Delhi Police Use Tech Surveillance to Unmask Fake International Caller

Cyber Extortion Attempt Foiled by Smart Policing in Central Delhi Police साइबर वसूली की कोशिश नाकाम: पहाड़गंज पुलिस ने 40 लाख की फिरौती राजधानी दिल्ली

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Cyber Extortion Attempt Foiled by Smart Policing in Central Delhi Police

साइबर वसूली की कोशिश नाकाम: पहाड़गंज पुलिस ने 40 लाख की फिरौती
राजधानी दिल्ली में एक बार फिर साइबर अपराधियों की चालाकी को Delhi Police ने नाकाम कर दिया। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की पहाड़गंज थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है जिसने एक कारोबारी से 40 लाख रुपये की फिरौती की मांग की थी। आरोपी ने कारोबारी को जान से मारने की धमकी दी थी और धमकी भरे संदेश अंतरराष्ट्रीय नंबरों से भेजे गए थे ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके। लेकिन दिल्ली पुलिस की तकनीकी टीम और स्थानीय इंटेलिजेंस के सहयोग से आरोपी को आखिरकार छत्तरपुर इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया।

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शुरुआत हुई एक डरावने कॉल से

यह मामला तब सामने आया जब पहाड़गंज इलाके में रहने वाले एक प्रतिष्ठित कारोबारी मनोज कुमार कश्यप को अंतरराष्ट्रीय नंबरों से लगातार कॉल और व्हाट्सऐप संदेश आने लगे। शुरुआत में उन्होंने इन कॉल्स को नज़रअंदाज़ किया, लेकिन जब संदेशों का स्वर धमकी भरा होता गया, तो उन्हें लगा कि मामला गंभीर है।

भेजे गए संदेशों में आरोपी ने खुद को एक गैंग का सदस्य बताते हुए लिखा कि “अगर 40 लाख रुपये नहीं दिए गए, तो न सिर्फ तुम्हें बल्कि तुम्हारे परिवार को भी गंभीर नुकसान होगा।” संदेशों के साथ कुछ डरावने ऑडियो और तस्वीरें भी भेजी गईं ताकि भय का माहौल बनाया जा सके।

कारोबारी घबरा गए और उन्होंने तुरंत दिल्ली पुलिस की साइबर सेल और थाना पहाड़गंज को इसकी सूचना दी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस मामले को गंभीर अपराध की श्रेणी में दर्ज किया और जांच शुरू कर दी।

26 अक्तूबर को दर्ज हुआ मामला, शुरू हुई तकनीकी जांच

26 अक्तूबर 2025 को दर्ज एफआईआर के बाद एसीपी पहाड़गंज की निगरानी में एसएचओ पहाड़गंज के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। इस टीम में तकनीकी विशेषज्ञ, साइबर इंटेलिजेंस अधिकारी और बीट स्टाफ को शामिल किया गया।

पुलिस ने सबसे पहले उन सभी नंबरों का विश्लेषण किया जिनसे कारोबारी को धमकी भरे संदेश या कॉल आए थे। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि ये नंबर अंतरराष्ट्रीय सर्वर के ज़रिए रूट किए गए थे ताकि कॉलर की वास्तविक पहचान छिपी रहे।

लेकिन दिल्ली पुलिस की तकनीकी निगरानी टीम ने व्हाट्सऐप कॉल्स से जुड़ा आईपी एड्रेस (IP Address) ट्रेस किया। ट्रैकिंग के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि कॉल्स का सोर्स दिल्ली-एनसीआर के ही किसी क्षेत्र से हो रहा था, न कि विदेश से। आगे की जांच में पता चला कि आरोपी छत्तरपुर इलाके में सक्रिय है।

छत्तरपुर में पुलिस की दबिश, आरोपी गिरफ्तार

पुलिस की टीम ने आरोपी की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए लगातार 48 घंटे तक इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस रखा।
जैसे ही टीम को लोकेशन का कन्फर्मेशन मिला, उन्होंने बिना समय गंवाए छत्तरपुर स्थित एक किराए के मकान पर छापा मारा।

मौके से 32 वर्षीय रामज़ान अली हाशमी, पुत्र सलीम हाशमी, निवासी छत्तरपुर, दिल्ली को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से दो मोबाइल फोन (टेक्नो और ओप्पो) और एक लेनोवो लैपटॉप बरामद किया गया, जिसका उपयोग धमकी भरे संदेश भेजने और फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल करने में किया जा रहा था।

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पूछताछ में निकला चौंकाने वाला खुलासा

पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी रामज़ान अली ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह पहले कारोबारी मनोज कश्यप की फैक्ट्री में काम करता था और वहां से निकाले जाने के बाद आर्थिक तंगी में आ गया था।

आरोपी ने बताया कि उस पर कई कर्ज थे और घर में शादी का खर्च भी सिर पर था। आर्थिक संकट से जूझते हुए उसने अपने पुराने मालिक से पैसा वसूलने का ख्याल किया और योजना बनाई कि “अगर उसे डराया जाए और धमकाया जाए, तो शायद वह रकम दे देगा।”

इसी सोच के तहत उसने फर्जी अंतरराष्ट्रीय नंबरों से कॉल करने के लिए कुछ ऑनलाइन सर्विसेज का इस्तेमाल किया और व्हाट्सऐप के माध्यम से धमकी संदेश भेजे। उसने अपनी लोकेशन छिपाने के लिए VPN का भी इस्तेमाल किया, लेकिन पुलिस की साइबर टीम ने तकनीकी रूप से उसके सारे जाल तोड़ दिए।

तकनीकी जांच से खुली पोलपुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन और लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच कराई। जांच में यह पाया गया कि

