
Overseas Job Scam in Delhi: Delhi Cyber Police ने गिरोह का किया भंडाफोड़
Delhi Cyber Police स्टेशन नॉर्थ की बड़ी कामयाबी: विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह धर दबोचा
नई दिल्ली, 19 सितम्बर 2025।
Cyber Police दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर संगठित साइबर अपराध पर सख़्त कार्रवाई करते हुए एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो बेरोजगार युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करता था। इस गिरोह ने अब तक कई लोगों को अपना शिकार बनाया, लेकिन साइबर पुलिस स्टेशन, नॉर्थ जिले की टीम ने तीन दिन तक लगातार चले ऑपरेशन के बाद इसके मास्टरमाइंड और उसकी महिला साथी को गिरफ्तार कर लिया।
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शिकायत से शुरुआत
यह पूरा मामला तब सामने आया जब लक्ष्मी विहार, बुराड़ी निवासी 40 वर्षीय धर्मेंद्र नामक एक व्यक्ति ने साइबर पुलिस स्टेशन, नॉर्थ में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई।
धर्मेंद्र ने बताया कि उन्होंने हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म मैनेजमेंट का कोर्स सिंगापुर से पूरा किया था और बेहतर भविष्य के लिए विदेश में नौकरी तलाश रहे थे। इसी दौरान उन्होंने रोजगार से जुड़े कई व्हाट्सऐप ग्रुप्स जॉइन किए। उनमें से एक ग्रुप “Work Information” था, जहां उन्होंने नौकरी की तलाश का संदेश पोस्ट किया।
कुछ ही समय बाद उन्हें एक व्यक्ति का मैसेज आया, जिसने खुद को मयंक पांडे बताया। उसने दावा किया कि वह वियतनाम के रास्ते उन्हें ऑस्ट्रेलिया में नौकरी और वीज़ा दिला सकता है। धर्मेंद्र को लुभाने के लिए उसने एक और व्हाट्सऐप नंबर +601173237535 भी साझा किया।

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ठगी का सिलसिला
आरोपी ने शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए धर्मेंद्र से ₹10,000 वियतनाम वीज़ा के नाम पर मंगवाए। वीज़ा मिलने के बाद धर्मेंद्र वियतनाम पहुँच गए। वहां आरोपी ने और ₹26,000 मांगे और आश्वासन दिया कि इससे ऑस्ट्रेलिया वीज़ा की प्रक्रिया तेज़ होगी।
फिर आरोपी ने एक नई शर्त रखी – ऑस्ट्रेलिया वीज़ा पाने के लिए धर्मेंद्र के खाते में 3,000 USDT (क्रिप्टोकरेंसी) बैलेंस दिखाना होगा। धर्मेंद्र के पास USDT नहीं था, तो आरोपी ने कहा कि वह उसके पैसे से यह व्यवस्था कर देगा। इस भरोसे में धर्मेंद्र ने ₹3,12,000/- आरोपी द्वारा बताए गए खातों में जमा कर दिए।
लेकिन पैसे मिलते ही आरोपी ने न तो वीज़ा दिया और न ही रकम वापस की। इसके बजाय उसने धर्मेंद्र को ब्लॉक कर दिया।
पुलिस ने दर्ज किया केस
धर्मेंद्र की शिकायत पर साइबर पुलिस स्टेशन, नॉर्थ ने FIR No. 50/25, दिनांक 06.09.2025, धारा 318(4) BNS के तहत मामला दर्ज किया। केस की गंभीरता को देखते हुए SI अरविंद यादव के नेतृत्व में HC हिमांशु और Ct. रवि की टीम बनाई गई। टीम की निगरानी SHO/साइबर थाने इंस्पेक्टर रोहित गहलोत और एसीपी ऑपरेशंस श्री हेमंत कुमार मिश्रा कर रहे थे।
तकनीकी जांच और खुफिया सुराग
पुलिस टीम ने मामले की तहकीकात तकनीकी स्तर पर शुरू की।
- व्हाट्सऐप चैट, गूगल LERS, IP लॉग्स, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर खंगाले गए।
- करीब 50 मोबाइल नंबर और IMEI की जांच की गई।
- बैंक खातों की मनी ट्रेल खंगाली गई।
- Flipkart और अन्य प्लेटफॉर्म्स से एक्सेस डिटेल्स जुटाई गईं।
लगातार पीछा करने पर पुलिस को आरोपियों का लोकेशन एटा, उत्तर प्रदेश में मिला।

