Delhi’s Anand Parbat Forest Fire Exposes Administration’s Negligence Again

Toxic Flames in Central Delhi: Scrap Dealers and Illegal Settlements Under Fire सेंट्रल Delhi के आनंद पर्वत में लगी भीषण आग: डीडीए लैंड के जंगल

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Toxic Flames in Central Delhi: Scrap Dealers and Illegal Settlements Under Fire

सेंट्रल Delhi के आनंद पर्वत में लगी भीषण आग: डीडीए लैंड के जंगल में फिर दोहराया गया इतिहास

सेंट्रल Delhi के आनंद पर्वत थाना क्षेत्र में स्थित अपार आनंद पर्वत आर्मी कैंप के पास, जिसे स्थानीय लोग रामजस ग्राउंड के नाम से भी जानते हैं, एक बार फिर भयानक आग लगने की खबर से पूरा इलाका दहशत में आ गया। यह इलाका डीडीए की ग्रीनलैंड श्रेणी में आता है, जहां हरियाली और प्राकृतिक पेड़ों का क्षेत्र फैला हुआ है। लेकिन बुधवार दोपहर अचानक यहां आग लग गई, जिसने कुछ ही घंटों में कई एकड़ इलाके को अपनी लपेट में ले लिया।

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अवैध कब्जे और कबाड़ियों के कारण लगी आग

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह इलाका पिछले कई वर्षों से अवैध रूप से कब्जा किए गए झोपड़पट्टियों और कबाड़ियों के अड्डों में बदल चुका है। इन लोगों ने डीडीए की जमीन पर न केवल झुग्गियां बना रखी हैं बल्कि यहाँ पर रोज़ाना कूड़े-कचरे और प्लास्टिक का ढेर लगाया जाता है। यही कूड़ा अब इस आग की वजह बना है।

रहवासियों का कहना है कि इन कबाड़ियों द्वारा रोज़ाना तांबा, प्लास्टिक, और इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ जलाकर धातु निकालने का काम किया जाता है, जिससे बार-बार इस क्षेत्र में आग की घटनाएँ घटती रहती हैं। इससे आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है।

प्रशासन की लापरवाही उजागर

आसपास के निवासियों ने बताया कि उन्होंने कई बार डीडीए अधिकारियों, पुलिस और नगर निगम को इसकी शिकायत की, लेकिन किसी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। एक स्थानीय निवासी ने बताया,

“यहां हर दिन कोई न कोई आग लगती रहती है। कूड़ा जलाने से धुआँ पूरे इलाके में फैलता है। बच्चे, बुजुर्ग सभी को सांस लेने में परेशानी होती है। हमने कई बार शिकायत की, लेकिन पुलिस और नगर निगम सिर्फ औपचारिक कार्रवाई करके चले जाते हैं।”

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निवासियों का आरोप है कि इन अवैध बस्तियों को हटाने के लिए न तो डीडीए ने कोई अभियान चलाया और न ही थाना आनंद पर्वत की पुलिस ने कोई गंभीर कदम उठाया। लोगों का कहना है कि पुलिस, स्थानीय प्रशासन और कबाड़ियों के बीच मिलीभगत के कारण यह अवैध कब्जा लगातार बढ़ता जा रहा है।

दो साल पहले भी लगी थी ऐसी ही आग

यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में आग लगी हो। दो साल पहले भी इसी जगह पर भयानक आग लगी थी, जिसमें सैकड़ों पेड़ जलकर राख हो गए थे और कई झुग्गियां खाक हो गई थीं। उस समय भी प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन नतीजा वही “ढाक के तीन पात” रहा।

अब एक बार फिर वैसी ही त्रासदी सामने है। इस बार भी करीब 50 से 70 पेड़ जलकर राख हो गए हैं। कई पक्षियों के घोंसले नष्ट हो गए, और स्थानीय पर्यावरण को गहरा नुकसान पहुँचा है।

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ग्रीन ज़ोन में फैल रहा कूड़ा और धुआँ

