
मॉडल टाउन पुलिस की बड़ी सफलता – ब्लाइंड केस सुलझाकर आरोपी गिरफ्तार
“रक्षक से अपराधी तक” : उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस ने 15 दिन की लगातार मेहनत से पकड़ा स्कूटी सवार छेड़छाड़ करने वाला आरोपी
दिल्ली की सड़कों पर महिला सुरक्षा को चुनौती देने वाली घटनाएँ समय-समय पर सामने आती रही हैं। परंतु इस बार उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस, थाना मॉडल टाउन की टीम ने जिस तरीके से एक ब्लाइंड केस को सुलझाकर आरोपी को गिरफ्तार किया है, वह न केवल पुलिस की तत्परता और पेशेवर क्षमता का उदाहरण है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि चाहे अपराध कितना भी जटिल क्यों न हो, कानून के शिकंजे से कोई नहीं बच सकता।
यह कहानी है एक सिक्योरिटी गार्ड की, जिसका पेशा लोगों की सुरक्षा करना था लेकिन उसने खुद ही महिलाओं के लिए खतरा बनकर उन्हें सड़क पर असुरक्षित महसूस करवाया। पुलिस ने इस मामले को “रक्षक से अपराधी तक” का नाम दिया है क्योंकि आरोपी पेशे से तो रक्षक था, लेकिन मानसिक विकृति और असामाजिक प्रवृत्ति के कारण अपराधी बन गया।
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घटना की शुरुआत : युवती की शिकायत से खुला मामला
दिनांक 02 सितंबर 2025 को थाना मॉडल टाउन में एक युवती पहुँची और उसने शिकायत दर्ज कराई कि पिछले दो दिनों में दो बार एक अज्ञात स्कूटी सवार युवक ने उसका पीछा किया और अश्लील हरकतें करते हुए छेड़छाड़ की। शिकायतकर्ता युवती डरी और सहमी हुई थी, लेकिन उसने साहस जुटाकर पुलिस के पास जाकर मामला दर्ज कराया।
इस पर थाना मॉडल टाउन पुलिस ने FIR नं. 472/25, धारा 75 BNS के तहत केस दर्ज किया। मामला चुनौतीपूर्ण था क्योंकि शिकायत में आरोपी का नाम, पहचान या कोई ठोस सुराग उपलब्ध नहीं था। यह पूरी तरह से ब्लाइंड केस था।
ब्लाइंड केस की चुनौतियाँ
अक्सर ऐसे मामलों में आरोपी को पकड़ना कठिन होता है क्योंकि घटनास्थल पर न तो कोई चश्मदीद गवाह होता है और न ही कोई प्रत्यक्ष सबूत। पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी कि आरोपी की पहचान कैसे स्थापित की जाए।
फिर भी, थाना मॉडल टाउन पुलिस टीम ने हार नहीं मानी और अपनी पेशेवर कुशलता का परिचय दिया।
जांच के लिए गठित टीम
ACP/मॉडल टाउन श्री सुरेश खुंगा के निर्देशन और SHO/मॉडल टाउन इंस्पेक्टर अशोक गिरी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में शामिल थे –
Delhi Rohini Encounter | Special Cell Nabs Rohit Godara Gang Member Ankit | Jahangirpuri Firing News
W/SI दिव्या
HC दीपक
HC हकीकत
HC पवन
Ct. नदीम
इन अधिकारियों और जवानों ने दिन-रात मेहनत करके केस को सुलझाने का संकल्प लिया।
जांच की दिशा : तकनीकी और मानवीय दोनों तरीके अपनाए
सबसे पहले पुलिस ने परिवहन विभाग से उस स्कूटी की सीरीज का डेटा जुटाया, जो घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दी थी। इस प्रक्रिया में लगभग 1.5 लाख से अधिक एंट्रीज़ का विश्लेषण किया गया।
शुरुआती जांच में पुलिस ने पाया कि स्कूटी यामाहा सिग्नस मॉडल की है। लेकिन सिर्फ इस जानकारी से आरोपी तक पहुँचना आसान नहीं था।

