
AAP ने करोल बाग में निकाली विशाल जय भीम यात्रा — चीफ जस्टिस के सम्मान की मांग
BJP पर दलित विरोधी रवैये का आरोप, करोल बाग में आम आदमी पार्टी ने निकाली “जय भीम यात्रा”
AAP देश की न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर आसीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के प्रति अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। इसी मुद्दे पर आज दिल्ली के करोल बाग विधानसभा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस मौके पर स्थानीय विधायक विशेष रवि और दिल्ली प्रदेश आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मिलकर “जय भीम यात्रा” निकाली और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखे आरोप लगाए।
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आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कहा कि बीजेपी के कुछ समर्थक और पदाधिकारी सोशल मीडिया पर चीफ जस्टिस के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो न केवल न्यायपालिका का अपमान है, बल्कि दलित समाज के प्रति गहरे भेदभाव और नफरत की मानसिकता को भी उजागर करता है। यात्रा में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने हिस्सा लिया।
विधायक विशेष रवि का तीखा बयान — “बीजेपी दलित विरोधी मानसिकता वाली पार्टी”
करोल बाग से विधायक विशेष रवि ने यात्रा के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा,
“बीजेपी के लोग लगातार दलित समाज का अपमान कर रहे हैं। आज यह अपमान एक आम आदमी का नहीं, बल्कि देश के चीफ जस्टिस जैसे सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति का हुआ है। यह न केवल संविधान के प्रति असम्मान है, बल्कि भारत के लोकतंत्र की आत्मा पर हमला है।”

AAP ने बीजेपी पर बोला हमला — “दलितों का अपमान बर्दाश्त नहीं”
उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी हमेशा से दलित विरोधी रही है। चाहे वह सामाजिक मुद्दों की बात हो, आरक्षण की बात हो या फिर दलितों के प्रतिनिधित्व की — बीजेपी ने हर मोर्चे पर दलितों को हाशिये पर धकेलने का काम किया है।
“हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे कि इतनी ऊंची संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का अपमान हो और दोषियों पर कोई कार्रवाई न हो। हम मांग करते हैं कि बीजेपी के उन सभी नेताओं और सोशल मीडिया यूज़र्स पर कार्रवाई हो, जिन्होंने चीफ जस्टिस के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी हैं।”
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AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने केंद्र सरकार को घेरा
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस पूरे मामले में केंद्र सरकार और बीजेपी नेतृत्व पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा,
“बीजेपी की विचारधारा ही दलितों को दोयम दर्जे का समझने वाली है। आज जब चीफ जस्टिस एक दलित समाज से आते हैं और देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर आसीन हैं, तो बीजेपी से जुड़े लोग इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे। इसलिए सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियाँ की जा रही हैं।”
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति के खिलाफ अपमान नहीं, बल्कि सम्पूर्ण दलित समाज के सम्मान पर हमला है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इस पर तुरंत सख्त कार्रवाई करे और बीजेपी नेताओं को माफी मांगने पर मजबूर करे।
सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
आम आदमी पार्टी ने इस बात पर जोर दिया कि सोशल मीडिया पर बीजेपी से जुड़े कई लोगों ने चीफ जस्टिस के खिलाफ टिप्पणियाँ की हैं। पार्टी ने कहा कि केंद्र सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को तुरंत FIR दर्ज कर दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
विशेष रवि ने कहा,
“अगर दिल्ली में या केंद्र में बीजेपी इन टिप्पणियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती तो पंजाब में हमारी सरकार बीजेपी से जुड़े उन सभी लोगों पर कड़ी कार्रवाई करेगी जो इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणियों में शामिल हैं। किसी को भी देश के न्यायपालिका के सर्वोच्च पद का अपमान करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।”

बीजेपी के खिलाफ सड़कों पर उतरी AAP — CJI अपमान मामले में कार्रवाई की मांग
जय भीम यात्रा: सामाजिक एकता और न्याय का प्रतीक
“जय भीम यात्रा” के ज़रिए आम आदमी पार्टी ने इस विरोध को केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में नहीं बल्कि संविधान और दलित सम्मान की रक्षा के प्रतीक के रूप में पेश किया। यात्रा में “जय भीम” और “संविधान बचाओ” के नारे लगाए गए। प्रतिभागियों ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के चित्रों और बैनरों के साथ पदयात्रा की।
यात्रा करोल बाग विधानसभा के कई इलाकों से गुज़री और जगह-जगह लोगों ने इसमें भागीदारी की। कई स्थानीय नागरिकों ने कहा कि चीफ जस्टिस जैसे पद का अपमान करना किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि पूरे देश की न्याय प्रणाली पर हमला है।
बीजेपी पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि बीजेपी की नेतृत्व को चाहिए कि वह सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और अपने कार्यकर्ताओं व समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई करे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चीफ जस्टिस का अपमान का मुद्दा केवल न्यायपालिका बनाम राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि यह सामाजिक ताने-बाने और संवैधानिक सम्मान से जुड़ा मामला है। दलित समुदाय की भावनाएं इससे गहराई से जुड़ी हुई हैं।
दलित समाज में गुस्सा और आंदोलन की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, कई दलित संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता इस मामले को लेकर आगामी दिनों में बड़े पैमाने पर आंदोलन की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि जब देश का सर्वोच्च न्यायिक पद ही सुरक्षित नहीं, तो आम दलित नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान की क्या गारंटी है?
इन संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर केंद्र सरकार और बीजेपी ने समय रहते दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की, तो देशभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
AAP का संदेश — संविधान और न्यायपालिका की रक्षा सभी की जिम्मेदारी
आम आदमी पार्टी ने अपने विरोध प्रदर्शन के दौरान इस बात पर जोर दिया कि यह लड़ाई केवल किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि देश के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है।
“चीफ जस्टिस के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले लोग वास्तव में बाबा साहब अंबेडकर की उस विचारधारा पर हमला कर रहे हैं जिसने इस देश को लोकतंत्र और समानता का रास्ता दिखाया। हमें एकजुट होकर इस मानसिकता के खिलाफ खड़ा होना होगा।” — सौरभ भारद्वाज

दलित संगठनों में गुस्सा — चीफ जस्टिस के अपमान को लेकर आंदोलन की तैयारी
करोल बाग में आयोजित “जय भीम यात्रा” ने स्पष्ट कर दिया कि चीफ जस्टिस के अपमान को लेकर मामला अब सिर्फ सोशल मीडिया की बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क पर उतर चुका है। आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को दलित सम्मान और संवैधानिक गरिमा से जोड़ते हुए बीजेपी पर सीधा हमला बोला है। अब यह देखना होगा कि बीजेपी नेतृत्व इस पर क्या कदम उठाता है — क्या वह कार्रवाई करेगा या राजनीतिक टकराव और गहराएगा।