डीडीए की ग्रीनलैंड मानी जाने वाली इस जगह पर अब चारों ओर कूड़े के ढेर, जलते प्लास्टिक और राख की बदबू फैल चुकी है। जो इलाका कभी हरियाली से भरा रहता था, अब वहाँ राख और धुआँ ही नज़र आता है।

रहवासियों का कहना है कि रात के वक्त ट्रक और रिक्शा में कूड़ा लाकर यहाँ फेंका जाता है और फिर उसे जला दिया जाता है ताकि कोई सबूत न बचे। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है बल्कि पास में स्थित आर्मी कैंप के लिए भी सुरक्षा खतरा बढ़ गया है।

दमकल विभाग की कार्रवाई

आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। दमकल कर्मियों ने बताया कि आग इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में उसने पूरे जंगल को घेर लिया था। हवा की दिशा के कारण आग तेजी से फैली।

दमकल विभाग के एक अधिकारी ने बताया,

“हमारे आने से पहले ही स्थानीय लोग पानी की बाल्टियों से आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन आग बहुत तेज थी। प्लास्टिक और सूखे पत्तों के कारण लपटें फैलती चली गईं।”

पक्षियों और पेड़ों को बड़ा नुकसान

इस आग ने न सिर्फ पेड़ों को जलाया, बल्कि इस क्षेत्र में रहने वाले कई पक्षियों के घोंसले और अंडे भी नष्ट कर दिए। कुछ पक्षी घायल अवस्था में पाए गए। स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में इस इलाके को “संरक्षित हरित क्षेत्र” घोषित किया जाए और यहाँ किसी भी तरह की मानवीय गतिविधि पर प्रतिबंध लगाया जाए।

स्थानीय लोगों की पीड़ा

यहाँ रहने वाले एक बुजुर्ग निवासी ने बताया,

“हमने कई बार थाना आनंद पर्वत में शिकायत दी कि ये कबाड़ी रोज़ाना आग लगाते हैं। दिन-रात धुआँ छाया रहता है। लेकिन पुलिस कभी कोई कार्रवाई नहीं करती। उल्टा ये लोग और भी खुलेआम काम करने लगते हैं।”

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महिलाओं ने बताया कि इस आग से घरों में धुआँ भर गया, बच्चे बीमार पड़ गए हैं और सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह जगह पर्यावरणीय संकट का केंद्र बन सकती है।

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। न तो डीडीए के अधिकारी मौके पर पहुंचे, न ही नगर निगम का कोई अधिकारी बयान देने आया।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि आग के कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन स्थानीय लोग इस जांच पर भरोसा नहीं करते। उनका कहना है कि हर बार की तरह यह मामला भी कुछ दिनों में ठंडा पड़ जाएगा।

विशेषज्ञों की राय

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ दिल्ली की हरित संरचना के लिए गंभीर खतरा हैं। दिल्ली पहले ही प्रदूषण की मार झेल रही है और अब अगर ग्रीन ज़ोन भी जलते रहेंगे, तो राजधानी में सांस लेना और मुश्किल हो जाएगा।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि अवैध कब्जों को हटाए बिना इस समस्या का कोई समाधान संभव नहीं है।

क्या कहती है पुलिस

थाना आनंद पर्वत पुलिस का कहना है कि आग की सूचना मिलते ही टीमें मौके पर पहुँच गई थीं और दमकल विभाग के साथ मिलकर आग बुझाने में मदद की। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और अगर कोई लापरवाही या अवैध गतिविधि पाई जाती है तो कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस हर बार यही बयान देती है, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता।

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निष्कर्ष

सेंट्रल दिल्ली का आनंद पर्वत इलाका राजधानी की प्रशासनिक लापरवाही और पर्यावरणीय संकट की जिंदा तस्वीर बन चुका है।
हर साल आग, अवैध कब्जा, और कूड़े के ढेर इस हरियाली को निगल रहे हैं।
लोगों की शिकायतें, दमकल की गाड़ियाँ और प्रशासन के बयान – सब मिलकर एक “औपचारिक रिवाज” बन चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस है।

अगर अब भी प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में दिल्ली के ग्रीन ज़ोन सिर्फ मानचित्रों में रह जाएंगे, जमीन पर नहीं।

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