
Delhi World’s Largest Vedic Yajna Begins : 11,111 Fire Rituals Illuminate the Arya Summit”
अंतरराष्ट्रीय आर्य सम्मेलन Delhi में आरंभ — 11,111 वैदिक यज्ञों से गूंजा आर्य समाज
राजधानी Delhi में आरंभ हुए अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में 11,111 सामूहिक यज्ञों का आयोजन किया गया — जो न केवल भारत में बल्कि समूचे विश्व में वैदिक संस्कृति की एक अनूठी मिसाल के रूप में दर्ज होगा। इस आयोजन का उद्देश्य था — विश्व शांति, पर्यावरण संतुलन, और आध्यात्मिक जागृति को पुनर्स्थापित करना। भारत की प्राचीन वैदिक परंपराओं को आधुनिक समय में पुनर्जीवित करने वाले आर्य समाज ने आज एक ऐतिहासिक अध्याय रचा।
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इस अवसर पर भारत सहित अमेरिका, मॉरीशस, सुरिनाम, यूके, कनाडा, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों से आए सैकड़ों आर्य प्रतिनिधियों और साधकों ने भाग लिया। वातावरण में वेद मंत्रों की गूंज, अग्निहोत्र की सुगंध और आस्था की लहरें पूरे परिसर में फैल गईं। आर्य समाज की महिला साध्वियों और बालिकाओं ने पहली बार इतने विशाल पैमाने पर यज्ञ का संचालन किया, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
आदर्शों की विरासत और स्व. सुरेश चंद्र आर्य को श्रद्धांजलि
सम्मेलन की शुरुआत सर्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के दिवंगत अध्यक्ष स्वर्गीय श्री सुरेश चंद्र आर्य को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करने से हुई। उन्हें आर्य समाज की विचारधारा को विश्व स्तर पर प्रचारित करने के लिए जाना जाता था। उनके मार्गदर्शन में ही इस आयोजन की नींव रखी गई थी। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि आर्य समाज की आज की यह उपलब्धि उनके जीवन के कर्म और आदर्शों का प्रतिफल है।

Arya Samaj Unites Nations Through 11,111 Sacred Yajnas for Global Peace and Harmony
आर्य समाज की 150 वर्ष पुरानी परंपरा का नव अध्याय
1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज ने सदैव “सत्य” और “वैदिक जीवन” के मार्ग को अपनाने की प्रेरणा दी है। पिछले डेढ़ सौ वर्षों में इस संगठन ने न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्रों में भी गहरा प्रभाव छोड़ा है। शिक्षा, समानता, महिला अधिकार, जातिवाद उन्मूलन और राष्ट्र निर्माण में इसका योगदान ऐतिहासिक रहा है।
इस वर्ष आर्य समाज ने अपने आर्य प्रगति छात्रवृत्ति कार्यक्रम का विस्तार करने की घोषणा की। इस योजना के अंतर्गत ₹1.25 करोड़ की छात्रवृत्तियाँ उन वंचित और मेधावी विद्यार्थियों को प्रदान की गईं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी प्रतिभा के बल पर आगे बढ़ रहे हैं।
शिक्षा के माध्यम से सशक्तिकरण की नई राह
ज्ञान ज्योति पर्व के अध्यक्ष श्री एस.के. आर्य ने कहा,
“संख्या 11,111 का वैदिक दृष्टि से विशेष महत्व है। यह प्रकृति के पंचतत्वों और सृष्टि की एकता का प्रतीक है। इन यज्ञों के माध्यम से हम न केवल बाहरी वातावरण को शुद्ध कर रहे हैं, बल्कि मानव मन और आत्मा को भी पवित्र बना रहे हैं। यह आत्मचिंतन और आत्मगौरव का क्षण है — जब भारत का युवा स्वयं को ‘भारतीय’ कहने में गर्व महसूस कर रहा है।”
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उन्होंने आगे कहा कि अब समय है जब वैदिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ा जाए, ताकि नई पीढ़ी न केवल तकनीकी रूप से दक्ष हो, बल्कि मूल्य आधारित भी बने। आर्य समाज का उद्देश्य है शिक्षा के माध्यम से चरित्र निर्माण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना।
अमेरिका और विश्व के प्रतिनिधियों का दृष्टिकोण
आर्य समाज के अमेरिकी प्रतिनिधि श्री विद्याभूषण वर्मा ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में ₹2.5 करोड़ से अधिक राशि छात्रवृत्ति के रूप में वंचित विद्यार्थियों को दी जा चुकी है। इस वर्ष अतिरिक्त ₹1.3 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत 330 और विद्यार्थियों को सहायता दी जाएगी।
उन्होंने कहा,
“हमारा लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि युवाओं को भारत की गौरवशाली परंपरा, मूल्य प्रणाली और ज्ञान संस्कृति से जोड़ना है। शिक्षा, विरासत और प्रगति के बीच यह सेतु ही भारत को विश्वगुरु के रूप में स्थापित करेगा।”