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1000 किलोमीटर का सफर और छापेमारी
साइबर पुलिस टीम ने तीन दिन लगातार यूपी के अलग-अलग इलाकों में छापेमारी की। लगभग 1000 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद आखिरकार 11 सितम्बर 2025 को एटा से सहदेव सिंह (37 वर्ष) को दबोच लिया गया।
पूछताछ में सहदेव ने अपनी महिला साथी का नाम उगला — नीरज (पत्नी जयप्रकाश उर्फ़ योगेंद्र, निवासी पिलुआ, जिला एटा, यूपी, उम्र 37 वर्ष)। सहदेव के इशारे पर पुलिस ने नीरज को भी गिरफ्तार कर लिया।
बैंक खाते और रकम जब्त
पुलिस ने आरोपियों के खातों को फ्रीज़ कर दिया है।
- शिकायतकर्ता की राशि ₹78,920/- विभिन्न खातों में Hold/Lien के तौर पर मार्क की गई।
- आरोपियों से 02 मोबाइल फोन, 03 पासबुक, 03 चेकबुक, 02 डेबिट कार्ड, 05 भारतीय सिम कार्ड और 03 वियतनाम सिम कार्ड बरामद किए गए।
पूछताछ में खुलासा
सहदेव सिंह ने पूछताछ में बताया:
- वह कई बार विदेश जाकर नौकरी की तलाश कर चुका था, लेकिन असफल रहा।
- इसी दौरान उसकी मुलाकात वियतनाम में एक एजेंट विजय से हुई, जो फर्जी नौकरी और वीज़ा के नाम पर लोगों से ठगी करता था।
- सहदेव ने व्हाट्सऐप पर कई ग्रुप जॉइन किए और उनमें नौकरी के विज्ञापन डालने लगा।
- वह खुद को कभी मयंक पांडे, कभी राहुल कुमार, तो कभी अजय यादव बताता।
- पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए वह पहले वियतनाम वीज़ा दिलाता और फिर लाखों रुपये मांगकर ग़ायब हो जाता।
नीरज के बैंक अकाउंट का इस्तेमाल वह मनी ट्रेल छुपाने के लिए करता।
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गिरोह का तरीका (Modus Operandi)
- व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप्स के ज़रिए लोगों को फँसाना।
- शुरुआती स्तर पर वीज़ा दिलाकर विश्वास कायम करना।
- फिर भारी रकम वीज़ा, वर्क परमिट या USDT बैलेंस दिखाने के नाम पर ऐंठना।
- रकम मिलने के बाद पीड़ित को ब्लॉक कर देना।
- पहचान छुपाने के लिए विदेशी मोबाइल नंबर और अलग-अलग नामों का इस्तेमाल।
गिरफ्तार आरोपी
- सहदेव सिंह
- उम्र: 37 वर्ष
- निवासी: नगला गालू, थाना कोतवाली देहात, जिला एटा, यूपी
- शिक्षा: 10वीं पास
- पिछले दो साल से गिरोह चला रहा था।
- नीरज
- उम्र: 37 वर्ष
- निवासी: पिलुआ, जिला एटा, यूपी
- स्कूल ड्रॉपआउट
- उसके बैंक अकाउंट में ठगी की रकम डाली जाती थी।
पुलिस अधिकारियों का बयान
डीसीपी नॉर्थ, राजा बंथिया (IPS) ने कहा:
“यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ दिल्ली पुलिस की प्रतिबद्धता का सबूत है। बेरोजगार युवाओं को विदेश नौकरी के नाम पर फँसाने वाले गिरोह को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”

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सामाजिक असर और चेतावनी
यह मामला सिर्फ एक ठगी का नहीं बल्कि समाज के लिए चेतावनी है।
- बेरोजगार युवा झूठे वादों के शिकार हो रहे हैं।
- सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक है।
- विदेश जाने से पहले हर जानकारी और एजेंसी की वैधता की जांच ज़रूरी है।
साइबर पुलिस स्टेशन, नॉर्थ की इस बड़ी सफलता ने एक बार फिर दिखा दिया कि ठग चाहे कितने भी चालाक क्यों न हों, कानून की पकड़ से बच नहीं सकते। सहदेव सिंह और नीरज की गिरफ्तारी से उम्मीद है कि इस तरह के और फर्जी नेटवर्क का पर्दाफाश होगा और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।