Delhi Police Nabs Two Youths Making Reels with Illegal Firearms

Delhi Police Warns: Posting Reels with Illegal Weapons is a Crime Delhi Police की बड़ी कार्रवाई दो आरोपी इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर “गैंगस्टर” छवि बनाना

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Delhi Police Warns: Posting Reels with Illegal Weapons is a Crime

Delhi Police की बड़ी कार्रवाई दो आरोपी इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर “गैंगस्टर” छवि बनाना चाहते थे
राजधानी दिल्ली में उत्तर जिला Delhi Police की एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वाड (AATS) की टीम ने सोशल मीडिया पर अवैध हथियारों के साथ वीडियो और रील बनाकर लोगों में दहशत फैलाने वाले दो युवकों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों की उम्र मात्र 18 वर्ष है और वे सोशल मीडिया पर “फेमस” होने के जुनून में इतना बहक गए कि अवैध पिस्तौल और कारतूस खरीदकर खुलेआम हथियार लहराते हुए वीडियो बनाने लगे।

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पुलिस ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से यह प्रवृत्ति तेज़ी से बढ़ रही थी कि कई युवक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर हथियारों के साथ रील और वीडियो अपलोड कर रहे थे। ऐसे वीडियो न केवल कानून का उल्लंघन करते हैं, बल्कि समाज में डर और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करते हैं। इस बढ़ते ट्रेंड को रोकने के लिए उत्तर जिला पुलिस की AATS टीम को विशेष रूप से ऐसे युवाओं पर नज़र रखने और कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।

पहला ऑपरेशन — इंदरलोक मेट्रो स्टेशन के पास दबोचा गया अंकुश

29 अक्टूबर 2025 की देर रात को हेड कांस्टेबल मनोज कुमार (AATS, नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट) को एक गुप्त सूचना मिली कि एक युवक, जो सोशल मीडिया पर पिस्तौल के साथ वीडियो बनाकर लोगों को धमकाता है, इंदरलोक मेट्रो स्टेशन के पास अपराध करने के इरादे से आने वाला है।

इस सूचना पर तत्परता दिखाते हुए इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह (इंचार्ज, AATS/North District) के नेतृत्व और एसीपी अनिल शर्मा (ऑपरेशन सेल/नॉर्थ) के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम में एचसी मनोज कुमार, एचसी मोंबीर, कांस्टेबल कालूराम और कांस्टेबल नितेश शामिल थे।

टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर रणनीतिक तरीके से जाल बिछाया। रात करीब 11:40 बजे इंदरलोक मेट्रो स्टेशन से शास्त्री नगर की ओर जा रहे एक युवक को गुप्त सूत्र की निशानदेही पर पकड़ा गया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक देसी पिस्तौल और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए।

पूछताछ में आरोपी की पहचान अंकुश (उम्र 18 वर्ष, निवासी नई बस्ती, प्रताप नगर, दिल्ली) के रूप में हुई। उसके खिलाफ थाना सराय रोहिल्ला में FIR नंबर 727/2025 धारा 25/54/59 Arms Act के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।

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दूसरा ऑपरेशन — किशनगंज रेलवे स्टेशन के पास गिरफ़्तार हुआ निखिल उर्फ़ कटप्पा

इसी दिन यानी 29 अक्टूबर 2025 को ही हेड कांस्टेबल राजेंद्र लाथर (AATS/North District) को एक और गुप्त सूचना मिली कि एक युवक निखिल नाम का व्यक्ति, जो सोशल मीडिया पर पिस्तौल के साथ वीडियो बनाकर लोगों को डराता है, किशनगंज रेलवे स्टेशन के पास गोदाम नंबर 13 के आसपास आने वाला है।

इस सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए एएसआई ओमप्रकाश, एचसी राजेंद्र लाथर, कांस्टेबल सुमित और कांस्टेबल बिजेंद्र की टीम गठित की गई। इस टीम का नेतृत्व भी इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह ने किया और दिशा-निर्देश एसीपी अनिल शर्मा ने दिए।

रात करीब 11:50 बजे जब युवक वहां पहुंचा, तो पुलिस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। उसकी तलाशी लेने पर उसके पास से भी एक देसी पिस्तौल और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए।

आरोपी की पहचान निखिल उर्फ़ कटप्पा (उम्र 18 वर्ष, निवासी खेमा कटरा, किशनगंज, दिल्ली) के रूप में हुई। उसके खिलाफ थाना गुलाबीबाग में FIR नंबर 355/2025 धारा 25/54/59 Arms Act के तहत मामला दर्ज किया गया।

पूछताछ में खुलासा — ‘फेमस’ होने का जुनून बना अपराध की राह

दोनों आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की गई, क्योंकि दोनों एक-दूसरे को नहीं जानते थे। पूछताछ में दोनों ने जो बताया, वह आज के सोशल मीडिया प्रभाव की एक खतरनाक तस्वीर पेश करता है।

दोनों ने स्वीकार किया कि वे इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर अधिक लाइक्स, फॉलोअर्स और ‘वायरल’ पहचान पाने की चाह में अवैध हथियारों का प्रयोग करते हुए वीडियो बनाते थे। इसके लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से अपने दोस्तों की मदद से देसी पिस्तौल और कारतूस खरीदे।

