
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल का कामयाब ऑपरेशन: फर्जी ट्रेडिंग ऐप गिरोह का भंडाफाश
फर्जी ट्रेडिंग ऐप घोटाले का पर्दाफाश — दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने गुजरात से दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की आउटर नॉर्थ जिला साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग ऐप बनाकर लोगों को निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए का चूना लगा रहा था। पुलिस ने इस मामले में गुजरात से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अब तक की जांच में ₹11.20 लाख की ठगी का मामला सामने आया है और डिजिटल सबूत बरामद किए गए हैं। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस के लिए एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है, जिसने साइबर अपराधियों की एक नई रणनीति को उजागर किया है
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शिकायत और घटना का खुलासा
दिनांक 13 मई 2025 को एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल पर एक शिकायत दर्ज कराई गई (Acknowledgement No. 20805250036125)। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप “Blinkxmax” के माध्यम से ₹11.20 लाख की ठगी का शिकार बनाया गया।
शिकायत के अनुसार, उसे सबसे पहले Facebook ग्रुप के ज़रिए संपर्क किया गया, जहां फर्जी मुनाफ़े के स्क्रीनशॉट दिखाए गए और 5–10% दैनिक रिटर्न का झूठा वादा किया गया। आकर्षक ऑफ़र्स और नकली कमाई के सबूतों को देखकर शिकायतकर्ता को झांसे में लिया गया और धीरे-धीरे उसे पैसे निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रारंभिक जांच के बाद इस मामले में FIR संख्या 27/2025, धारा 318(4) BNS के तहत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, आउटर नॉर्थ दिल्ली में मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।

जांच टीम का गठन और ऑपरेशन
मामले की गंभीरता को देखते हुए आउटर नॉर्थ जिला पुलिस ने एक विशेष जांच टीम गठित की। इस टीम में एसआई अमित अहलावत, हेड कॉन्स्टेबल रमन सिंह (जांच अधिकारी), हेड कॉन्स्टेबल मनदीप और हेड कॉन्स्टेबल पवन शामिल थे। टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर गोविंद सिंह (SHO, साइबर थाना आउटर नॉर्थ) कर रहे थे।
पूरे ऑपरेशन की निगरानी एसीपी ऑप्स श्री दिनेश कुमार कर रहे थे, जबकि समग्र पर्यवेक्षण डीसीपी हरेश्वर स्वामी (IPS) और नॉर्दर्न रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त विजय सिंह (IPS) के अधीन किया गया।
तकनीकी निगरानी और वित्तीय विश्लेषण
टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए तकनीकी निगरानी शुरू की। सबसे पहले उस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ऐप के डिजिटल ट्रेल को ट्रैक किया गया जिनके ज़रिए शिकायतकर्ता से संपर्क किया गया था।
पुलिस ने वित्तीय लेनदेन का गहराई से विश्लेषण किया और पाया कि ठगी की रकम कई बैंक खातों के जरिए घुमाई (layering) गई ताकि उसका असली स्रोत छिपाया जा सके। अंत में यह राशि गुजरात और महाराष्ट्र के खातों में पहुंची।
इस जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने गुजरात के सबर्कांठा जिले के गधा गांव में छापा मारा।
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गुजरात में छापा और गिरफ्तारी
पुलिस टीम ने गधा गांव में छापेमारी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान जाबिर हुसैन पुत्र उस्मानभाई (आयु 38 वर्ष) और माज़ अरोड़िया पुत्र इक़रामुलहक़ (आयु 30 वर्ष) के रूप में हुई। दोनों आरोपी गधा गांव, हिम्मतनगर, सबर्कांठा, गुजरात के निवासी हैं।
गिरफ्तारी की प्रक्रिया विधि सम्मत ढंग से पूरी की गई। दोनों को दिल्ली लाकर अदालत में पेश किया गया। प्राथमिक पूछताछ में दोनों ने फर्जी ट्रेडिंग ऐप बनाकर लोगों को ठगने की बात स्वीकार की है।
आरोपियों का विवरण
- जाबिर हुसैन पुत्र उस्मानभाई
- उम्र: 38 वर्ष
- निवासी: गधा गांव, हिम्मतनगर, सबर्कांठा, गुजरात
- माज़ अरोड़िया पुत्र इक़रामुलहक़
- उम्र: 30 वर्ष
- निवासी: गधा गांव, हिम्मतनगर, सबर्कांठा, गुजरात
बरामदगी
गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने निम्नलिखित सामान बरामद किया है—
- 2 मोबाइल फोन
- 1 पासबुक
- 2 डेबिट कार्ड
- 1 चेक बुक
इन उपकरणों में ठगी से संबंधित लेनदेन और संचार के डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। मोबाइल फोन में उस फर्जी ऐप और सोशल मीडिया ग्रुप्स की जानकारी भी मिली है जिनका इस्तेमाल निवेशकों को लुभाने के लिए किया जाता था।

