हिंदू राव अस्पताल में विश्व फार्मासिस्ट दिवस का आयोजन

हिंदू राव अस्पताल दिल्ली: फार्मासिस्टों ने वर्ल्ड फार्मासिस्ट डे पर कैडर गठन की मांग दोहराई जायज़ मांगों को लेकर उठी आवाज़स्थान: हिंदू राव अस्पताल, दिल्ली

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हिंदू राव अस्पताल दिल्ली: फार्मासिस्टों ने वर्ल्ड फार्मासिस्ट डे पर कैडर गठन की मांग दोहराई

जायज़ मांगों को लेकर उठी आवाज़स्थान: हिंदू राव अस्पताल, दिल्ली विश्वभर में हर वर्ष 25 सितंबर को “वर्ल्ड फार्मासिस्ट डे” (World Pharmacist Day) मनाया जाता है। यह दिन फार्मासिस्टों के महत्व, उनके योगदान और समाज में उनकी अहम भूमिका को रेखांकित करने के लिए समर्पित है। दिल्ली नगर निगम के सबसे बड़े अस्पताल, हिंदू राव अस्पताल, में भी इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

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इस कार्यक्रम में मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आनंद नारनौलिया, विभिन्न वरिष्ठ अधिकारीगण, चिकित्सक वर्ग, और सबसे अहम – अस्पताल में कार्यरत समस्त फार्मासिस्ट मौजूद रहे। समारोह के दौरान फार्मासिस्टों ने जहाँ अपने पेशे से जुड़ी अहमियत पर प्रकाश डाला, वहीं सरकार और प्रशासन से अपनी जायज़ मांगों को जल्द पूरा करने की अपील भी की।

आयोजन की झलक

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण और दीप प्रज्वलन से हुई। उसके बाद मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आनंद नारनौलिया ने फार्मासिस्टों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि—

“फार्मासिस्ट सिर्फ दवा देने वाले कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि वे मरीज और दवा के बीच का सबसे महत्वपूर्ण सेतु हैं। उनकी जानकारी, सावधानियाँ और परामर्श किसी भी इलाज को सफल बनाने में अत्यधिक योगदान देता है।”

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इसके बाद अस्पताल परिसर में उपस्थित सभी फार्मासिस्टों को सम्मानित किया गया।

फार्मासिस्ट की भूमिका और महत्व

फार्मासिस्टों को आमतौर पर “healthcare system की backbone” कहा जाता है। वे केवल दवाइयाँ बाँटने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि—

  • दवाओं की सही मात्रा और समय बताने में मदद करते हैं।
  • डॉक्टर और मरीज के बीच “मेडिसिन काउंसलर” की भूमिका निभाते हैं।
  • दवाइयों के दुष्प्रभाव (side effects) से मरीज को सचेत करते हैं।
  • दवाइयों के स्टॉक, गुणवत्ता और समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं।

अस्पताल जैसे बड़े संस्थानों में जहाँ रोज़ाना हजारों मरीज इलाज कराने आते हैं, वहाँ फार्मासिस्ट का काम और भी अहम हो जाता है।

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जायज़ मांगें – वर्षों से लंबित

कार्यक्रम के दौरान फार्मासिस्टों ने अपनी मांगों को फिर से उठाया। सबसे प्रमुख मांगें थीं:

  1. फार्मासिस्ट कैडर का गठन
    • लंबे समय से फार्मासिस्ट एक अलग कैडर बनाने की मांग कर रहे हैं।
    • इससे उनकी promotion, transfer policy, और professional growth का रास्ता साफ होगा।
  2. वेतन विसंगति का समाधान
    • कई वर्षों से फार्मासिस्टों का वेतन अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के बराबर नहीं किया गया है।
    • समान कार्य करने के बावजूद salary disparity बनी हुई है।
  3. पदोन्नति और प्रशिक्षण के अवसर
    • फार्मासिस्टों को उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं कराए जाते।
    • बेहतर training से उनकी कार्यक्षमता और भी बढ़ सकती है।
  4. काम के घंटे और कार्यदबाव
    • बड़े अस्पतालों में फार्मासिस्टों पर कार्यदबाव बहुत अधिक है।
    • इसके अनुरूप manpower बढ़ाने की ज़रूरत है।

फार्मासिस्टों की भावनाएँ

इस अवसर पर अस्पताल के कई फार्मासिस्टों ने मंच से अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। उनका कहना था कि—

“हिंदू राव अस्पताल में विश्व फार्मासिस्ट दिवस, कैडर बनाने और वेतन समानता की मांग तेज

हम मरीजों की सेवा में चौबीसों घंटे लगे रहते हैं, लेकिन सरकार हमारी समस्याओं की अनदेखी कर रही है।”

“वर्षों से मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक फार्मासिस्ट कैडर नहीं बनाया गया। यह हमारे लिए हताशाजनक है।”

“अगर दवाइयों की सही उपलब्धता और परामर्श समय पर न मिले, तो इलाज अधूरा रह सकता है। फिर भी हमें पर्याप्त मान-सम्मान और सुविधा नहीं मिलती।”

प्रशासनिक दृष्टिकोण

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने भी फार्मासिस्टों की बातों को गंभीरता से सुना। डॉ. आनंद नारनौलिया ने कहा कि वे इस विषय को संबंधित विभाग तक पहुँचाएँगे और फार्मासिस्टों के हित में सकारात्मक प्रयास करेंगे।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब फार्मासिस्टों ने अपनी समस्याओं को उठाया है। पिछले कई वर्षों से दिल्ली और देशभर के फार्मासिस्ट आंदोलन, ज्ञापन और हड़ताल के माध्यम से अपनी मांगों को सरकार के सामने रख रहे हैं।

वर्ल्ड फार्मासिस्ट डे का महत्व

इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य है:

  • फार्मासिस्टों की अहम भूमिका को जनमानस तक पहुँचाना।
  • स्वास्थ्य सेवाओं में उनकी जिम्मेदारियों को मान्यता देना।
  • समाज को यह बताना कि दवा केवल “खरीदने और खाने” की वस्तु नहीं, बल्कि उसके पीछे वैज्ञानिक ज्ञान और सही परामर्श ज़रूरी है।
  • सरकार और प्रशासन को यह याद दिलाना कि फार्मासिस्टों को उनका योग्य दर्जा और अधिकार मिलना चाहिए।

भविष्य की उम्मीदें

इस समारोह ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि फार्मासिस्ट केवल दवाइयों के रखवाले नहीं, बल्कि “मरीजों की जीवनरेखा” हैं। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से लेकर कैडर गठन और वेतन विसंगति समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाती है या नहीं।

फार्मासिस्टों की उम्मीदें अब भी जीवित हैं। उन्हें भरोसा है कि जैसे डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को समय-समय पर उनकी मांगों के अनुसार सुविधाएँ दी गई हैं, वैसे ही फार्मासिस्टों को भी उनका हक मिलेगा।

दिल्ली के सबसे बड़े हिंदू राव अस्पताल में विश्व फार्मासिस्ट दिवस मनाया गया

हिंदू राव अस्पताल में मनाया गया विश्व फार्मासिस्ट दिवस सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह फार्मासिस्टों की आवाज़ बुलंद करने का मंच भी बना।

यहाँ एक तरफ फार्मासिस्टों के महत्व और योगदान को सराहा गया, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से लंबित मांगों को भी मजबूती से रखा गया।

यह कहना गलत नहीं होगा कि—
“स्वस्थ भारत का सपना तभी पूरा हो सकता है, जब स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ यानी फार्मासिस्टों को उनका हक और सम्मान मिलेगा।”

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