अस्पताल और पुलिस पर गंभीर सवाल
यह घटना सिर्फ पहचान की गलती नहीं बल्कि अस्पताल प्रशासन और पुलिस की लापरवाही की एक गंभीर मिसाल है। मोर्चरी में रखे हर शव पर नाम, उम्र, थाना क्षेत्र, समय जैसी सभी जरूरी जानकारियां लिखी जाती हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी शव की पहचान और मृत्यु के कारण स्पष्ट करती है।
इसके बावजूद अस्पताल कर्मियों और ड्यूटी पर तैनात पुलिस ने सही तरीके से शव की पहचान सुनिश्चित नहीं की। नांगलोई वाले मृतक भारत भूषण की पत्नी ने बताया कि अस्पताल वालों ने शव को दूर से ही दिखाया और ठीक से देखने नहीं दिया। उनका कहना है,
“मुझे कम दिखाई देता है। पति की मौत के सदमे में थी। अस्पताल वालों ने दूर से ही दिखाया और कहा यही है। हमने बिना ज्यादा देखे पहचान कर ली।”
भारत भूषण के साले गोपी ने भी कहा,
“अस्पताल की बड़ी गलती है। उन्होंने शव को ठीक से दिखाया ही नहीं। अगर पहचान ठीक से होती तो ऐसी गलती न होती।”
🚔 पुलिस की भूमिका और बाद की कार्रवाई
इस खुलासे के बाद प्रेम नगर थाना पुलिस ने तुरंत नांगलोई थाना पुलिस से संपर्क किया और पूरी स्थिति बताई। नांगलोई पुलिस ने मृतक भारत भूषण के परिवार को बुलाकर स्थिति स्पष्ट की। तब जाकर परिवार को पता चला कि उन्होंने गलती से पंकज के शव का अंतिम संस्कार कर दिया है।
इस बीच असली भारत भूषण का शव भी पोस्टमार्टम के बाद नांगलोई थाने के माध्यम से परिजनों को सौंपा गया और दोबारा अंतिम संस्कार किया गया। यह स्थिति परिवारों के लिए बेहद विचलित करने वाली थी — एक परिवार ने गलती से दूसरे का शव जला दिया, जबकि दूसरा परिवार अपने मृतक का अंतिम दर्शन तक न कर सका।
🧍 परिजनों का दर्द और शिकायत
प्रेम नगर मृतक पंकज का परिवार इस घटना से गहराई से आहत है। पंकज के भाई प्रदीप कुमार ने डीसीपी रोहिणी को लिखित शिकायत दी है। उनका कहना है,
“हमारा भाई छत से गिरकर मरा, यह एक हादसा था। लेकिन अस्पताल और पुलिस की लापरवाही ने हमें उसका चेहरा देखने तक का मौका नहीं दिया। हमें सिर्फ अस्थियां थमा दी गईं। हम न्याय चाहते हैं।”
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❓ अनुत्तरित सवाल
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
अस्पताल ने शव सौंपते समय पहचान की औपचारिकताओं को क्यों हल्के में लिया?
पुलिस की निगरानी में पोस्टमार्टम और शव सौंपने की प्रक्रिया में दोहरा सत्यापन क्यों नहीं हुआ?
परिवारजनों को शव को पास से दिखाने और पुष्टि करने का पर्याप्त अवसर क्यों नहीं दिया गया?
इतने सारे रिश्तेदारों और पड़ोसियों में से किसी ने शव पहचानने में गलती कैसे नहीं पकड़ी?
ये सभी सवाल अस्पताल प्रशासन और पुलिस की जवाबदेही पर सीधा सवालिया निशान लगाते हैं।
नांगलोई–प्रेम नगर मामला: दिल्ली अस्पताल ने शव बदलकर दे दिया, परिवार भटकते रहे
📌 वर्तमान स्थिति
घटना के तीन दिन बाद भी पंकज का परिवार न्याय की उम्मीद में विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है। उन्होंने मांग की है कि जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
फिलहाल डीसीपी रोहिणी को दी गई शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि अस्पताल प्रशासन और संबंधित स्टाफ से पूछताछ की जाएगी और लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक साधारण गलती नहीं बल्कि एक ऐसी लापरवाही की मिसाल है जिसने एक परिवार को अपने प्रियजन के अंतिम दर्शन से भी वंचित कर दिया और दूसरे परिवार को अपराधबोध में डाल दिया। पहचान की औपचारिकताओं में ढिलाई और प्रशासनिक उदासीनता ने दो परिवारों को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया है।
यह मामला न केवल अस्पताल प्रणाली की खामियों को उजागर करता है, बल्कि पुलिस की निगरानी प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि क्या इस लापरवाही के दोषियों को सजा मिलती है या नहीं।