
गंदे पानी, अंधेरे और भूख में कैद दिल्ली की जनता
जहाँगीरपुरी में जलजमाव: दिल्ली डूबी, बीजेपी मस्त!
दिल्ली की तस्वीरें देखकर शायद ही कोई यक़ीन करे कि यह वही राजधानी है, जिसे देश की शान और दुनिया का दिल कहा जाता है। लेकिन हकीकत ये है कि जहाँगीरपुरी इलाके के हालात इस कदर बिगड़े हुए हैं कि लोग खुलेआम कह रहे हैं – “ये नरक से कम नहीं।”
पिछले दो दिनों से हुई मूसलाधार बारिश ने इलाके की बुनियादी व्यवस्था की पोल खोल दी। जगह-जगह जलजमाव, सीवर उफनते नाले, डूबे हुए घर और असहाय लोग। सवाल उठ रहा है – “क्या यही है बीजेपी का विकास मॉडल? क्या यही हैं अच्छे दिन?”
बस्ती बनी मौत का दरिया
जब हमारी टीम ने ग्राउंड ज़ीरो पर जाकर हालात देखे तो दिल दहल गया।
- घरों के भीतर घुटनों तक गंदा और बदबूदार पानी भर चुका है।
- दीवारें सीलन से भीग चुकी हैं, ईंटें झड़ रही हैं।
- चारों तरफ़ कचरे और कीचड़ का ढेर जमा है।
- हवा में ऐसी बदबू घुली है कि सांस लेना मुश्किल हो गया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी में साँप तक तैरते दिखे हैं, और कई बार ये घरों के भीतर घुस जाते हैं। लोगों का कहना है – “अब डर सिर्फ बीमारी का नहीं है, जान का भी है।”
एक बुजुर्ग ने कांपती आवाज़ में कहा:
“बेटा, दो दिन से रोटी नहीं खाई। बिजली गई हुई है, गैस जल नहीं रही, पानी पीने लायक नहीं है। क्या हम दिल्ली में रहते हैं या जंगल में?”

“बीजेपी हटाओ, दिल्ली बचाओ” – जहाँगीरपुरी की पुकार
महिलाओं और बच्चों की दुश्वारी
सबसे अधिक तकलीफ़ महिलाओं और बच्चों को झेलनी पड़ रही है। महिलाएँ अपने छोटे-छोटे बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित जगह तलाश रही हैं। बच्चे लगातार भूख और मच्छरों से परेशान हैं।
एक माँ रोते हुए कहती है:
“तीन दिन हो गए, बच्चे को दूध नसीब नहीं हुआ। मच्छर काट रहे हैं, बुखार चढ़ रहा है। अगर मेरे बच्चे को कुछ हो गया, तो जिम्मेदार कौन होगा?”
इलाके में हर तरफ़ बच्चों की चीखें और माताओं का दर्द सुनाई देता है। साफ है कि सबसे बड़ी मार उनपर ही पड़ी है जो सबसे कमजोर हैं।
अस्थायी शरणालय बने मंदिर और स्कूल
जिनके घर पूरी तरह डूब गए, उन्हें मजबूरी में मंदिरों और स्कूलों में शरण लेनी पड़ी। फर्श पर चादरें बिछाकर लोग रात गुज़ार रहे हैं।
बच्चे कोने में सिसकते हैं, बुजुर्ग चारपाई पर बैठकर आसमान की ओर ताकते हैं। लोगों का कहना है – “हम अपने ही शहर में शरणार्थी बन गए हैं। जिस घर को बनाने में सालों की कमाई खर्च की, आज वो तालाब बन चुका है।”
जनता का गुस्सा BJP पर
जहाँगीरपुरी की सड़कों पर पानी में खड़े लोग नारे लगाते दिखे –
- “बीजेपी हाय-हाय”
- “बीजेपी मुर्दाबाद”
- “बीजेपी की पोल खोल”
लोगों का कहना है कि भाजपा नेताओं ने सिर्फ चुनाव के समय हाथ जोड़े, वादे किए, लेकिन अब जब बस्ती डूब गई है तो कोई हाल-चाल लेने तक नहीं आया।
एक महिला का बयान सीधा था:
“जब वोट माँगने आते हैं तो पैर पकड़ लेते हैं। लेकिन आज जब हमारी जान खतरे में है, तो सबने दरवाज़े बंद कर लिए।”