  • धमकी भरे संदेशों के स्क्रीनशॉट और स्क्रिप्ट फाइल्स आरोपी के लैपटॉप में सेव थीं।
  • उसने इंटरनेट कॉलिंग एप्स जैसे “TextNow” और “Talkatone” का इस्तेमाल किया था।
  • कॉल करने के लिए उसने वर्चुअल नंबर खरीदे थे, जो यूएस और यूएई सर्वर से संचालित होते हैं।
  • पुलिस ने कुछ ऐसे चैट लॉग्स भी बरामद किए हैं जिनमें वह अपने दोस्तों को बता रहा था कि “अब थोड़े पैसे आएंगे।”

इन तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज किया।

डीसीपी सेंट्रल का बयान

सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी निधिन वलसन ने बताया,

“यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी कितनी चालाकी से लोगों को धमकाने और वसूली करने की कोशिश करते हैं। लेकिन दिल्ली पुलिस की तकनीकी टीमें इन अपराधों से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमने आरोपी को बहुत ही कम समय में गिरफ्तार किया है।”

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डीसीपी ने आगे कहा कि आने वाले समय में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में साइबर अपराधों से निपटने के लिए विशेष साइबर इंटेलिजेंस यूनिट को और मज़बूत किया जाएगा।

उन्होंने जनता से अपील की कि अगर किसी को ऐसे धमकी भरे कॉल या संदेश मिलते हैं, तो तुरंत 112 या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहनामनोज कश्यप और उनके परिवार ने दिल्ली पुलिस की इस तेज़ कार्रवाई के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि,

“मैंने जैसे ही शिकायत की, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। मैं सच में नहीं सोच सकता था कि इतने कम समय में आरोपी पकड़ा जाएगा। अब हमें राहत मिली है।”

स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने भी पुलिस के इस प्रयास की सराहना की और कहा कि इस तरह की त्वरित कार्रवाई से अपराधियों में भय और नागरिकों में विश्वास पैदा होता है।

आर्थिक तंगी और अपराध की राह

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी रामज़ान अली पहले एक मेहनती कर्मचारी था। कुछ महीनों पहले मनोज कश्यप की फैक्ट्री में मशीनरी से जुड़ी गड़बड़ी के कारण उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। इसके बाद वह बेरोज़गार हो गया।

उसने शुरू में कुछ छोटे काम किए लेकिन लगातार घाटा और कर्ज़ बढ़ता गया। शादी तय हो जाने के बाद खर्चों का दबाव भी बढ़ा, और धीरे-धीरे उसने गलत राह पकड़ ली।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने पहले कुछ यूट्यूब वीडियो और टेलीग्राम चैनलों से सीखा था कि कैसे अंतरराष्ट्रीय कॉल को मास्क किया जा सकता है। उसने इन्हीं तरीकों का उपयोग कर धमकी भरे संदेश भेजे।

साइबर वसूली के बढ़ते मामले

दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों में साइबर वसूली के मामलों में तेजी आई है।
साइबर अपराधी अब पारंपरिक फोन कॉल की बजाय व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल और अन्य ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बार वे विदेशी नंबरों से कॉल करते हैं ताकि पीड़ित व्यक्ति डर जाए और पुलिस को भी भ्रमित किया जा सके।

साइबर अपराधी अक्सर दो तरीके अपनाते हैं —

  1. फर्जी धमकी या ब्लैकमेलिंग: किसी के पुराने डेटा या फोटो का इस्तेमाल कर ब्लैकमेल करना।
  2. वसूली या डराकर पैसे मांगना: अंतरराष्ट्रीय गैंग का हवाला देकर लोगों को डराना।

इस मामले में भी आरोपी ने ऐसा ही तरीका अपनाया था, लेकिन पुलिस की आधुनिक तकनीक और पेशेवर जांच ने उसे बचने नहीं दिया।

साइबर सुरक्षा पर बढ़ेगा जोर

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि ऐसे मामलों को देखते हुए अब हर थाना स्तर पर साइबर मॉनिटरिंग सेल को और प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही, दिल्ली पुलिस साइबर सेफ्टी को लेकर लोगों में जागरूकता अभियान भी चलाने जा रही है।

डीसीपी निधिन वलसन ने कहा —

“हम चाहते हैं कि लोग समझें कि साइबर अपराधी अब सिर्फ कंप्यूटर हैकिंग तक सीमित नहीं हैं। अब ये अपराध वसूली, धोखाधड़ी और डराने-धमकाने के नए रूप में सामने आ रहे हैं। इसलिए किसी भी संदिग्ध संदेश या कॉल की सूचना तुरंत पुलिस को दें।”

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आरोपी के खिलाफ दर्ज धाराएं

आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 385 (वसूली का प्रयास), 506 (आपराधिक धमकी) और आईटी एक्ट की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने उसके डिजिटल उपकरणों को जब्त कर फॉरेंसिक लैब भेज दिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उसने किसी और को भी इसी तरह धमकी दी थी।

निष्कर्ष: दिल्ली पुलिस की तेज़ और सटीक कार्रवाई का नतीजा

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि दिल्ली पुलिस न सिर्फ सड़कों पर बल्कि डिजिटल दुनिया में भी अपराधियों के खिलाफ उतनी ही मज़बूती से डटी हुई है।
जहां एक ओर अपराधी तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं, वहीं पुलिस उसी तकनीक का इस्तेमाल अपराध रोकने और अपराधियों को पकड़ने में कर रही है।

कारोबारी मनोज कश्यप का यह मामला इस बात का उदाहरण है कि समय पर की गई शिकायत और पुलिस की त्वरित कार्रवाई किसी भी बड़े खतरे को टाल सकती है।
साइबर अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है — सावधानी और तुरंत रिपोर्ट करना।

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