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राज्यपाल आचार्य देवव्रत का दौरा और चिंतन सत्र
गुजरात और महाराष्ट्र के राज्यपाल महामहिम श्री आचार्य देवव्रत ने सम्मेलन स्थल का दौरा किया। उन्होंने विभिन्न सत्रों में भाग लेते हुए वैदिक शिक्षा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। सम्मेलन में कई विचार-विमर्श सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विषय थे —
- मूल्य आधारित परिवार व्यवस्था
- नई सामाजिक चुनौतियाँ और डिजिटल युग में युवाओं की भूमिका
- मोबाइल स्क्रॉलिंग और मानसिक स्वास्थ्य
- भाषा के नाम पर क्षेत्रवाद का बढ़ना
- आईवीएफ केंद्रों का विस्तार और नैतिक दृष्टिकोण
- नो-चाइल्ड पॉलिसी के संभावित सामाजिक प्रभाव
इन चर्चाओं का उद्देश्य था आधुनिक समाज के समक्ष उपस्थित जटिल प्रश्नों पर वैदिक दृष्टिकोण से समाधान खोजना।
विद्यालयों के विद्यार्थियों की सहभागिता
आर्य सभा के अधीन चल रहे विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने इस अवसर पर अपनी कला, शारीरिक क्षमता और वैदिक ज्ञान का प्रदर्शन किया। वैदिक मंत्रोच्चारण, योग प्रदर्शन, खेल प्रतियोगिताएँ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ कार्यक्रम की विशेष आकर्षण रहीं। बच्चों में यह विश्वास जगाया गया कि वेद केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
महानुभावों की उपस्थिति से सम्मेलन का गौरव बढ़ा
इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित रहीं। इनमें शामिल थे —
- महामहिम श्री धरम गोखूल, मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति
- श्री चान संतोखी, सुरिनाम के पूर्व राष्ट्रपति
- डॉ. अर्विन बूलेल, मॉरीशस सरकार में कृषि उद्योग मंत्री
- स्वामी ब्रह्मविहारिदास, बीएपीएस हिंदू मंदिर, अबू धाबी
- माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह
- माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह
- महामहिम श्री आचार्य देवव्रत
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ
- दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता
- वरिष्ठ भाजपा नेता श्री सुधांशु त्रिवेदी
इन सभी गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व प्रदान किया।
प्रधानमंत्री करेंगे उद्घाटन — ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को समर्पित सम्मेलन
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 31 अक्टूबर को किया जाएगा। वे सम्मेलन के मुख्य सत्र को संबोधित करेंगे, जिसका विषय है —
“वैदिक परंपरा और आधुनिक भारत: विश्व शांति की ओर”
प्रधानमंत्री का यह संबोधन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ — अर्थात संपूर्ण विश्व एक परिवार है — की भावना को व्यवहारिक रूप देने का संदेश देगा।

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पर्यावरण और यज्ञ विज्ञान का समन्वय
सम्मेलन में वैज्ञानिक दृष्टि से भी यज्ञ के महत्व पर कई शोध प्रस्तुत किए गए। पर्यावरण विशेषज्ञों ने बताया कि यज्ञ से वातावरण में उपस्थित हानिकारक गैसों का शुद्धिकरण होता है और इससे स्थानीय पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यज्ञ में प्रयुक्त जड़ी-बूटियों, गाय के घी और लकड़ी के वैज्ञानिक विश्लेषणों ने भी यह सिद्ध किया कि वैदिक विज्ञान केवल आस्था का नहीं, बल्कि तर्क और प्रमाण का भी विषय है।
वैश्विक स्तर पर वैदिक पुनर्जागरण की दिशा में कदम
आर्य समाज के इस आयोजन को “वैदिक पुनर्जागरण का वैश्विक उत्सव” कहा जा रहा है। विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने यह संकल्प लिया कि आने वाले वर्षों में आर्य समाज के विद्यालय, गुरुकुल और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के माध्यम से वैदिक साहित्य और संस्कृत भाषा को पुनः लोकप्रिय बनाया जाएगा।
सुरिनाम और मॉरीशस के प्रतिनिधियों ने बताया कि वहाँ के स्कूलों में पहले से संस्कृत और वेद अध्ययन को पुनः शुरू किया गया है। उन्होंने भारतीय सरकार से आग्रह किया कि इस दिशा में और सहयोग बढ़ाया जाए।
समापन और संपर्क विवरणयह आयोजन दिल्ली सरकार और सर्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। आयोजन समिति की ओर से बताया गया कि सम्मेलन के दौरान प्रत्येक दिन विविध विषयों पर संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और वैदिक व्याख्यान होंगे।
अंत में थिंकक्यू कंसल्टिंग के अनिल शर्मा, सुहानी राणा और नितिन नारायण ने मीडिया को बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक जागृति का प्रतीक है। आर्य समाज की यह नई पहल भारत के आध्यात्मिक पुनर्जागरण की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।