
राजधानी दिल्ली की एक सड़क… देर रात का सन्नाटा… और उसी सन्नाटे में छिपा एक 20 फीट लंबा खुला गड्ढा। यही गड्ढा 25 वर्षीय कमल की जिंदगी पर भारी पड़ गया।
कमल, जो एचडीएफसी बैंक में कार्यरत थे, रोज की तरह ड्यूटी खत्म कर अपने घर लौट रहे थे। जनकपुरी डिस्टिक सेंटर की सड़क पर पहुंचते ही उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित हुई और सीधे उस खुले गड्ढे में जा गिरी, जो सड़क के बीचोंबीच खुदा हुआ था। न कोई बैरिकेड, न कोई चेतावनी संकेत, न रोशनी। अंधेरे में यह गड्ढा मानो मौत का जाल बनकर इंतजार कर रहा था।
प्रथम दृष्टि में यही माना जा रहा है कि सड़क पर मौजूद यही 20 फीट लंबा गड्ढा इस हादसे की सबसे बड़ी वजह बना। बताया जा रहा है कि यह खुदाई दिल्ली जल बोर्ड से जुड़ी थी, लेकिन सुरक्षा इंतजाम नदारद थे। सवाल यह है कि अगर खुदाई हुई थी, तो आम लोगों की सुरक्षा के लिए इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
इस घटना पर आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राजधानी में बार बार ऐसे हादसे हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियां कोई सबक नहीं ले रहीं। एक 25 साल के युवक की जान लापरवाही की भेंट चढ़ गई।
वहीं, मृतक के बड़े भाई मयंक ध्यानी इस पूरे मामले को सिर्फ एक सामान्य हादसा मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि कमल रोज इसी रास्ते से घर आते थे, ऐसे में अचानक गड्ढे में गिर जाना कई सवाल खड़े करता है। परिवार ने इस मामले में निष्पक्ष और हाइब्रिड जांच की मांग की है।
परिवार का यह भी आरोप है कि जब देर रात कमल से संपर्क नहीं हो पाया, तो उन्होंने खुद अलग अलग थानों के चक्कर लगाए, लेकिन प्रशासनिक मदद समय पर नहीं मिली। अगर तलाश में देरी न होती, तो शायद तस्वीर कुछ और होती।
कमल तीन भाइयों में से एक थे और जुड़वा थे। इस दर्दनाक हादसे का सबसे दुखद पहलू यह है कि जिस दिन यह घटना हुई, उसी दिन उनके पिता की शादी की सालगिरह थी। खुशियों का दिन मातम में बदल गया।
जनकपुरी की यह सड़क अब सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि कई सवालों का प्रतीक बन गई है। सवाल जिम्मेदारी का, सुरक्षा का, और उस लापरवाही का, जिसने एक घर का चिराग बुझा दिया।