सीवर जाम, गलियाँ डूबीं – विकास के वादे पानी में
बिजली बंद, अंधेरे में ज़िंदगी
करंट से हादसों से बचने के लिए इलाके की बिजली काट दी गई। अब पूरा इलाका अंधेरे में डूब चुका है।
रात को महिलाएँ मोबाइल की टॉर्च जलाकर बच्चों को सुलाती हैं। बुजुर्ग बाथरूम तक जाने के लिए लालटेन का सहारा लेते हैं। लोग कह रहे हैं – “ये 21वीं सदी की दिल्ली नहीं, बल्कि अंधकार युग है।”
भूख और बीमारी की दहशत
गंदे पानी में डूबे घरों से बदबू आ रही है। मच्छरों की भरमार ने डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ा दिया है। कई लोगों ने बताया कि छोटे बच्चे और बुजुर्ग तेज़ बुखार से जूझ रहे हैं।
राशन और दूध के पैकेट पानी में भीगकर खराब हो चुके हैं। दुकानों तक पहुँचना नामुमकिन है। लोग खुलेआम कह रहे हैं –
“अगर सरकार ने जल्द राहत नहीं दी, तो हम भूखों मर जाएंगे।”
बीजेपी पर सीधा आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि भाजपा ने हमेशा झूठे वादे किए।
- चुनाव में सड़कों और नालों की सफाई का वादा।
- ड्रेनेज सिस्टम सुधारने का दावा।
- बारिश से बचाव के इंतज़ाम का आश्वासन।
लेकिन नतीजा सामने है। एक युवक का कहना था –
“बीजेपी ने हमें कभी इंसान समझा ही नहीं। उनके लिए हम सिर्फ वोट बैंक हैं। वोट लेने के बाद किसी ने पलटकर देखा तक नहीं।”
दिल्ली बारिश से जलभराव बाबू जगजीवन राम अस्पताल और जहांगीरपुरी थाने में बदहाल हालात”
“दिल्ली की शान कहाँ है?”
दिल्ली को दुनिया के सबसे आधुनिक शहरों में गिनाने की कोशिश की जाती है। लेकिन जहाँगीरपुरी की हालत देखकर लोग पूछ रहे हैं – “ये वही दिल्ली है? जहाँ प्रधानमंत्री विश्वगुरु बनने की बात करते हैं?”
एक युवा गुस्से से बोला:
“पहले हमारी बस्ती तो बचा लो, फिर दुनिया जीतने का सपना देखो।”
डर का साया
इलाके में हर पल मौत का डर मंडरा रहा है।
- करंट लगने का खतरा।
- गंदे पानी से बीमारी का फैलाव।
- डूबने की घटनाएँ।
लोगों का कहना है कि अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए तो यह आपदा जनसंहार में बदल सकती है।
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बीजेपी सरकार की नाकामी उजागर
जहाँगीरपुरी के हालात साफ बताते हैं कि भाजपा सरकार पूरी तरह नाकाम रही।
- सीवर साफ नहीं हुए।
- ड्रेनेज सिस्टम में सुधार नहीं हुआ।
- राहत कार्य तक नहीं पहुँचे।
लोगों का कहना है – “बीजेपी हटाओ, दिल्ली बचाओ।”
नेताओं की चुप्पी
दिल्ली जैसे बड़े शहर में जब लोग भूख, अंधेरे और बीमारी से लड़ रहे हैं, तो नेता गायब हैं। न कोई दौरा, न कोई राहत सामग्री, न कोई हेल्पलाइन।
लोगों का कहना है – “टीवी पर भाषण देने वाले नेता हमारी गली में झाँकने तक नहीं आए। क्या हमारी जान की कोई कीमत नहीं?”

21वीं सदी की दिल्ली में अंधकार युग – बिजली, खाना और राहत सब गायब
बस्ती की पुकार
गंदे पानी में खड़े होकर लोग मदद की गुहार लगा रहे हैं। बच्चे रो रहे हैं, महिलाएँ चीख रही हैं, बुजुर्ग हाथ जोड़ रहे हैं। लेकिन प्रशासन की तरफ़ से सिर्फ खामोशी है।
लोग कहते हैं –
“हमारे बच्चों को दूध चाहिए, हमारे बुजुर्गों को दवा चाहिए, हमारे घरों से पानी निकालो। हम इंसान हैं, हमें इंसान समझो।”
दिल्ली की सच्चाई
जहाँगीरपुरी की तस्वीर दिल्ली के उस चेहरे को दिखाती है, जिसे सरकार छुपाना चाहती है। चमकती हुई मेट्रो, गगनचुंबी इमारतें और बड़े-बड़े दावे – इन सबके पीछे सड़ता हुआ सच यही है कि एक बस्ती डूब गई है और सरकार मस्त है।