
डूसू चुनाव 2025: 52 कॉलेजों में मतदान, 2.75 लाख छात्र देंगे अपना वोट”
डूसू चुनाव 2025: दिल्ली विश्वविद्यालय में लोकतंत्र का महापर्व, 52 कॉलेजों में मतदान और 2.75 लाख छात्र करेंगे नेतृत्व का चयन
डिजिटल डेस्क, पूर्वी दिल्ली। 19 सितंबर 2025
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2025 आज राजधानी के राजनीतिक और शैक्षणिक परिदृश्य का सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है। यह चुनाव केवल छात्रों की आवाज़ का मंच ही नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की भविष्य की दिशा का भी संकेत माना जाता है।
आज विश्वविद्यालय और उसके 52 कॉलेजों में करीब 2.75 लाख छात्र-छात्राएँ अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। सुबह से ही कैंपस और कॉलेजों में गहमागहमी का माहौल है। हालांकि, इस बार का चुनाव अपने सख्त नियमों, हाईकोर्ट की निगरानी, और प्रशासनिक बंदिशों के कारण पहले से अलग दिखाई दे रहा है।
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✦ डूसू चुनाव का महत्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
डूसू चुनाव केवल छात्र राजनीति तक सीमित नहीं रहते। इन चुनावों से राष्ट्रीय राजनीति का सीधा रिश्ता जुड़ा है। अतीत में डूसू से जुड़े कई नेताओं ने भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण पदों तक अपनी जगह बनाई है।
- अरुण जेटली, अजय माकन, विजय गोयल, सुब्रहमण्यम स्वामी और अन्य कई नाम ऐसे हैं जो डूसू से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में चमके।
- यही कारण है कि हर साल डूसू चुनाव को देश भर में खास नजरों से देखा जाता है।
- राजनीतिक दल भी इन चुनावों को अपने भविष्य के लिए संकेतक मानते हैं।
2025 का चुनाव इस मायने में भी खास है कि चार मुख्य पदों—अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—के लिए इस बार 21 उम्मीदवार मैदान में हैं।
✦ मतदान प्रक्रिया और तकनीकी बदलाव
आज सुबह 8:30 बजे से मतदान शुरू हुआ और शाम 7:30 बजे तक चलेगा।
- सेंट्रल पैनल के लिए मतदान ईवीएम (EVM) से हो रहा है।
- कॉलेज काउंसलर पदों के लिए अब भी बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
आंकड़े भी खास हैं:

“दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2025: 21 उम्मीदवार मैदान में, सुरक्षा कड़ी
लगभग 700 ईवीएम का इस्तेमाल।
780 बैलेट बूथ कॉलेज काउंसलर चुनावों के लिए।
कुल मिलाकर 195 पोलिंग बूथ केवल ईवीएम के लिए और 780 बैलेट बूथ बैलेट पेपर के लिए।
हर 1000 छात्रों पर औसतन एक ईवीएम उपलब्ध कराई गई है।
बड़े कॉलेजों जैसे कि हंसराज, किरोरीमल और रामजस में सात तक ईवीएम लगाई गई हैं।
✦ सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
इस बार सुरक्षा को लेकर प्रशासन बेहद सख्त है।
- दिल्ली पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने मिलकर हर कॉलेज और नॉर्थ कैंपस में सुरक्षा बल तैनात किए हैं।
- प्रवेश द्वार पर छात्रों के आईडी कार्ड की कड़ी जांच हो रही है।
- बिना पहचान पत्र के प्रवेश पर पूरी तरह रोक।
- सबसे बड़ा बदलाव है मोबाइल फोन पर प्रतिबंध।
यह कदम विवाद का कारण भी बना है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि पिछले चुनावों में मोबाइल से फर्जी मतदान और गड़बड़ी की शिकायतें आई थीं। इस बार पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्ती बरती जा रही है।
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✦ उत्साह की कमी और खाली बूथ
डूसू चुनाव का माहौल हमेशा से नारों, पोस्टरों और रंग-बिरंगे प्रचार से गूँजता रहा है। लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी बदली हुई दिख रही है।
- कई कॉलेजों, खासकर श्याम लाल कॉलेज जैसे केंद्रों पर सुबह मतदान केंद्र लगभग खाली नज़र आए।
- छात्रों का कहना है कि अत्यधिक सुरक्षा और मोबाइल प्रतिबंध ने चुनावी माहौल का जोश ठंडा कर दिया है।
एक छात्र ने कहा:
“पहले चुनाव का दिन त्यौहार जैसा लगता था। इस बार पुलिस की मौजूदगी और पाबंदियों ने सब कुछ दबावपूर्ण बना दिया है।”

