
एनसीबी हरियाणा का नशामुक्ति अभियान: साइकिल यात्रा और लोटा-नमक शपथ बनी चर्चा का केंद्र”
हरियाणा में नशामुक्ति आंदोलन तेज, साइकिल यात्रा और लोटा-नमक बने प्रेरणा”
एनसीबी हरियाणा की अनोखी पहल: साइकिल यात्रा और ‘लोटा नमक अभियान’ बने नशामुक्ति आंदोलन का प्रतीक
बल्लबगढ़/फरीदाबाद।
हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) लगातार नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए अभियान चला रहा है। ब्यूरो का मानना है कि नशा सिर्फ एक अपराध या स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने वाला जहर है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए एनसीबी हरियाणा ने हाल ही में साइकिल यात्रा और लोटा-नमक अभियान की शुरुआत की, जिसने बल्लबगढ़ और फरीदाबाद क्षेत्र में लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
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इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें परंपरा, संस्कृति और सामाजिक संदेश को इस तरह जोड़ा गया है कि लोग न सिर्फ समझें, बल्कि भावनात्मक रूप से जुड़कर खुद नशामुक्ति की शपथ भी लें।
✦ अभियान की पृष्ठभूमि और नेतृत्व
यह अभियान हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह (भापुसे) के निर्देशों पर चलाया गया। उनके मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र सिंह भौरिया और मोहित हांडा (भापुसे) ने इस पहल को साकार करने में अहम भूमिका निभाई।
अभियान का संचालन ब्यूरो के पुलिस उपाधीक्षक गजेंद्र सिंह की देखरेख में हुआ। वहीं ब्यूरो के जागरूकता कार्यक्रम एवं पुनर्वास प्रभारी उप-निरीक्षक डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने साइकिल यात्रा निकालकर इस संदेश को और आगे बढ़ाया।

नशे के दुष्परिणामों पर जागरूक हुए चालक प्रशिक्षु, ली नशामुक्ति की शपथ
यह यात्रा फरीदाबाद से बल्लबगढ़ होते हुए सिकरी तक निकाली गई। रास्ते भर लोगों को नशे के खतरों से आगाह किया गया और उन्हें अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।
✦ साइकिल यात्रा: स्वास्थ्य और संदेश का अनोखा संगम
साइकिल यात्रा नशामुक्ति का प्रतीक बनी। इसका मकसद यही दिखाना था कि यदि युवा अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाएँ तो वे स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।
- यात्रा के दौरान राहगीरों और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद किया गया।
- नारे और पोस्टरों के जरिए “नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो” और “स्वस्थ युवा, सशक्त भारत” जैसे संदेश दिए गए।
- कई जगह लोगों ने स्वयं आगे आकर यात्रा में शामिल होने की इच्छा जताई।
साइकिल यात्रा यह बताने का माध्यम बनी कि नशे से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है—स्वस्थ जीवनशैली अपनाना।
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✦ लोटा-नमक अभियान: प्रतीकात्मक शपथ
इस अभियान का सबसे आकर्षक पहलू रहा लोटे में नमक डालकर शपथ लेना।
बल्लबगढ़ बस अड्डे पर हुए इस कार्यक्रम में युवाओं ने हाथ में नमक लेकर लोटे में डालते हुए यह शपथ ली कि वे न तो नशा करेंगे और न ही दूसरों को करने देंगे।
नमक का महत्व क्यों?
भारतीय संस्कृति में नमक को पवित्रता, वचन और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। किसी बात पर “नमक की कसम” खाई जाती है, तो उसका मतलब होता है कि वह वचन तोड़ना पाप है। इसी सांस्कृतिक प्रतीक को जोड़कर यह अभियान और भी प्रभावी बना दिया गया।
✦ बस अड्डे पर जागरूकता कार्यक्रम
साइकिल यात्रा के बाद बल्लबगढ़ बस अड्डे पर चालक प्रशिक्षण केंद्र में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
- इसमें करीब 25 चालक प्रशिक्षुओं ने हिस्सा लिया।
- कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्र प्रभारी मनोज यादव ने की।
- डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने प्रशिक्षुओं को नशे के दुष्परिणाम समझाए।
उन्होंने बताया कि नशा सिर्फ शरीर को ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज को भी तोड़ देता है। एक बार लत लगने पर इंसान अपनी जिम्मेदारियाँ भूल जाता है, जिससे दुर्घटनाएँ, अपराध और पारिवारिक कलह जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं।

