
POLICE STATION सराय रोहिल्ला दिल्ली पुलिस ने तोड़ा हथियार माफिया का नेटवर्क, यमुना किनारे छिपी फैक्ट्री से भारी जखीरा बरामद
सराय रोहिल्ला पुलिस की बड़ी सफलता: 10 दिन के भीतर दूसरी अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़
नई दिल्ली, 14 सितम्बर 2025:
राजधानी दिल्ली की सराय रोहिल्ला थाना पुलिस ने अवैध हथियारों के खिलाफ लगातार अभियान चलाते हुए एक और बड़ी सफलता हासिल की है। मात्र दस दिनों के भीतर टीम ने दूसरी बार अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़ कर संगठित अपराध की एक बड़ी कड़ी को तोड़ा है। इस बार फैक्ट्री उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में यमुना नदी के किनारे एक बेहद दुर्गम और जलमग्न इलाके में संचालित हो रही थी। पुलिस ने यहां से भारी मात्रा में हथियारों का जखीरा और कच्चा माल बरामद किया है।
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ऑपरेशन की पृष्ठभूमि
1 सितम्बर 2025 को सराय रोहिल्ला पुलिस ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में जटारी-पिशावा रोड स्थित खेतों के बीच एक अवैध हथियार फैक्ट्री का पर्दाफाश किया था। इस कार्रवाई में हनवीर उर्फ हन्नू उर्फ पप्पू उर्फ घुर्रा नामक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से बड़ी मात्रा में देशी पिस्तौल, बंदूकें और निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल बरामद किया गया था।
इस मामले में FIR नंबर 525/2025 दर्ज कर पुलिस ने आगे की जांच शुरू की। पूछताछ और तकनीकी निगरानी के दौरान सामने आया कि इस नेटवर्क में और भी कई लोग सक्रिय हैं, जो अलग-अलग जगहों पर फैक्ट्रियाँ चला रहे हैं।

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पुलिस टीम और नेतृत्व
पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए पुलिस ने एक विशेष टीम गठित की। इसमें सब-इंस्पेक्टर कुलदीप, हेड कॉन्स्टेबल अनुज, दीपक त्यागी, संदीप कुमार, संजीव, रामबाबू, अमित और कॉन्स्टेबल रिंकू शामिल थे। टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर विकास राणा, SHO सराय रोहिल्ला ने किया। वहीं इस पूरी कार्रवाई की निगरानी एसीपी अनिल शर्मा (उप प्रभाग सराय रोहिल्ला) कर रहे थे।
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जांच और सूत्रों से मिली जानकारी
हनवीर की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसका साथी शिवचरण निवासी मथुरा, उत्तर प्रदेश का नाम सामने आया। उसने स्वीकार किया कि शिवचरण यमुना नदी के किनारे गांव आनरेड़ा गढ़ी, मथुरा में एक और हथियार फैक्ट्री चला रहा है।
पुलिस ने CDR, लोकेशन और अन्य खुफिया सूचनाओं का विश्लेषण किया। जब सभी तथ्य पुख्ता हो गए तो टीम ने मथुरा रवाना होकर 11 सितम्बर 2025 को आरोपी को दबोच लिया।

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खतरनाक और साहसी ऑपरेशन
शिवचरण ने पूछताछ के दौरान पुलिस को अपनी फैक्ट्री का स्थान बताया। फैक्ट्री यमुना नदी के किनारे एक पूरी तरह जलमग्न इलाके में थी, जहां तक पहुँचने के लिए करीब 3 किलोमीटर का रास्ता पानी में डूबा हुआ था।
पुलिस टीम ने बिना पीछे हटे इस चुनौती को स्वीकार किया।
- शुरुआती रास्ते में पानी की गहराई 3 से 4 फीट थी।
- धीरे-धीरे यह गहराई 5 से 8 फीट तक पहुँच गई।
- पूरी टीम ने 2 घंटे की मशक्कत के बाद इस खतरनाक इलाके को पार किया।
बिना भोजन, बिना रोशनी और बिना मोबाइल नेटवर्क के हालात में टीम ने अत्यधिक साहस दिखाया। यहाँ तक कि मोबाइल फोन पानी में भीगने के कारण काम करना बंद कर चुके थे।
फैक्ट्री का खुलासा
फैक्ट्री तक पहुँचकर पुलिस ने जब ताले तोड़े तो अंदर अवैध हथियारों का बड़ा जखीरा मिला। बरामदगी में शामिल हैं:
- 14 देशी पिस्तौल (9 सिंगल बैरल और 5 डबल बैरल)
- 1 मस्कट गन
- 350 से अधिक देशी पिस्तौल बनाने लायक कच्चा माल
- 50 बैरल, 28 छोटे पाइप, लकड़ी के हैंडल
- 01 ग्राइंडर, 01 प्लायर, 03 ड्रिल मशीनें, 01 कटर मशीन, 01 आरी समेत अन्य उपकरण
ये सब दर्शाते हैं कि फैक्ट्री बड़े पैमाने पर हथियार बनाने का केंद्र थी।

