
RSS कार्यक्रम में शामिल हुए मुस्लिम युवक, कहा—कट्टरता नहीं, भाईचारे का प्रतीक है संगठन
📰 मुकुंदपुर में RSS द्वारा भारतीय सद्भावना मंच का भव्य आयोजन — साध्वी कल्पना अरुधति की मौजूदगी में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने RSS का दामन थामा
दिल्ली के उत्तर जिले के बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र के मुकुंदपुर इलाके में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा एक विशेष कार्यक्रम “भारतीय सद्भावना मंच” का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें दर्जनों मुस्लिम समुदाय के लोगों ने RSS की सदस्यता ग्रहण की, जो एक नई सामाजिक पहल का प्रतीक बन गया।
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इस आयोजन में विशेष रूप से उपस्थित रहीं मां साध्वी कल्पना अरुधति, जो RSS के भारतीय सद्भावना मंच की राष्ट्रीय संयोजिका हैं। उन्होंने अपने संबोधन में समाज में एकता, संस्कार और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया और कहा कि भारत की वास्तविक ताकत उसकी विविधता और समरसता में निहित है।
कार्यक्रम में स्थानीय निवासियों की भारी भीड़ उमड़ी। लोग विभिन्न धर्मों, समुदायों और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आए थे। इस आयोजन ने मुकुंदपुर में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की एक नई मिसाल पेश की।
📌 RSS के भारतीय सद्भावना मंच की पहल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने पिछले कुछ वर्षों में समाज के सभी वर्गों को जोड़ने और धार्मिक एकता को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारतीय सद्भावना मंच इसी दिशा में एक ऐसा प्रयास है, जिसका उद्देश्य हिंदू–मुस्लिम समेत सभी समुदायों के बीच भाईचारा और प्रेम का वातावरण बनाना है।
हाल के दिनों में RSS प्रमुख मोहन भागवत द्वारा दिया गया बयान, जिसमें उन्होंने कहा था —
“भारत में मुस्लिम पहले दिन से हैं, आज भी हैं और हमेशा रहेंगे।”

दिल्ली में RSS के कार्यक्रम में मुस्लिमों की बड़ी संख्या में शिरकत, समाज में सकारात्मक संदेश
संगठन की कार्यशैली और दृष्टिकोण में एक सकारात्मक संदेश दिया। इसी बयान के बाद देशभर में RSS द्वारा जगह-जगह भारतीय सद्भावना मंच का आयोजन किया जा रहा है, ताकि समाज में भाईचारे का माहौल बन सके।
📍 मुकुंदपुर में आयोजन — एकता का संदेश
बुराड़ी के मुकुंदपुर इलाके में हुआ यह आयोजन भी RSS की उसी नई नीति और सामाजिक जुड़ाव की पहल का हिस्सा था। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज और भारत माता की वंदना के साथ हुई। इसके बाद मां साध्वी कल्पना अरुधति ने मंच पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जिसकी पहचान केवल किसी एक धर्म या जाति से नहीं, बल्कि इसकी विविध संस्कृति और साझा विरासत से होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि समाज में फैल रही नफरत और विभाजन की राजनीति से ऊपर उठकर प्रेम, सहयोग और आपसी सम्मान का मार्ग अपनाएं।
साध्वी कल्पना अरुधति ने कहा,
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“भारत सदियों से एक परिवार की तरह रहा है। यहां सभी धर्मों, सभी जातियों ने मिलजुलकर देश को आगे बढ़ाया है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम आने वाली पीढ़ियों को एक ऐसा भारत दें, जिसमें एकता, सद्भाव और संस्कार सर्वोपरि हों।”
🤝 दर्जनों मुस्लिम समुदाय के लोगों ने RSS ज्वाइन किया
इस आयोजन की सबसे खास और ऐतिहासिक घटना तब देखने को मिली जब मंच पर दर्जनों मुस्लिम समुदाय के लोग आए और RSS की सदस्यता ग्रहण की। उन्होंने कहा कि RSS को केवल कट्टर संगठन समझना गलतफहमी थी। इस संगठन का असली उद्देश्य राष्ट्र की एकता, संस्कार और समाज को जोड़ना है।
इसरत खान, जो इस आयोजन में शामिल होकर RSS से जुड़े, ने मीडिया से बात करते हुए कहा —
“मैंने RSS के बारे में बहुत सी बातें सुनी थीं, लेकिन जब मैंने खुद आकर इनके कार्य और विचार देखे तो समझ में आया कि यह कट्टरता नहीं, बल्कि हिंदू–मुस्लिम प्रेम और एकता का प्रतीक है। मैं चाहता हूं कि हमारे समाज के और लोग भी इस भ्रम से बाहर आएं।”

