
Axis और AU बैंक खातों से चलता था ठगी का खेल – दिल्ली पुलिस ने किया खुलासा
दिल्ली पुलिस ने जॉब फ्रॉड गैंग का किया भंडाफोड़: दो साइबर ठग गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की बाहरी उत्तरी जिले की साइबर अपराध शाखा (Cyber Crime Police Station, Outer North District) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक संगठित जॉब फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जो लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगते थे। आरोपी नकली वेबसाइट और फर्जी जॉब कंसल्टेंसी के जरिए लोगों को झांसे में लेकर पैसे वसूलते थे
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इस कार्रवाई का नेतृत्व इंस्पेक्टर गोविंद सिंह (SHO/Cyber Police Station) ने किया, जो एसीपी ऑपरेशन्स दिनेश कुमार के निर्देशन और डीसीपी हरेश्वर स्वामी (IPS) तथा जॉइंट सीपी विजय सिंह के समग्र पर्यवेक्षण में संचालित हुई।
घटना का प्रारंभ – शिकायत से खुली ठगी की परतें
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब रोहिणी सेक्टर–28 निवासी एक महिला (Ms. B) ने पुलिस को शिकायत दी कि उन्हें एक व्यक्ति ने कॉल कर “Steps4Career.com” नामक वेबसाइट से “अशिष साहनी” बनकर संपर्क किया। उसने खुद को जॉब कंसल्टेंट बताते हुए महिला को “पैनल एडवोकेट” की नौकरी का प्रस्ताव दिया।
विश्वास जीतने के बाद आरोपी ने रजिस्ट्रेशन और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के नाम पर अलग-अलग किश्तों में ₹39,498/- जमा करवाए। लेकिन रकम मिलते ही ठगों ने संपर्क तोड़ लिया और कोई नौकरी नहीं दी। शिकायत के आधार पर एफआईआर संख्या 39/2025, धारा 318(4) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।
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तकनीकी जांच और आरोपियों की पहचान
जांच के दौरान तकनीकी निगरानी से यह पता चला कि शिकायतकर्ता की रकम तीन ट्रांजेक्शनों में Axis Bank Account No. 923010042660469 में भेजी गई थी — ₹6,500 (22 अगस्त 2025), ₹13,999 और ₹18,999 (25 अगस्त 2025)। यह रकम आगे AU Small Finance Bank Account No. 2501210077580181 में ट्रांसफर की गई, जिसकी कुल राशि ₹33,000 थी।
Axis Bank खाते का धारक – मोहम्मद अकबर (S/o निजाम)
AU Small Finance Bank खाते का धारक – संजय अहिरवाल (S/o पुन्ना)
दोनों आरोपी दिल्ली निवासी पाए गए।
छापेमारी और पहली गिरफ्तारी
पुलिस ने SI अमित, HC राहुल निगम, HC अनिल कुमार (IO) और HC जगजीत की एक टीम बनाई। चूंकि आरोपी बार-बार सिम कार्ड और मोबाइल बदल रहे थे, इसलिए टीम ने लगातार तकनीकी ट्रैकिंग जारी रखी। कई स्थानों पर छापेमारी के बाद आखिरकार पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहम्मद अकबर को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में हुआ खुलासा – नेटवर्क बड़ा था
गहन पूछताछ में मोहम्मद अकबर ने खुलासा किया कि वह अकेला नहीं था। उसने बताया कि इस ठगी के पीछे रूपेंद्र कुमार (S/o छोटे लाल, निवासी द्वारका सेक्टर-16B) और उसका सहयोगी संजय अहिरवाल शामिल हैं।
अकबर की निशानदेही पर पुलिस ने दूसरी कार्रवाई करते हुए रूपेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि इन सबका मुख्य सरगना प्रद्युमन पांडे नाम का व्यक्ति है, जो कई बैंकों में दूसरों के नाम से खाते खुलवाकर ठगे गए पैसों को इकट्ठा करता था।