पुलिस के अनुसार, दोनों युवकों का किसी बड़े अपराधी गिरोह से सीधा संबंध नहीं मिला, लेकिन यह तथ्य चिंताजनक है कि कम उम्र के युवक सोशल मीडिया प्रसिद्धि के लिए अपराध की ओर बढ़ रहे हैं।

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आरोपियों का प्रोफाइल — पढ़ाई छोड़ चुके, शराब की लत में डूबे किशोर

  1. अंकुश (उम्र 18 वर्ष) — नई बस्ती, प्रताप नगर का निवासी है। उसने 12वीं तक पढ़ाई की है लेकिन फिलहाल बेरोज़गार है। वह नशे का आदी है और अपने माता-पिता, एक भाई और एक बहन के साथ रहता है।
  2. निखिल उर्फ़ कटप्पा (उम्र 18 वर्ष) — किशनगंज के खेमा कटरा का रहने वाला है। उसने 10वीं तक पढ़ाई की और फिर पढ़ाई छोड़ दी। वह भी शराब और अन्य नशे का सेवन करता है। वह अपने माता-पिता और दो बहनों के साथ रहता है।

पुलिस के अनुसार, दोनों का पारिवारिक पृष्ठभूमि सामान्य है, लेकिन इनका सोशल मीडिया और फिल्मों से प्रभावित होकर “गैंगस्टर” बनने का सपना उन्हें अपराध की दिशा में ले गया।

बरामदगी

  • दो देसी पिस्तौल
  • चार जिंदा कारतूस

दोनों हथियारों को जब्त कर लिया गया है और यह भी जांच की जा रही है कि इन हथियारों का पहले किसी अपराध में उपयोग हुआ या नहीं।

पुलिस की चेतावनी — सोशल मीडिया पर हथियारों का दिखावा अपराध है

उत्तर जिला के डीसीपी (राजा बंथिया, IPS) ने बताया कि दिल्ली पुलिस सोशल मीडिया पर अवैध हथियारों के साथ रील बनाने और अपराध की ग्लैमराइजेशन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी।

उन्होंने कहा —

“सोशल मीडिया पर अवैध हथियारों के साथ वीडियो बनाना न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करता है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

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डीसीपी ने आगे कहा कि AATS की टीमें लगातार सोशल मीडिया पर नजर रख रही हैं। पुलिस साइबर सेल की मदद से ऐसे अकाउंट्स की पहचान कर रही है जो इस तरह के वीडियो अपलोड करते हैं। इन मामलों में सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी और उन्हें उचित इनाम भी दिया जा सकता है।

युवाओं के लिए संदेश — फॉलोअर्स के चक्कर में न खोएं भविष्य

यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि समाज के सामने एक गहरी सोच और चुनौती का प्रतीक है। सोशल मीडिया के दौर में जहां “फेम” और “वायरल” होना सफलता का प्रतीक बन गया है, वहीं कम उम्र के युवाओं में यह मानसिकता अपराध की ओर धकेल रही है।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की प्रवृत्तियाँ युवाओं के अंदर “फेक इमेज बिल्डिंग” की मानसिकता पैदा करती हैं — जिसमें वे असली उपलब्धि के बजाय सोशल मीडिया की तात्कालिक प्रसिद्धि के पीछे भागते हैं।

दिल्ली पुलिस ने अपील की है कि माता-पिता अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखें, विशेषकर जब वे रील या वीडियो बनाते हैं। समाज को भी यह समझना होगा कि अपराध को ग्लैमराइज करना किसी भी रूप में खतरनाक है।

AATS की भूमिका — तेज़ कार्रवाई और तकनीकी निगरानी

एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वाड (AATS), जो मुख्यतः वाहन चोरी रोकथाम में काम करती है, अब सोशल मीडिया पर उभर रहे नए तरह के अपराधों पर भी सक्रिय रूप से काम कर रही है।

टीम ने न सिर्फ गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की, बल्कि तकनीकी निगरानी, सोशल मीडिया एनालिसिस और स्थानीय नेटवर्क का इस्तेमाल करके दोनों आरोपियों की लोकेशन और मूवमेंट को ट्रैक किया। यह आधुनिक पुलिसिंग और तकनीक के मेल का उदाहरण है।

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निष्कर्ष — अपराध के “कंटेंट” को नहीं मिलेगी जगह

दोनों युवकों की गिरफ्तारी ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि सोशल मीडिया पर अपराध का प्रदर्शन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई से उन युवाओं को भी चेतावनी मिलनी चाहिए जो रील्स में हथियार, धमकी या अपराधी जीवनशैली को दिखाकर “फेमस” होना चाहते हैं।

कानून स्पष्ट है — अवैध हथियार रखना और उसका प्रदर्शन दोनों ही अपराध हैं, चाहे वह सड़क पर हो या स्क्रीन पर।

इस मामले ने एक बार फिर यह साबित किया है कि “वायरल होने की चाह” अगर विवेकहीन हो जाए, तो वह सीधे जेल की सलाखों तक ले जाती है।

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