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आरोपी की प्रोफ़ाइल
गिरफ्तार आरोपी शिवचरण (उम्र 60 वर्ष) पिता तोड़ी राम, निवासी गांव आनरेड़ा गढ़ी, तहसील मंट, थाना नौहझील, जिला मथुरा है।
पूछताछ में उसने कबूल किया कि पहले वह हनवीर के साथ मिलकर इस फैक्ट्री को चलाता था। बाद में हनवीर ने अलीगढ़ में दूसरी फैक्ट्री खोल ली और मथुरा वाली यूनिट शिवचरण को सौंप दी। दोनों मुनाफे में 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते थे।
स्थानीय ग्रामीणों ने भी बताया कि शिवचरण फैक्ट्री के आसपास दो कुत्ते पालकर रखता था ताकि कोई अनजान व्यक्ति न पहुँच सके।
गिरफ्तारी के दौरान आरोपी की चालाकी
पुलिस जब हथियारों का जखीरा और आरोपी के साथ वापस लौट रही थी तो रास्ते में जलमग्न इलाके का फायदा उठाकर शिवचरण ने भागने की कोशिश की। लेकिन टीम ने तुरंत उसे घेर लिया और उसकी योजना को विफल कर दिया। आरोपी को हथियारों और बरामदगी समेत सुरक्षित थाने लाया गया।

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इंटरोगेशन में बड़ा खुलासा
शिवचरण ने स्वीकार किया कि सभी हथियार हनवीर के जरिए बेचे जाते थे। हनवीर दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपराधियों तक ये अवैध हथियार पहुँचाता था।
इससे साफ है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा है और इसमें और भी लोग जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब पूरे रैकेट की गहन जांच कर रही है।
सराय रोहिल्ला पुलिस की बहादुरी
इस ऑपरेशन ने दिल्ली पुलिस की जुझारू भावना और हौसले को साबित किया है।
- बिना संसाधनों और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी टीम ने हार नहीं मानी।
- पानी में 8 फीट तक डूबकर भी आरोपी और हथियारों को सुरक्षित बरामद किया।
- आरोपी की चालाकी को नाकाम कर पूरी कार्रवाई को सफल बनाया।
अवैध हथियार फैक्ट्रियों का नेटवर्क और खतरा
देशभर में अपराधों की बड़ी जड़ें इन्हीं अवैध हथियार फैक्ट्रियों से जुड़ी होती हैं।
- चोरी, लूट, डकैती और हत्या जैसे अपराधों में अधिकतर देशी हथियार इस्तेमाल होते हैं।
- इन हथियारों की कीमत कम और उपलब्धता आसान होने से अपराधियों की पहली पसंद बन जाते हैं।
- छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में छिपकर चल रही फैक्ट्रियाँ देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नेटवर्क को तोड़ना बेहद जरूरी है, वरना संगठित अपराध को बढ़ावा मिलता रहेगा।

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आगे की कार्रवाई
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन हथियारों की सप्लाई किन-किन राज्यों में हो रही थी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या इसमें किसी बड़े गिरोह या माफिया का हाथ है।
इसके अलावा बरामद कच्चे माल और हथियारों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि यह पता चल सके कि पहले से हुई वारदातों में इनका इस्तेमाल हुआ या नहीं।
10 दिनों के भीतर दूसरी बार अवैध हथियार फैक्ट्री का खुलासा कर सराय रोहिल्ला थाना पुलिस ने अपराध के नेटवर्क को करारा झटका दिया है। अलीगढ़ और मथुरा दोनों जगहों पर हुई कार्रवाई से साफ है कि पुलिस न केवल दिल्ली बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी सक्रिय होकर अपराधियों को पकड़ रही है।
यह सफलता न केवल पुलिस की मेहनत और बहादुरी की मिसाल है बल्कि यह संदेश भी है कि अवैध हथियार बनाने और बेचने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।