
जहांगीरपुरी थाना पानी में डूबा, पुलिसकर्मी और लोग परेशान
दिल्ली में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें, आम जनजीवन अस्त-व्यस्त
राजधानी दिल्ली में लगातार हो रही बारिश ने लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। एक तरफ़ लोग अपने घरों से बाहर निकलने में परेशान हो रहे हैं, तो दूसरी ओर अस्पतालों और थानों जैसे महत्वपूर्ण स्थान भी जलभराव की चपेट में आ गए हैं। यह हाल सिर्फ एक दिन की तेज़ बारिश का नहीं है, बल्कि हर साल बरसात में दिल्ली की तस्वीर कुछ इसी तरह की बन जाती है। सवाल यह है कि इतने वर्षों बाद भी जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल पाया?
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बाबू जगजीवन राम अस्पताल बना तालाब
उत्तर दिल्ली का बाबू जगजीवन राम अस्पताल इस वक्त जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। अस्पताल के मुख्य गेट और पार्किंग एरिया में घुटनों तक पानी भरा हुआ है। मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल के भीतर आना-जाना बेहद मुश्किल हो गया है। व्हीलचेयर या स्ट्रेचर पर मरीजों को अंदर ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
पानी में सीवर का गंदा पानी भी मिल गया है, जिससे अस्पताल परिसर में बदबू फैल रही है। यह बदबू संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ा रही है। लोग कह रहे हैं कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की लापरवाही बेहद खतरनाक है।
जहांगीरपुरी थाना भी डूबा पानी में
कानून व्यवस्था संभालने वाला जहांगीरपुरी थाना भी जलभराव की मार से अछूता नहीं रहा। थाने के अंदर घुटनों तक पानी भरा हुआ है। पुलिसकर्मी ही नहीं, बल्कि अपनी शिकायत दर्ज कराने आए लोग भी पानी पार करने को मजबूर हैं। आम नागरिकों को थाने तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
यह हाल देखकर लोगों ने सवाल उठाया कि जब राजधानी के थाने और अस्पताल ही जलभराव से सुरक्षित नहीं हैं, तो आम बस्तियों और गलियों का क्या हाल होगा।
दिल्ली में बारिश से हाहाकार: अस्पताल और थाना जलभराव में डूबे, जनता बेहाल
गलियों में जलभराव से आम लोग बेहाल
जहांगीरपुरी इलाके की गलियों में घुटनों तक पानी भरा हुआ है। बच्चे पानी में खेलते नज़र आ रहे हैं, लेकिन बुजुर्ग, महिलाएँ और विकलांग लोग इससे बेहद परेशान हैं। कई जगह दुकानदारों ने बताया कि पानी भरने से उनका कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है। दुकानों के भीतर पानी घुस गया है, जिससे सामान खराब हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल यही समस्या दोहराई जाती है। थोड़ी सी बारिश होते ही नाले उफान मारने लगते हैं और गंदा पानी सड़कों पर फैल जाता है।

दिल्ली में बारिश का कहर: अस्पताल और थाने में घुटनों तक पानी
सफाई व्यवस्था पर सवाल
लोगों का सबसे बड़ा आरोप प्रशासन और नगर निगम पर है। उनका कहना है कि हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है। नाले साफ नहीं होने की वजह से थोड़ी सी बारिश में ही पानी भर जाता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते नालों की सफाई कराई जाती, तो हालात इतने खराब नहीं होते। लोगों ने यह भी कहा कि जब तक हालात बिगड़ नहीं जाते, तब तक अधिकारी या जनप्रतिनिधि मौके पर नहीं आते।
संक्रमण का खतरा बढ़ा
बारिश के पानी के साथ सीवर का गंदा पानी मिल जाने से संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया है। अस्पताल के बाहर जमा पानी से मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। गली-मोहल्लों में भी लोग बदबू और गंदगी से परेशान हैं। जलभराव के बीच कई लोग बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।

नालों की सफाई न होने से दिल्ली में जलभराव, जनता आक्रोशित
दुकानदार और आम लोग सबसे ज्यादा प्रभावित
जहांगीरपुरी और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि पानी भरने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है। दुकानदारों ने शिकायत की कि कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया है। लोग बाहर निकलने से डर रहे हैं, क्योंकि सड़कों पर पानी जमा होने से गिरने और चोट लगने का भी खतरा है।
सरकार और प्रशासन पर सवाल
लोगों का कहना है कि दिल्ली की बारिश हर साल यही तस्वीर दिखाती है। बार-बार जनता को परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकला। सरकार और प्रशासन हर बार आश्वासन देते हैं, लेकिन स्थिति जस की तस रहती है।
स्थानीय लोगों की यह भी मांग है कि प्रशासन को सिर्फ अस्थायी इंतजामों से काम नहीं चलाना चाहिए, बल्कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।

दिल्ली में लगातार बारिश से सड़कें और गलियां बनीं तालाब
जनता की उम्मीद
इस बार जनता यही उम्मीद कर रही है कि सरकार और प्रशासन समय रहते ठोस कदम उठाएंगे, ताकि अगली बारिश में हालात और बदतर न हों। अस्पतालों, थानों और गलियों में पानी भरना यह दिखाता है कि अभी भी बुनियादी ढांचे में सुधार की सख्त जरूरत है।