“एनसीबी हरियाणा का अभियान: युवाओं ने कहा—नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो”
✦ गुप्त सूचना के लिए हेल्पलाइन नंबर
कार्यक्रम के दौरान लोगों को बताया गया कि वे नशे से संबंधित किसी भी तरह की सूचना गुप्त रूप से 1933 नंबर पर दे सकते हैं।
- इस हेल्पलाइन का मकसद है कि लोग बिना डर और संकोच के पुलिस को नशा तस्करों और आपराधिक गतिविधियों के बारे में जानकारी दें।
- यह नंबर लोगों में विश्वास पैदा करता है कि उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।
✦ शपथ ग्रहण समारोह
कार्यक्रम के बीच में सभी प्रतिभागियों से नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई।
- युवाओं ने हाथ उठाकर कहा कि वे खुद नशे से दूर रहेंगे।
- साथ ही, वे अपने दोस्तों, परिवार और समाज को भी नशे से दूर रखने की कोशिश करेंगे।
इस मौके पर मौजूद युवाओं ने कहा कि यह अभियान उन्हें अंदर से छू गया है और वे इसे अपने जीवन में उतारेंगे।
✦ युवाओं की भूमिका और प्रतिक्रियाएँ
कार्यक्रम के दौरान कई युवाओं ने खुलकर अपनी राय रखी।
रोहित (प्रशिक्षु चालक):
“मैंने कभी नशा नहीं किया, लेकिन इस अभियान ने मुझे यह जिम्मेदारी दी है कि मैं दूसरों को भी रोकूँ।”
सुमन (स्थानीय छात्रा):
“लोटा-नमक अभियान बहुत अनोखा है। इस तरह की शपथ ज्यादा असर करती है। अब मुझे लगता है कि हमें खुद आगे बढ़कर ऐसे अभियानों को सपोर्ट करना चाहिए।”
विनोद (युवा प्रतिभागी):
“साइकिल यात्रा ने मुझे बहुत प्रेरित किया। यह दिखाता है कि बिना नशे के भी जीवन में जोश और ऊर्जा बनी रहती है।”
✦ नशे की समस्या: हरियाणा और देश का परिदृश्य
हरियाणा सहित देश के कई हिस्सों में नशा एक गंभीर चुनौती बन चुका है।
- पंजाब और हरियाणा सीमा क्षेत्र लंबे समय से ड्रग्स की तस्करी का हॉटस्पॉट रहे हैं।
- युवाओं में बेरोजगारी और गलत संगत नशे की सबसे बड़ी वजह बनते हैं।
- आँकड़े बताते हैं कि हरियाणा में हर साल हजारों मामले नशे से जुड़े अपराधों और स्वास्थ्य समस्याओं के दर्ज होते हैं।
नशा न सिर्फ स्वास्थ्य को बर्बाद करता है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं, अपराध और पारिवारिक विघटन की जड़ भी है।
✦ एनसीबी की रणनीति और समाज की भूमिका
एनसीबी का मानना है कि नशे से लड़ाई सिर्फ कानून और पुलिस के बूते नहीं लड़ी जा सकती। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

- साइकिल यात्रा से फैला नशामुक्ति का संदेश: एनसीबी हरियाणा की अनोखी पहल”
- स्कूलों और कॉलेजों में लगातार जागरूकता अभियान चलाना।
- धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों को नशामुक्ति आंदोलन से जोड़ना।
- परिवारों को यह समझाना कि शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देकर बच्चों को सही दिशा में ले जाना उनकी जिम्मेदारी है।
✦ अभियान का असर और भविष्य की राह
इस अभियान ने बल्लबगढ़ और फरीदाबाद में एक मजबूत संदेश छोड़ा है।
- युवाओं में नशा छोड़ने और न अपनाने का संकल्प दिखाई दिया।
- स्थानीय लोगों ने इसे एक आंदोलन के रूप में अपनाने की इच्छा जताई।
- आने वाले समय में एनसीबी इसे हर जिले और गाँव तक पहुँचाने की योजना बना रहा है।
लोटा-नमक जैसे अभियान गाँव-गाँव में चलाए जाएँ, तो नशा छोड़ने की सामाजिक परंपरा भी विकसित हो सकती है।
✦ निष्कर्ष
एनसीबी हरियाणा का यह अभियान सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और आत्मचिंतन करने की एक पहल है। साइकिल यात्रा ने यह दिखाया कि जीवन को स्वस्थ और सक्रिय कैसे रखा जा सकता है, वहीं लोटा-नमक शपथ ने लोगों को भावनात्मक रूप से इस आंदोलन से जोड़ दिया।
नशे से मुक्त हरियाणा और भारत का सपना तभी पूरा होगा जब हर नागरिक खुद पहल करेगा और “नशा न करने” की शपथ को जीवन का हिस्सा बनाएगा।