
Delhi Police Operation: Mobile Theft Network with Links to Nepal Exposed
दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई: चोरी के मोबाइल सप्लायरों के इंटर-स्टेट गैंग का भंडाफोड़, 224 मोबाइल बरामद
प्रस्तावना
दिल्ली पुलिस की नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ ने एक बार फिर संगठित अपराध के खिलाफ अपनी सक्रियता का सबूत पेश किया है। 17 सितंबर 2025 को जारी प्रेस रिलीज़ के अनुसार, पुलिस ने चोरी और स्नैचिंग के मोबाइल फोन खरीदकर उन्हें नेपाल में सप्लाई करने वाले एक इंटर-स्टेट गैंग का भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन में कुल 224 चोरी के मोबाइल फोन बरामद हुए हैं, साथ ही बिहार और दिल्ली से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
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इस गैंग की खासियत यह थी कि यह स्नैचर्स और पिकपॉकेट्स से कम दामों पर चोरी के मोबाइल खरीदते, फिर उन्हें दिल्ली के आज़ाद मार्केट और गफ्फार मार्केट की मोबाइल दुकानों में अनलॉक कराकर नेपाल भेजते थे। वहां इनकी अच्छी कीमत मिलती थी। लेकिन हाल ही में नेपाल में Gen Z uprising के बाद सरकार गिरने और हालात बिगड़ने की वजह से यह खेप कुछ दिनों तक दिल्ली में ही रोकी गई, जिसके चलते पुलिस को सफलता मिली।
ऑपरेशन की रणनीति और शुरुआत
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर स्पेशल स्टाफ की टीम को चोरी और स्नैचिंग के मोबाइल की खरीद-फरोख्त रोकने और बरामद मोबाइल सही मालिकों तक पहुँचाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इस दिशा में इंस्पेक्टर रोहित सरस्वत (इंचार्ज स्पेशल स्टाफ) के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम में SI मनोज, SI प्रवीण, ASI यतेन्द्र, HC परवीन, HC गुरविंदर, HC बलकिशन, HC संदीप, कॉन्स्टेबल सचिन, कॉन्स्टेबल रवि, कॉन्स्टेबल नितिन और DHG नरेश शामिल थे। पूरी कार्रवाई ACP हेमंत कुमार मिश्रा (ऑपरेशन्स सेल, नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट) की निगरानी में हुई।
खुफिया जानकारी
टीम ने अपने गुप्त सूत्र सक्रिय किए और स्थानीय स्तर पर जानकारी इकट्ठा की। इसी दौरान कॉन्स्टेबल सचिन को सूचना मिली कि कुछ लोग Pul Mithai रेलवे ट्रैक, DRP लाइन के आसपास स्नैचर्स और पिकपॉकेट्स से चोरी के मोबाइल खरीदते हैं और फिर इन्हें नेपाल भेजते हैं।

Delhi Police Recovers 224 Phones | Gang Sold Stolen Mobiles in Nepal
सफलता की शुरुआत
सूचना पर काम करते हुए पता चला कि 12 सितंबर को दो लड़के – बृंदावन और मुकेश आनंद विहार रेलवे स्टेशन से मुङ्गेर (बिहार) जाने वाली ट्रेन में बड़ी संख्या में चोरी के मोबाइल लेकर चढ़ने वाले हैं। टीम ने तत्काल जाल बिछाया और दोनों को स्टेशन से ही दबोच लिया। उनके पास से 98 चोरी के मोबाइल फोन बरामद हुए।
बरामद मोबाइल और पीड़ितों की पहचान
जब बरामद मोबाइल फोनों के IMEI नंबर चोरी/स्नैचिंग के डेटाबेस से मिलाए गए तो यह स्पष्ट हुआ कि कई फोन दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में चोरी या छीने गए थे।
दिल्ली पुलिस ने इन मोबाइल के आखिरी यूजर्स से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि उनके फोन चोरी हो गए थे और चोरी के तुरंत बाद UPI के माध्यम से उनके अकाउंट से पैसे भी निकाले गए थे। यह एक बड़ा खुलासा था, जिसने इस गिरोह की अपराधी गतिविधियों को और गंभीर बना दिया।
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आरोपियों से पूछताछ
बृंदावन और मुकेश
पूछताछ में दोनों ने बताया कि:
- वे स्नैचर्स और पिकपॉकेट्स से मोबाइल कम कीमत पर खरीदते थे।
- चोरी के मोबाइल के लॉक पैटर्न तोड़ने के लिए उन्हें दिल्ली के आजाद मार्केट और गफ्फार मार्केट ले जाते थे।
- लॉक खुलने के बाद इन मोबाइल को मुङ्गेर (बिहार) के रास्ते नेपाल भेजते थे।
- वहां अच्छे दाम मिलने से इन्हें भारी मुनाफा होता था।
उन्होंने आगे बताया कि नेपाल में हाल ही में Gen Z आंदोलन के चलते सरकार गिरने और हालात बिगड़ने से स्थिति अस्थिर थी। इसी वजह से वे मोबाइल दिल्ली में ही रोककर बैठे थे और 12 सितंबर को जब वे अंततः निकलने की कोशिश कर रहे थे, तभी पुलिस ने पकड़ लिया।
गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी
विक्की कुमार – मोबाइल रिपेयर शॉप, आज़ाद मार्केट
बृंदावन और मुकेश के खुलासे पर पुलिस ने विक्की कुमार (निवासी सीतामढ़ी, बिहार) को पकड़ा। वह आज़ाद मार्केट में मोबाइल रिपेयर की दुकान चलाता था और चोरी के मोबाइल अनलॉक करता था। उसकी दुकान से 38 मोबाइल बरामद हुए।
विकास पांडे – मोबाइल रिपेयर शॉप, गफ्फार मार्केट
विक्की कुमार ने बताया कि जो फोन वह अनलॉक नहीं कर पाता, उन्हें विकास पांडे (निवासी अशोक नगर, दिल्ली) के पास भेज देता। विकास की गफ्फार मार्केट स्थित दुकान से 66 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद हुआ। लैपटॉप का इस्तेमाल मोबाइल अनलॉकिंग के लिए होता था।
विक्की बिन्द – रिसीवर, DRP लाइन
जांच के दौरान एक और आरोपी विक्की बिन्द को भी गिरफ्तार किया गया। वह DRP लाइन, दिल्ली में झुग्गी में रहता था और चोरी के मोबाइल रिसीव करता था। उसके पास से 22 मोबाइल फोन बरामद हुए।