ठगी का तरीका (Modus Operandi)
जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासकर Facebook, पर नकली स्टॉक ट्रेडिंग ग्रुप्स बनाते थे। इन ग्रुप्स में झूठे स्क्रीनशॉट, नकली मुनाफे के आंकड़े और आकर्षक योजनाएं साझा की जाती थीं ताकि लोग भरोसा कर लें।
इसके बाद, इच्छुक निवेशकों को फर्जी ऐप डाउनलोड कराई जाती थी और उन्हें बताया जाता था कि यह स्टॉक मार्केट में निवेश करने का वैध प्लेटफॉर्म है। जब पीड़ित ऐप में पैसे डालते, तो वे पैसे सीधे आरोपियों के नियंत्रण वाले बैंक खातों में चले जाते।
इसके बाद आरोपी उन पैसों को कई बैंक खातों में घुमाते थे ताकि ट्रांजैक्शन की ट्रेसिंग मुश्किल हो जाए। अंत में यह रकम गुजरात और महाराष्ट्र के खातों में पहुंचाई जाती थी, जहां से इसे कैश निकाला जाता या क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता।
जुड़ी हुई अन्य शिकायतें
जांच के दौरान पाया गया कि जिन बैंक खातों और संदिग्ध व्यक्तियों का इस मामले में इस्तेमाल हुआ है, वे तीन अन्य शिकायतों से भी जुड़े हुए हैं। ये शिकायतें भी फर्जी ट्रेडिंग ऐप धोखाधड़ी से संबंधित हैं और एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज हैं।
इससे यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई छोटा-मोटा स्थानीय फ्रॉड नहीं, बल्कि गुजरात और आसपास के राज्यों से संचालित एक इंटर-स्टेट साइबर अपराध नेटवर्क है।
नागरिकों से अपील
साइबर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान ऐप या सोशल मीडिया लिंक के जरिए निवेश न करें, खासकर जब बहुत ज़्यादा मुनाफे (जैसे 5–10% रोजाना) का लालच दिया जा रहा हो।
निवेश करने से पहले हमेशा यह सुनिश्चित करें कि प्लेटफॉर्म SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) में पंजीकृत है या नहीं। किसी भी संदिग्ध लिंक या ऐप की जानकारी तुरंत www.cybercrime.gov.in पर दें या 1930 पर कॉल करें।
पुलिस की सक्रियता और जांच जारी
दिल्ली पुलिस की आउटर नॉर्थ साइबर सेल की इस त्वरित कार्रवाई ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो देश के विभिन्न राज्यों में फैला हुआ था। डिजिटल सबूतों के जरिए पुलिस ने न केवल आरोपियों तक पहुंच बनाई बल्कि उनके काम करने के तरीके को भी उजागर किया।
मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस अब आरोपियों के अन्य साथियों और बैंक खातों के नेटवर्क को ट्रेस कर रही है ताकि पूरे गिरोह को पकड़ा जा सके।

यह मामला इस बात का प्रमाण है कि साइबर अपराधी अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ चुके हैं और लोगों को ठगने के लिए तकनीक, सोशल मीडिया और नकली वित्तीय प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस प्रकार के अपराधों से बचाव के लिए नागरिकों को सजग रहना होगा और किसी भी निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की प्रामाणिकता की जांच करनी होगी।
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने इस मामले में जिस तरह तेजी से जांच कर आरोपियों को गिरफ्तार किया, वह उनकी तकनीकी दक्षता और समर्पण को दर्शाता है। इस तरह की कार्रवाइयों से साइबर अपराधियों में भय और आम नागरिकों में विश्वास दोनों बढ़ेगा।