भारतीय सद्भावना मंच बना मुकुंदपुर में भाईचारे का मंच, साध्वी कल्पना अरुधति रहीं मुख्य अतिथि
इस तरह मुस्लिम समुदाय के लोगों का RSS से जुड़ना न केवल मुकुंदपुर के लिए बल्कि पूरे दिल्ली–एनसीआर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक संकेत है।
🌐 “I Love Mohammad” विवाद के बीच एक नई दिशा
हाल ही में “I Love Mohammad” नारे और बयानों को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध और मतभेद की स्थिति बनी थी। कई मुस्लिम संगठन RSS को कट्टरता की नजर से देखते रहे हैं। लेकिन मोहन भागवत के बयान के बाद RSS ने यह स्पष्ट किया कि वह किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की साझा धारा को मजबूत करने में विश्वास रखता है।
RSS ने अलग-अलग राज्यों और जिलों में भारतीय सद्भावना मंच के ज़रिए समुदायों के बीच संवाद, बैठकें और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने शुरू किए हैं। मुकुंदपुर का यह आयोजन उसी शृंखला की एक अहम कड़ी साबित हुआ।🧑🤝🧑 कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब
कार्यक्रम में आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की उपस्थिति ने इसे एक सामुदायिक पर्व का रूप दे दिया। कार्यक्रम स्थल को भारतीय संस्कृति और एकता के प्रतीकों से सजाया गया था। मंच पर विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ बैठे, जिससे एकजुटता का संदेश साफ दिखाई दे रहा था।
कार्यक्रम में कई स्थानीय नेताओं, समाजसेवियों और धार्मिक प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि समाज में नफरत की जगह प्रेम और सहयोग को बढ़ावा देना ही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
🪔 साध्वी कल्पना अरुधति का प्रेरक संबोधन
मां साध्वी कल्पना अरुधति ने अपने भाषण में कहा कि भारत की संस्कृति सदियों से “वसुधैव कुटुंबकम” — अर्थात “संपूर्ण विश्व एक परिवार है” — के सिद्धांत पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि आज जब समाज में नकारात्मकता और विभाजन के प्रयास किए जा रहे हैं, तब हमें अपने संस्कार, परंपरा और एकता की ओर लौटने की आवश्यकता है।
उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे सोशल मीडिया या अफवाहों के आधार पर किसी संगठन या समुदाय को न आंकें, बल्कि सीधे संवाद और अनुभव के ज़रिए सच को समझें। उनके प्रेरक शब्दों ने उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार किया।
📣 स्थानीय लोगों में उत्साह और समर्थन
मुकुंदपुर इलाके में इस आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। कई लोगों ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा —
“हमने पहली बार देखा कि अलग-अलग धर्मों के लोग एक साथ मंच पर बैठे और एकता की बात की। अगर ऐसे आयोजन होते रहे तो समाज में नफरत कम होगी और भाईचारा बढ़ेगा।”
📝 कार्यक्रम का उद्देश्य — एकता, सद्भाव और राष्ट्रभक्ति
RSS द्वारा आयोजित इस भारतीय सद्भावना मंच का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को जोड़ना, धार्मिक दूरी को पाटना और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना है। मुकुंदपुर में हुआ यह आयोजन इस दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।
विभिन्न समुदायों के लोग जब एक साथ एक मंच पर आए और एक दूसरे को गले लगाया, तो यह दृश्य मुकुंदपुर में सामाजिक एकता की नई कहानी लिख गया।

मोहन भागवत के बयान के बाद RSS की नई दिशा, मुकुंदपुर में दिखी एकजुटता
📌 निष्कर्ष
मुकुंदपुर, बुराड़ी में RSS द्वारा आयोजित भारतीय सद्भावना मंच केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन की झलक थी। साध्वी कल्पना अरुधति की उपस्थिति और मुस्लिम समुदाय के लोगों का RSS से जुड़ना इस बात का प्रतीक है कि संवाद और प्रेम के ज़रिए हर दीवार को गिराया जा सकता है।
जब समाज के अलग-अलग वर्ग मिलकर एक भारत, श्रेष्ठ भारत के संकल्प को दोहराते हैं, तो यह संदेश पूरे देश में गूंजता है। मुकुंदपुर का यह आयोजन निस्संदेह दिल्ली में सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रभक्ति का एक ऐतिहासिक क्षण बन गया।