दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा द्वारा कनॉट प्लेस स्थित रघुमल आर्य कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में होली का विशेष आयोजन

नई दिल्ली में दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा द्वारा कनॉट प्लेस स्थित रघुमल आर्य कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में होली का विशेष आयोजन किया गया। इस

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नई दिल्ली में दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा द्वारा कनॉट प्लेस स्थित रघुमल आर्य कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में होली का विशेष आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं, विद्यार्थियों और स्थानीय निवासियों ने भाग लेकर रंग, भक्ति और आपसी सौहार्द के इस पर्व को उत्साह के साथ मनाया।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से अतिथियों के चंदन तिलक के साथ स्वागत से हुई। इसके बाद वैदिक परंपरा के अनुसार नवसस्येष्टि यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें समाज में शांति, सद्भाव और समृद्धि की कामना की गई। यज्ञ के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन का आनंद लिया और विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया।

समारोह का सबसे आकर्षक हिस्सा ‘फूलों की होली’ रहा, जिसमें सभी ने पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए फूलों की वर्षा के बीच होली खेली। इस दौरान पूरा परिसर फूलों की सुगंध, रंग और उत्साह से सराबोर नजर आया।

इस आयोजन के दौरान एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल भी की गई। कार्यक्रम में शामिल परिवारों ने यह संकल्प लिया कि वे हर दिन कम से कम 30 मिनट का समय बिना मोबाइल फोन या किसी भी स्क्रीन के केवल पारिवारिक बातचीत और साथ बिताएंगे। इस पहल का उद्देश्य परिवारों को डिजिटल व्यवधानों से दूर रहकर आपसी संवाद, हंसी-मजाक और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए प्रेरित करना है।

इस मौके पर दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के महामंत्री विनय आर्य ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह सत्य, एकता और नवजीवन का प्रतीक है। फूलों से होली मनाकर हम प्रकृति के प्रति सम्मान और समाज में भाईचारे का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि आर्य समाज हमेशा सादगी, पवित्रता और सकारात्मक जीवन मूल्यों को बढ़ावा देता रहा है और ऐसे आयोजनों के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाता है।

होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो बसंत ऋतु के आगमन और अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक माना जाता है। आर्य समाज के लिए यह पर्व स्वामी दयानंद सरस्वती की शिक्षाओं को स्मरण करने और समाज में सत्यनिष्ठा, सद्भाव तथा सामूहिक कल्याण की भावना को मजबूत करने का भी अवसर होता है।

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