UPI Fraud & Mobile Theft Nexus Exposed | Delhi Police Arrests 5 Accused
आरोपियों का प्रोफाइल
- बृंदावन (23 वर्ष, मुङ्गेर, बिहार) – स्कूल छोड़ चुका, चोरी के मोबाइल खरीदकर नेपाल सप्लाई करता था।
- मुकेश कुमार (21 वर्ष, मुङ्गेर, बिहार) – 10वीं तक पढ़ा, बृंदावन का सहयोगी।
- विक्की बिन्द (20 वर्ष, मुङ्गेर/दिल्ली) – स्कूल ड्रॉपआउट, रिसीवर के तौर पर काम करता था।
- विक्की कुमार (25 वर्ष, सीतामढ़ी, बिहार) – 12वीं पास, आजाद मार्केट में मोबाइल रिपेयर शॉप चलाता था।
- विकास पांडे (24 वर्ष, दिल्ली) – ग्रेजुएट, गफ्फार मार्केट में मोबाइल रिपेयर शॉप चलाता था।
पुलिस की अब तक की बरामदगी
- 224 मोबाइल फोन (जिनमें से 14 पहले ही दर्ज मामलों से जुड़े पाए गए, बाकी की जांच जारी है)।
- एक लैपटॉप – जिसे मोबाइल फोन अनलॉक करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
दर्ज मामले और गैंग का नेटवर्क
बरामद मोबाइल फोन कई FIRs और e-FIRs से जुड़े पाए गए हैं। इनमें वजीराबाद, सिविल लाइंस, तिमारपुर, बुराड़ी, सराय रोहिल्ला आदि थानों के केस शामिल हैं।
गिरोह का नेटवर्क इतना फैला हुआ था कि दिल्ली से चोरी हुए मोबाइल सीधे नेपाल तक पहुंचाए जा रहे थे।
इस ऑपरेशन का महत्व
- सड़क अपराधों पर रोक – स्नैचिंग और पिकपॉकेटिंग के पीछे का असली नेटवर्क पुलिस ने तोड़ा।
- आर्थिक अपराध का खुलासा – चोरी के मोबाइल से UPI के जरिए पैसों की निकासी का बड़ा रैकेट उजागर हुआ।
- इंटर-स्टेट और इंटरनेशनल लिंक – यह केस केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि बिहार और नेपाल तक फैला था।
- तकनीकी सबूत – मोबाइल अनलॉकिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले लैपटॉप और दुकानों के डिजिटल डेटा से और खुलासे होने की संभावना है।
- जनता का भरोसा – चोरी के मोबाइल वापस मालिकों तक पहुँचाना जनता और पुलिस के बीच विश्वास बढ़ाएगा।
दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई सिर्फ एक गैंग पकड़ने की सफलता नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि सड़क अपराध और चोरी की जड़ तक पहुँचने की क्षमता पुलिस के पास है।

Inter-State Mobile Theft Racket Crushed by Delhi Police | International Links Found
224 मोबाइल की बरामदगी, पाँच आरोपियों की गिरफ्तारी और नेपाल तक फैले नेटवर्क के खुलासे ने एक बार फिर दिखा दिया है कि पुलिस अगर संगठित तरीके से काम करे तो बड़े से बड़ा अपराध भी पकड़ा जा सकता है।
यह ऑपरेशन आने वाले समय में दिल्ली पुलिस की उन रणनीतियों के लिए आधार बनेगा, जिनमें तकनीक, खुफिया तंत्र और त्वरित कार्रवाई तीनों का संयोजन होगा। इससे न केवल अपराधियों का मनोबल टूटेगा, बल्कि जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।