दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन बाल अश्लीलता का किया खुलासा, आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट ने NCMEC की रिपोर्ट पर तुरंत की कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार ऑनलाइन बाल अश्लीलता मामला: दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने

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दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट ने NCMEC की रिपोर्ट पर तुरंत की कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार

ऑनलाइन बाल अश्लीलता मामला: दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने आरोपी को किया गिरफ्तार

दिल्ली के बाहरी उत्तर ज़िले की साइबर क्राइम यूनिट की बड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2025 —
दिल्ली पुलिस के बाहरी उत्तर ज़िले की टीम ने एक ऑनलाइन बाल अश्लीलता (Child Pornography) मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से वह मोबाइल फोन भी बरामद किया है, जिसका उपयोग अपराध में किया गया था। यह गिरफ्तारी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाल शोषण से जुड़े अपराधों पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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मामले की शुरुआत: साइबर टिपलाइन रिपोर्ट से मिली जानकारी

यह मामला तब सामने आया जब नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (NCMEC) की ओर से एक साइबर टिपलाइन रिपोर्ट दिल्ली पुलिस को प्राप्त हुई। इस रिपोर्ट में एक इलेक्ट्रॉनिक सेवा प्रदाता (Electronic Service Provider) द्वारा उत्पन्न डेटा शामिल था, जिसमें बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material – CSAM) के निर्माण, कब्ज़े और वितरण की जानकारी थी।

रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया था कि एक टेलीग्राम मोबाइल नंबर और उससे जुड़े यूज़रनेम के माध्यम से अश्लील सामग्री साझा की जा रही है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत ही इस पर कार्रवाई की गई और मामला भलस्वा डेयरी थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया।

FIR दर्ज और जांच की शुरुआत

प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर, भलस्वा डेयरी थाने में एफआईआर नंबर 659/25 दिनांक 01/10/2025 को दर्ज किया गया। मामला आईटी एक्ट 2000 की धारा 67बी (Section 67B of the IT Act, 2000) के तहत पंजीकृत किया गया, जो बाल अश्लील सामग्री से संबंधित अपराधों से जुड़ी है।

एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच की जिम्मेदारी साइबर क्राइम सेल को सौंपी गई। इस दौरान पुलिस टीम ने तकनीकी और मानवीय दोनों स्तरों पर जांच शुरू की। विभिन्न साइबर टूल्स, नेटवर्क ट्रैफिक और मोबाइल डेटा के विश्लेषण के बाद पुलिस ने अपराध में शामिल व्यक्ति की पहचान स्थापित कर ली।

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जांच टीम और नेतृत्व

जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई, जिसका नेतृत्व एसएचओ/पीएस भलस्वा डेयरी इंस्पेक्टर मनीष भाटी ने किया। टीम में एसआई महेश, हेड कांस्टेबल मनीष और कांस्टेबल रॉबिन शामिल थे।

यह पूरी कार्रवाई एसीपी/सब-नॉर्थ श्री विजय कुमार वत्स के मार्गदर्शन में और डीसीपी बाहरी उत्तर हरेश्वर स्वामी (IPS) की देखरेख में की गई। इस ऑपरेशन की निगरानी संयुक्त आयुक्त पुलिस विजय सिंह (IPS) द्वारा की जा रही थी।

डीसीपी हरेश्वर स्वामी ने बताया कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील था और इसकी जांच में पुलिस ने तकनीकी दक्षता, गोपनीयता और त्वरित कार्रवाई — तीनों का संतुलन बनाए रखा।

छापेमारी और गिरफ्तारी की कहानी

पुलिस टीम ने गहन तकनीकी विश्लेषण और लोकेशन ट्रैकिंग के बाद आरोपी की पहचान सलमान पुत्र नूर मोहम्मद (आयु 25 वर्ष) निवासी हाउस नंबर 126, कलंदर कॉलोनी, भलस्वा डेयरी, दिल्ली के रूप में की।

आरोपी के ठिकाने की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने एक सटीक और योजनाबद्ध छापेमारी की। स्थानीय स्तर पर जानकारी इकट्ठी करने और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग के बाद टीम ने सलमान को उसके घर के पास से ही गिरफ्तार कर लिया।

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गिरफ्तारी के समय पुलिस ने आरोपी के पास से एक ब्लैक कलर का OnePlus 11R मोबाइल फोन बरामद किया, जिसे अपराध में इस्तेमाल किया गया था। मोबाइल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी ने किस सीमा तक और किन लोगों के साथ इस प्रकार की सामग्री साझा की थी।

