
राजधानी दिल्ली से एक बार फिर साफ-सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। आजादपुर परिसर के पास कुछ दिन पहले दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए “पीला पंजा” चलाया गया था। कार्रवाई के बाद उम्मीद की जा रही थी कि क्षेत्र साफ-सुथरा रहेगा, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट दिखाई दे रही है। इलाके में अब भी कूड़े का अंबार लगा हुआ है, जिससे बदबू, गंदगी और बीमारियों का खतरा लगातार मंडरा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। आसपास रहने वाले नागरिकों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। क्षेत्र में आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद और भारतीय जनता पार्टी के विधायक होने के बावजूद हालात में कोई बड़ा सुधार नजर नहीं आ रहा।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि देशभर में चल रहे स्वच्छ भारत अभियान का असर आखिर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा। नागरिकों को याद है कि इस अभियान के दौरान कई जनप्रतिनिधि, जिनमें रेखा गुप्ता जैसे नेता भी शामिल रहे, सार्वजनिक रूप से सफाई करते नजर आए थे। लेकिन आजादपुर परिसर की मौजूदा स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती है।
स्थानीय जनता की मांग है कि एमसीडी अधिकारी तुरंत ठोस कार्रवाई करें, नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करें और कूड़े के स्थायी निस्तारण की योजना लागू करें। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह गंदगी गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या वास्तव में इलाके को स्वच्छ बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।