“दिल्ली विश्वविद्यालय डूसू चुनाव: छात्रों की प्राथमिकता भ्रष्टाचार और सुविधाएँ
✦ नॉर्थ कैंपस की धड़कन
नॉर्थ कैंपस हमेशा से डूसू चुनाव का केंद्र रहा है।
- आर्ट्स फैकल्टी और रामजस कॉलेज के बाहर सुबह से ही छात्रों की लंबी कतारें लगीं।
- यहाँ अब भी नारों और जोशीले माहौल की झलक देखने को मिली।
- हालांकि, केवल लॉ सेंटर के छात्रों को प्रवेश की अनुमति दिए जाने पर कई विभागों के छात्र नाराज़ नज़र आए।
माहौल को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात किया।
✦ छात्रों की प्राथमिकताएँ और मुद्देडूसू चुनाव में हर बार स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों का संगम होता है। इस बार छात्रों की राय में ये मुद्दे सबसे अहम हैं:
- भ्रष्टाचार और पारदर्शिता – कई छात्रों का कहना है कि प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करना ज़रूरी है।
- बुनियादी सुविधाएँ – हॉस्टल, लाइब्रेरी, पीने का पानी और इंटरनेट जैसी सुविधाएँ अब भी बड़ी समस्या हैं।
- महिला सुरक्षा – छात्राओं ने कहा कि कैंपस और हॉस्टल क्षेत्रों में सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- राष्ट्रीय राजनीति का प्रभाव – एबीवीपी और एनएसयूआई जैसी इकाइयाँ इस बार भी चुनाव को राष्ट्रीय रंग देती नज़र आ रही हैं।
✦ हाईकोर्ट के आदेश और प्रशासन की भूमिकादिल्ली हाईकोर्ट ने इस बार स्पष्ट निर्देश दिए थे कि चुनावों में किसी तरह की हिंसा, गड़बड़ी या अनुशासनहीनता नहीं होनी चाहिए।
- इसी आदेश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मोबाइल प्रतिबंध, कड़ी चेकिंग और अतिरिक्त पुलिस बल जैसे कदम उठाए।
- प्रशासन का तर्क है कि इससे चुनाव निष्पक्ष और विवादमुक्त रहेंगे।
✦ ग्राउंड रिपोर्ट: छात्रों की आवाज़
कैंपस से छात्रों की प्रतिक्रियाएँ भी मिलीं:

“डूसू चुनाव 2025: मोबाइल बैन और पुलिस तैनाती से ठंडा पड़ा माहौल
प्रियांशु, तीसरे वर्ष का छात्र:
“मैं पहली बार वोट डाल रहा हूँ। माहौल में दबाव है लेकिन उम्मीद है कि हमारा वोट सही दिशा देगा।”
रिया, बीए छात्रा:
“मोबाइल जमा कराना बड़ी असुविधा है। चुनाव का जो मज़ा और उत्साह होना चाहिए था, वह नहीं है।”
अविनाश, एमए छात्र:
“मैंने भ्रष्टाचार और सुविधाओं की कमी के खिलाफ वोट किया है। डीयू को पारदर्शिता की ज़रूरत है।”
✦ मतगणना और आगे की राह
अब सबकी निगाहें 19 सितंबर 2025 पर टिकी हैं।
- मतगणना निर्दिष्ट केंद्र पर कड़ी सुरक्षा के बीच होगी।
- शुरुआती घंटों में रुझान आने लगेंगे।
- दोपहर तक नतीजे घोषित होने की संभावना है।
इन नतीजों से यह तय होगा कि युवाओं का रुझान किस ओर है और राष्ट्रीय राजनीति में छात्र राजनीति का भविष्य किस दिशा में बढ़ेगा।

नॉर्थ कैंपस में डूसू चुनाव की गहमागहमी, छात्रों की लंबी कता
डूसू चुनाव 2025 कई मायनों में ऐतिहासिक हैं।
- सबसे बड़ी मतदाता संख्या—2.75 लाख छात्र।
- चार प्रमुख पदों पर 21 उम्मीदवार।
- हाईकोर्ट की निगरानी और कड़ी सुरक्षा।
- ईवीएम और बैलेट पेपर का मिश्रण।
- छात्रों का उत्साह कुछ कम, लेकिन मुद्दों पर जागरूकता ज्यादा।
जहाँ प्रशासन का फोकस निष्पक्षता और अनुशासन पर है, वहीं छात्रों का मानना है कि सख्ती ने चुनावी माहौल का जोश ठंडा कर दिया।
अब देखना यह है कि परिणाम किस दिशा की ओर इशारा करेंगे और क्या इस बार भी डूसू राजनीति से निकलकर कुछ नए चेहरे राष्ट्रीय राजनीति का भविष्य बनेंगे।