तकनीकी जांच और आगे की कार्रवाई

फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम अब इस बात की जांच कर रही है कि मोबाइल में और कौन-सी सामग्री मौजूद है — क्या आरोपी ने यह सामग्री केवल डाउनलोड की थी या वह इसे आगे भी शेयर कर रहा था।

इसके अतिरिक्त, पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी किसी बड़े ऑनलाइन नेटवर्क या अंतरराष्ट्रीय चेन से जुड़ा था या नहीं। दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट ने NCMEC और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से लगातार समन्वय बनाए रखा है ताकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय लिंक को चिन्हित किया जा सके।

पुलिस अधिकारियों के बयान

डीसीपी हरेश्वर स्वामी (IPS) ने कहा,

“बाल अश्लीलता से जुड़े अपराध मानवता के खिलाफ सबसे घृणित अपराधों में से एक हैं। ऐसे मामलों में दिल्ली पुलिस जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। किसी भी साइबर रिपोर्ट को हम हल्के में नहीं लेते — चाहे वह देशी एजेंसी से मिले या अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म से।”

ऑनलाइन बाल शोषण पर दिल्ली पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति, आरोपी को गिरफ्तार किया

उन्होंने आगे कहा कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधों के मामलों में तकनीकी जांच और इंटर-एजेंसी सहयोग कितना प्रभावी हो सकता है।

संयुक्त आयुक्त विजय सिंह (IPS) ने भी टीम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सफलता तभी संभव है जब तकनीकी विशेषज्ञता, सूझबूझ और त्वरित एक्शन एक साथ काम करें। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली पुलिस लगातार अपने अधिकारियों को साइबर अपराध से निपटने के लिए प्रशिक्षित कर रही है।

बाल शोषण अपराधों पर दिल्ली पुलिस की सख्त नीति

दिल्ली पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन बाल शोषण, साइबर बुलिंग, और अश्लील सामग्री के प्रसार पर सख्ती दिखाई है। कई मामलों में दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय एजेंसियों — जैसे NCRB, CBI और NCMEC — के साथ मिलकर अपराधियों को ट्रेस किया है।

पुलिस का मानना है कि तकनीकी प्रगति के साथ अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं, इसलिए आवश्यक है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां अपनी डिजिटल निगरानी क्षमता (Digital Surveillance Capacity) को और मज़बूत करें।

समाज और अभिभावकों के लिए चेतावनी

इस मामले के बाद पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी रखें। बच्चों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के बारे में जागरूक करना अब एक अभिभावकीय जिम्मेदारी बन चुकी है।

पुलिस ने यह भी कहा कि बाल यौन शोषण से जुड़ी कोई भी सामग्री रखना, शेयर करना या डाउनलोड करना — कानूनन अपराध है।
यदि किसी व्यक्ति को किसी भी प्लेटफॉर्म पर इस तरह की सामग्री दिखे तो तुरंत पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें।

आगे की जांच और संभावित नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश

भलस्वा डेयरी पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या आरोपी किसी बड़े ऑनलाइन ग्रुप या चैनल से जुड़ा था, जहाँ से यह सामग्री प्राप्त की जाती थी। इसके लिए मोबाइल डेटा रिकवरी, चैट हिस्ट्री और क्लाउड स्टोरेज की जाँच जारी है।

संभावना है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी लोग इस नेटवर्क में पकड़े जाएँगे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी किसी विदेशी सर्वर या डार्क वेब प्लेटफॉर्म के संपर्क में था।

कानूनी प्रावधान और सजा

धारा 67बी आईटी एक्ट, 2000 के तहत यदि कोई व्यक्ति बाल यौन शोषण सामग्री का निर्माण, प्रकाशन, वितरण या भंडारण करता है तो उसे 5 से 7 वर्ष तक की सज़ा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
इस धारा के अंतर्गत अपराध गंभीर और गैर-जमानती है।

निष्कर्ष: साइबर सुरक्षा ही सबसे बड़ी सुरक्षा

इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट होता है कि साइबर अपराध केवल वित्तीय धोखाधड़ी या हैकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और नैतिक स्तर पर भी बड़ा खतरा बन चुका है।

दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर साबित किया है कि साइबर अपराधियों को ट्रेस करने के लिए उसकी टेक्निकल टीम पूरी तरह सक्षम है और बच्चों की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता अटूट है।

FIR दर्ज: भलस्वा डेयरी साइबर टीम ने ऑनलाइन बाल अश्लीलता के मामले में कार्रवाई की

पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल अपराधी को सलाखों के पीछे पहुँचाया बल्कि समाज को भी यह संदेश दिया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर किसी भी प्रकार की बाल अश्लील सामग्री को लेकर शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) अपनाई जाएगी।

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