दलित समाज का आरोप — BJP सरकार बाबा साहेब के संविधान की धज्जियां उड़ा रही है सीजीआई पर हमले के विरोध में निकली स्वाभिमान यात्रा
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दलित समाज का आरोप — BJPसरकार बाबा साहेब के संविधान की धज्जियां उड़ा रही है
सीजीआई पर हमले के विरोध में निकली स्वाभिमान यात्रा — झंडेवालान अंबेडकर भवन से दलित समाज ने दी सरकार को चेतावनी
देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (CJI) पर हुए हमले को लेकर आज पूरे दिल्ली में आक्रोश का माहौल देखने को मिला। इस हमले के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए एससी-एसटी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने झंडेवालान स्थित ऐतिहासिक अंबेडकर भवन से एक विशाल स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत की। इस यात्रा में सैकड़ों कार्यकर्ता, सामाजिक संगठनों के सदस्य, अंबेडकरवादी विचारधारा से जुड़े युवा और विभिन्न राजनीतिक प्रतिनिधि शामिल हुए। भीड़ में मौजूद लोगों ने “स्वाभिमान बचाओ”, “संविधान बचाओ”, और “बाबा साहेब अमर रहें” जैसे गगनभेदी नारे लगाए।
सीजीआई पर हुए हमले को दलित समाज ने लोकतंत्र और संविधान पर हमला बताया है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान की आत्मा पर सीधा प्रहार है। राजेंद्र पाल गौतम ने अपने संबोधन में कहा,
“आज जब देश का संविधान खतरे में है, जब न्यायपालिका पर दबाव बनाया जा रहा है, तब हम सबका कर्तव्य है कि हम सड़क पर उतरें और बाबा साहेब के बताए रास्ते पर चलकर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं।”
“संविधान बचाओ, स्वाभिमान बचाओ” — झंडेवालान में दलित समाज की जोरदार हुंकार
🏛 झंडेवालान अंबेडकर भवन से शुरू हुई ऐतिहासिक यात्रा
इस स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत झंडेवालान अंबेडकर भवन से हुई, जो वर्षों से दलित आंदोलन का एक केंद्र रहा है। यहाँ से यह यात्रा विभिन्न मुख्य मार्गों से होकर गुज़री। यात्रा के दौरान हजारों की संख्या में लोग शामिल होते चले गए। लोगों ने हाथों में बाबा साहेब की तस्वीरें, झंडे और बैनर लेकर संविधान की रक्षा का संकल्प दोहराया।
यात्रा में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। पूरे माहौल में एकजुटता और विरोध का स्वर गूंजता रहा। भीड़ में मौजूद युवाओं ने नारे लगाए — “संविधान पर हमला बर्दाश्त नहीं करेंगे”, “दलित-पिछड़ों की आवाज दबाई नहीं जा सकती”, “बाबा साहेब का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान”।
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🗣 सरकार को दी कड़ी चेतावनी
यात्रा में वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों को कुचलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार लगातार बाबा साहेब के संविधान द्वारा बताए गए रास्तों की धज्जियां उड़ा रही है। राजेंद्र पाल गौतम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इस तरह के हमले और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाना जारी रहा तो देश भर में व्यापक आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
उन्होंने कहा,
“हम सरकार को आगाह करना चाहते हैं कि यह आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा। जब तक संविधान की गरिमा बहाल नहीं होती और दलित समाज को न्याय नहीं मिलता, तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”
दलितों का आक्रोश फूटा — झंडेवालान से निकली ऐतिहासिक स्वाभिमान यात्रा
📜 संविधान यात्रा — एक चेतावनी भरा संदेश
इस स्वाभिमान यात्रा को “संविधान यात्रा” का रूप भी दिया गया, ताकि सरकार को साफ संदेश भेजा जा सके कि दलित समाज संविधान पर किसी भी प्रकार के हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा। यात्रा के अंत में एक सभा आयोजित की गई, जिसमें वक्ताओं ने संविधान की प्रस्तावना को सामूहिक रूप से पढ़ा और संविधान की रक्षा के लिए शपथ ली।
सभा में युवाओं ने कहा कि आज समय आ गया है कि हम बाबा साहेब के बताए रास्ते पर चलें, उनकी विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाएं और किसी भी अन्याय के खिलाफ संगठित होकर खड़े हों।
🔥 दलितों पर बढ़ते अत्याचारों के खिलाफ आवाज
कार्यक्रम के दौरान कई वक्ताओं ने हाल के दिनों में दलितों पर बढ़ते अत्याचारों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में दलित समाज के साथ भेदभाव, हिंसा और सामाजिक बहिष्कार की घटनाएं बढ़ी हैं। न्याय पाने में भी देरी और दबाव की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जब न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति को ही निशाना बनाया जा रहा है, तो यह आम नागरिकों के अधिकारों के लिए खतरे की घंटी है।
🧠 बाबा साहेब की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प
इस यात्रा का एक उद्देश्य युवा पीढ़ी को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा से जोड़ना भी था। कई शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि आज के समय में संविधान की मूल भावना को समझना और उसे समाज में लागू करना ही सच्ची देशभक्ति है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे संविधान पढ़ें, उसके अधिकारों को जानें और लोकतंत्र की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएं।
📢 स्वाभिमान यात्रा बनी सामाजिक एकता का प्रतीक
इस यात्रा ने दलित, पिछड़े और अन्य सामाजिक समूहों को एक मंच पर लाकर सामाजिक एकता का संदेश दिया। यात्रा में विभिन्न राज्यों से आए कार्यकर्ता भी शामिल थे, जिससे आंदोलन को राष्ट्रीय स्वरूप मिला। सभा में कहा गया कि आने वाले समय में देश के विभिन्न हिस्सों में इसी तरह की स्वाभिमान यात्राएं निकाली जाएंगी ताकि सरकार को यह स्पष्ट संदेश जाए कि संविधान की रक्षा के लिए समाज पूरी तरह संगठित है।
अंबेडकर भवन से संविधान यात्रा: दलित समाज ने कहा — अपमान बर्दाश्त नहीं
📝 निष्कर्ष
झंडेवालान अंबेडकर भवन से निकली यह स्वाभिमान यात्रा सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है। यह यात्रा दलित समाज की उस चेतावनी की प्रतीक है जिसमें उन्होंने साफ कर दिया है कि संविधान और न्यायपालिका पर किसी भी तरह का हमला स्वीकार नहीं किया जाएगा। सीजीआई पर हमला लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार है, और इसका जवाब देश के हर गली-मोहल्ले से दिया जाएगा। दलित समाज, बाबा साहेब के मार्गदर्शन में, एक बार फिर संगठित होकर न्याय, समानता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए सड़कों पर उतर आया है।