15 दिन की लगातार मेहनत रंग लाई – स्कूटी सवार मनचला गिरफ्तार
इसी बीच पुलिस टीम ने मॉडल टाउन, मुखर्जी नगर, सिविल लाइंस, आदर्श नगर और भारत नगर क्षेत्रों में फैले लगभग 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। यह काम बेहद थकाऊ और समय लेने वाला था।
पीड़िताओं की चुप्पी और सामाजिक कलंक की बाधा
जांच के दौरान पुलिस को एक और युवती मिली, जिसने उसी आरोपी द्वारा छेड़छाड़ की घटना की जानकारी दी और आरोपी का विस्तृत हुलिया बताने में मदद की।
लेकिन अधिकांश पीड़िताएँ सामने आने से कतराती रहीं। सामाजिक कलंक और परिवार की चिंता के कारण वे चुप रहना पसंद कर रही थीं। यह स्थिति समाज की मानसिकता को दर्शाती है, जहाँ पीड़िता खुद को दोषी समझने लगती है।
फिर भी, पुलिस टीम ने जुटाए गए सुरागों के आधार पर लगातार जांच जारी रखी।
लगातार 15 दिनों की मेहनत का परिणाम
लगातार 15 दिन तक पुलिस टीम ने दिन-रात सीसीटीवी फुटेज खंगाले, फील्ड जांच की और संदिग्धों की प्रोफाइलिंग की। आखिरकार, पुलिस आरोपी तक पहुँचने में सफल रही।
आरोपी की पहचान कंगकन नाथ S/o उत्पल नाथ, निवासी 2 नंबर दौलाशाला, थाना मुकलमुआ, रामपुर, नलबाड़ी, असम, आयु 31 वर्ष के रूप में हुई।
गिरफ्तारी और पूछताछ
जब पुलिस ने कंगकन नाथ को गिरफ्तार किया और उससे पूछताछ की, तो शुरुआत में उसने अपना जुर्म नकार दिया। लेकिन जब उसके सामने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी सबूत रखे गए तो वह टूट गया और अपराध स्वीकार कर लिया।
पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसका मानसिक संतुलन विचलित था और उसे यौन संतुष्टि के लिए युवा लड़कियों को छूना या उनके साथ छेड़छाड़ करना पसंद था। यह विकृत मानसिकता उसे अपराध की ओर ले गई।

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आरोपी का पेशेवर जीवन : सिक्योरिटी गार्ड से अपराधी
कंगकन नाथ एक सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करता था। उसका काम था लोगों और संपत्ति की सुरक्षा करना। लेकिन विडंबना यह रही कि वही रक्षक महिलाओं के लिए खतरा बन गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि अपराध में प्रयुक्त स्कूटी DL 8S NA 9933 उसके नियोक्ता की थी। घटना के समय पहने गए कपड़े भी बरामद किए गए और सीसीटीवी फुटेज से मिलान कराए गए।
जब नियोक्ता को यह जानकारी मिली कि उनका सिक्योरिटी गार्ड महिलाओं से छेड़छाड़ में लिप्त है, तो वे स्तब्ध रह गए।
समाज के लिए सबक
यह मामला कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है –
- क्या सुरक्षा देने वाले पेशे में कार्यरत व्यक्ति की मानसिक स्वास्थ्य की जांच नहीं होनी चाहिए?
- क्यों समाज में महिलाएँ छेड़छाड़ या यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से डरती हैं?
- क्या सामाजिक कलंक और शर्मिंदगी का बोझ केवल पीड़िता पर ही होना चाहिए?
महिला सुरक्षा पर पुलिस का संदेश
उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस ने इस केस के जरिए यह संदेश दिया है कि चाहे अपराधी कितना भी चालाक क्यों न हो, कानून के शिकंजे से बचना असंभव है।

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पुलिस ने उन महिलाओं को भी प्रोत्साहित किया है कि वे बिना किसी डर या हिचकिचाहट के अपनी शिकायत दर्ज कराएँ। महिला सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर अपराधी को उसके अपराध का दंड अवश्य मिलेगा।
अभियुक्त का विवरण
- नाम – कंगकन नाथ
- पिता का नाम – उत्पल नाथ
- पता – 2 नंबर दौलाशाला, थाना मुकलमुआ, रामपुर, नलबाड़ी, असम
- आयु – 31 वर्ष
- पेशा – सिक्योरिटी गार्ड
“रक्षक से अपराधी तक” का यह मामला हमें याद दिलाता है कि अपराध कहीं भी, कभी भी और किसी भी व्यक्ति से हो सकता है। पेशेवर पहचान हमेशा वास्तविक चरित्र की गारंटी नहीं होती।
उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस की यह सफलता न केवल पेशेवर कार्यशैली का उदाहरण है, बल्कि समाज के लिए एक सीख भी है कि महिलाएँ अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आएँ और अपराधियों को बेनकाब करें।
(भीष्म सिंह, आईपीएस)
उपायुक्त पुलिस, उत्तर-पश्चिम जिला, दिल्ली