आरोपियों की भूमिका
- मोहम्मद अकबर (32 वर्ष)
- निवासी: गरही, नेहरू प्लेस के पास, दिल्ली
- शिक्षा: आठवीं तक पढ़ा हुआ
- भूमिका: अपने Axis Bank खाते के माध्यम से ठगे गए पैसे प्राप्त करना। बदले में 10% कमीशन लेता था।
- वर्तमान स्थिति: बेरोजगार
- रूपेंद्र कुमार (36 वर्ष)
- निवासी: नई आदर्श अपार्टमेंट, द्वारका सेक्टर–16B
- शिक्षा: आठवीं कक्षा तक
- भूमिका: गिरोह का समन्वयक, जो स्थानीय लोगों से बैंक खाते जुटाता और पैसों का लेन-देन करवाता था।
- आपराधिक इतिहास: पहले से दो मामलों में शामिल।
- FIR No. 16/2011, धारा 397, 365, 411, 34 IPC व 25 आर्म्स एक्ट, थाना समयपुर बादली।
- FIR No. 430/2016, धारा 395, 412 IPC, थाना पांडव नगर।
जब्त सामान
पुलिस ने आरोपियों से निम्नलिखित सामान बरामद किया:
- दो मोबाइल फोन
- एक पासबुक (Axis Bank)
- एक चेकबुक (AU Small Finance Bank)
- एक सिम कार्ड
ये सभी डिजिटल साक्ष्य ठगी से जुड़ी लेन-देन को प्रमाणित करते हैं।
फ्रॉड का तरीका (Modus Operandi)
पूरे गिरोह का संचालन प्रद्युमन पांडे करता था, जो इंटरनेट पर फर्जी वेबसाइट और नौकरी पोर्टल बनाकर बेरोजगार लोगों को लुभाता था। “Steps4Career.com” जैसी वेबसाइट के जरिए नौकरी के नाम पर रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन फीस वसूली जाती थी।
रूपेंद्र कुमार स्थानीय संपर्कों की मदद से लोगों से बैंक खाते इकट्ठा करता था। ठगे गए पैसे पहले मोहम्मद अकबर के खाते में आते, फिर वहां से संजय अहिरवाल के AU Small Finance Bank खाते में ट्रांसफर होते। संजय रकम निकालकर रूपेंद्र कुमार को देता था, जो अपना 10% हिस्सा रखकर बाकी पैसे प्रद्युमन पांडे तक पहुंचाता था।
यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित ढंग से काम करता था ताकि पुलिस तक उनकी असली पहचान न पहुंच सके।

पुलिस की तत्परता और आगे की जांच
डीसीपी हरेश्वर स्वामी (IPS) ने बताया कि यह कार्रवाई निरंतर तकनीकी ट्रैकिंग, मोबाइल IMEI विश्लेषण और बैंक ट्रांजेक्शन मॉनिटरिंग के जरिए संभव हुई। अब पुलिस इस नेटवर्क के मुख्य संचालक प्रद्युमन पांडे और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है।
इसके साथ ही पुलिस बैंक अकाउंट, कॉल डिटेल्स, डिजिटल ट्रेल्स और यूपीआई ट्रांजेक्शनों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचा जा सके।
जनता के लिए चेतावनी और सुझाव
दिल्ली पुलिस ने जनता को सतर्क रहने की अपील की है।
- किसी भी वेबसाइट या व्यक्ति द्वारा नौकरी दिलाने के नाम पर मांगी जाने वाली रकम पर भरोसा न करें।
- हमेशा कंपनी के ऑफिशियल वेबसाइट या सत्यापित लिंक्डइन प्रोफाइल से ही संपर्क करें।
- OTP, बैंक अकाउंट नंबर, या पहचान पत्र किसी अजनबी को साझा न करें।
- किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी की स्थिति में तुरंत रिपोर्ट करें:
- वेबसाइट: www.cybercrime.gov.in
- हेल्पलाइन नंबर: 1930
- या निकटतम थाने या साइबर पुलिस स्टेशन में संपर्क करें।
पुलिस का संदेश
डीसीपी हरेश्वर स्वामी (IPS) ने कहा –
“साइबर अपराध अब नए रूपों में सामने आ रहे हैं। जनता का सहयोग और सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। दिल्ली पुलिस ऐसे अपराधों पर कड़ी निगरानी रखे हुए है और हर शिकायत का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।”

निष्कर्ष
इस पूरे ऑपरेशन ने साबित किया कि साइबर अपराधी अब पारंपरिक ठगी से आगे बढ़कर डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर रहे हैं। लेकिन दिल्ली पुलिस की तकनीकी क्षमता और तत्परता के कारण ऐसे अपराधों का शीघ्र खुलासा संभव है।
साइबर अपराध शाखा की यह कार्रवाई न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह आम नागरिकों के लिए चेतावनी भी है कि “हर जॉब ऑफर असली नहीं होता।”